बसंत पंचमी
अंगारों की तरह दिखते पलाश के फूल, आम के पेड़ों पर आये बौर, हरियाली से ढकी धरती और चारो और पीली सरसों बसंत ऋतु के शुभ आगमन की बधाई देते हैं वास्तव में बसंत पंचमी ऋतु परिवर्तन का ऐसा त्यौहार है| जो अपने साथ मद-मस्त परिवर्तन लेकर आती है| Read More

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ग्रह शांति तथा सर्व-सुखो की इच्छा रखने वालो को बुधवार का व्रत करना चाहिए|
भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष को अष्टमी को कृष्ण प्रिया राधा जी का जन्म हुआ था| इसलिए यह दिन राधाष्टमी ...
प्रदोष का अर्थ है रात्रि का शुभ आरम्भ|इस व्रत के पूजन का विधान इसी समय होता है| इसलिए इसे प्रदोष ...
कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करवा चौथ का व्रत किया जाता है|यह स्त्रियों का मुख्य त्यौहार ...
यह व्रत पोश माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया को किया जाता है|
यह व्रत कार्तिक लगते ही अष्टमी को किया जाता है| जिस वार की दीपावली होती है अहोई आठें भी उसी वार की ...
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जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता |सदूगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता || मैया जय 
मैं तो आरती उतारूँ रे संतोषी माता कीजय जय संतोषी माता जय जय मां
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भव भय दारुणं |नव कंजलोचन, कंज - मुख, कर - कंज, पद कंजारुणं ||
आरती बालकृष्ण की कीजै |अपनों जनम सुफल करि लीजै |श्रीयशुदा को परम दुलारौ |बाबा की अखियन कौ तारो ||
आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की ||गले में बैजन्ती माला, बजावै मुरली मधुर बाला |
जय जय तुलसी  माता,सबकी सुखदाता वर माता |
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त्वमेव माता  च पिता त्वमेव |त्वमेव बन्धुश्च  सखा त्वमेव |त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव |त्वमेव सर्व ...
अच्युतानन्द गोविन्द नामोच्चारण भेषजात । 
ॐ नमो प्रीं पीताम्बराय नमः ||
ॐ ह्रीं केतव नमः ||
ॐ हिरण्य गर्भाय अवयक्त रुपिणे नमः ||
अनिध्यं कुरु माले त्वं गृह् णामि दक्षिणे करें ।जापकाले च सिद्धयर्थें प्रसीद मम सिद्धये ।।
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।। स्तुति ।। मात शैल्सुतास पत्नी ससुधाश्रंगार धरावली ।स्वर्गारोहण जैजयंती भक्तीं भागीरथी ...
|| दोहा || बंशी शोभित कर मधुर, नील जलद तन श्याम।अरुण अधर जनु बिम्ब फल, नयन कमल अभिराम॥१
|| दोहा || जय जय माता शीतला तुमही धरे जो ध्यान। होय बिमल शीतल हृदय विकसे बुद्धी बल ज्ञान ॥
|| चौपाई || नमो नमो दुर्गा सुख करनी |नमो नमो अम्बे दुखहरनी ||
|| दोहा || श्री गुरु चरन सरोज राज, निज मनु मुकुरु सुधारि |बरनऊँरघुवर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि ...
|| दोहा || ह्रीं श्रीं क्लीं मेधा प्रभा जीवन ज्योति प्रचण्ड॥शान्ति कान्ति जागृत प्रगति रचना ...
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नम्रता का पाठ

एक बार अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन नगर की स्थिति का जायजा लेने के लिए निकले। रास्ते में एक जगह भवन का निर्माण कार्य चल रहा था। वह कुछ देर के लिए वहीं रुक गए और वहां चल रहे कार्य को गौर से देखने लगे। कुछ देर में उन्होंने देखा कि कई मजदूर एक बड़ा-सा पत्थर उठा कर इमारत पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। किंतु पत्थर बहुत ही भारी था, इसलिए वह more...

व्यर्थ की लड़ाई

एक आदमी के पास बहुत जायदाद थी| उसके कारण रोज कोई-न-कोई झगड़ा होता रहता था| बेचारा वकीलों और अदालत के चक्कर के मारे परेशान था| उसकी स्त्री अक्सर बीमार रहती थी| वह दवाइयां खा-खाकर जीती थी और डॉक्टरों के मारे उसकी नाक में दम था| एक दिन पति-पत्नी में झगड़ा हो गया| पति ने कहा - "मैं लड़के को वकील बनाऊंगा, जिससे वह मुझे सहारा दे सके|" more...
 
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धर्म और दुकानदारी

एक दिन एक पण्डितजी कथा सुना रहे थे| बड़ी भीड़ इकट्ठी थी| मर्द, औरतें, बच्चे सब ध्यान से पण्डितजी की बातें सुन रहे थे| पण्डितजी ने कहा - "इस दुनिया में जितने प्राणी हैं, सबमें आत्मा है, सारे जीव एक-समान हैं| भीड़ में एक लड़का और उसका बाप बैठा था| पण्डितजी की बात लड़के को बहुत पसंद आई और उसने उसे गांठ बांध ली| अगले दिन लड़का दुकान पर गया| थोड़ी देर में एक more...
 
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समझदारी की बात

एक सेठ था| उसने एक नौकर रखा| रख तो लिया, पर उसे उसकी ईमानदारी पर विश्वास नहीं हुआ| उसने उसकी परीक्षा लेनी चाही| अगले दिन सेठ ने कमरे के फर्श पर एक रुपया डाल दिया| सफाई करते समय नौकर ने देखा| उसने रुपया उठाया और उसी समय सेठ के हवाले कर दिया| दूसरे दिन वह देखता है कि फर्श पर पांच रुपए का नोट पड़ा है| उसके मन में थोड़ा शक पैदा हुआ| more...

आध्यात्मिक जगत - World of Spiritual & Divine Thoughts.

नोट: इस वेबसाइट का उद्देश्य जन साधारण तक अपना संदेश पहुँचाना है| ताकि एक धर्म का व्यक्ति दूसरे धर्म के बारे में जानकारी ले सके| इस वेबसाइट को बनाने के लिए विभिन्न पत्रिकाओं, पुस्तकों व अखबारों से सामग्री एकत्रित की गई है| इसमें किसी भी प्रकार की आलोचना व कटु शब्दों का प्रयोग नहीं किया गया|
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