गुरु जी अपने पुराने मित्रों को मिलने के लिए कुछ सिख सेवको को साथ लेकर हरीके गाँव पहुँचे| गुरु जी की उपमा सुनकर बहुत से लोग श्रधा के साथ दर्शन करने आए| हरीके के चौधरी ने अपने आने की खबर पहले ही गुरु जी को भेज दी कि मैं दर्शन करने आ रहा हूँ| गाँव का सरदार होने के कारण उसमे अहम का भाव था|

श्री साईं बाबा जी

|| चौपाई ||

पहले साई के चरणों में, अपना शीश नमाऊं मैं।
कैसे शिरडी साई आए, सारा हाल सुनाऊं मैं॥

श्री साईं बाबा व्रत के फलस्वरूप निम्नलिखित लाभ व फल प्राप्त हो सकते है: पुत्र की प्राप्ति, कार्य सिद्धि, वर प्राप्ति, वधु प्राप्ति, खोया धन मिले, जमीन जायदात मिले, धन मिले, साईं दर्शन, मन की शान्ति, शत्रु शांत होना, व्यापार में वृद्धि, बांझ को भी बच्चे की प्राप्ति हो, इच्छित वास्तु की प्राप्ति, पति का खोया प्रेम मिले, परीक्षा में सफलता, यात्रा का योग, रोग निवारण, कार्य सिद्धि, सर्व मनोकामना पूर्ती, इत्यादि|

साईं बाबा ने अपने भक्तों के कल्याण के लिए अनेक शिक्षाएं अपने श्रीमुख से उच्चारित कीं, बाबा की इन सिक्षाओं में समस्त ग्रंथो का सार है| जो भी व्यक्ति बाबा की इन सिक्षाओं को अपनी जिन्दगी में उतार लेगा, वह इस भवसागर से पार उतर जाएगा|

श्री साईं बाबा जी की लीलाएं

बीमारीयों के लक्षण व उपचार

खाद्य पदार्थों के स्वास्थ्य लाभ

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1 [व]
तथॊक्तॊ वासुदेवेन नित्यमन्युर अमर्षणः
सदश्ववत समाधावद बभाषे तदनन्तरम

1 [वि]
ऊर्ध्वं पराणा हय उत्क्रामन्ति यूनः सथविर आयति
परत्युत्थानाभिवादाभ्यां पुनस तान पतिपद्यते

1 [न]
अथ परचलितः सथानाद आसनाच च परिच्युतः
कम्पितेनैव मनसा धर्षितः शॊकवह्निना

Dhritarashtra said, “How did Sikhandin the prince of the Panchalas,excited with wrath, rushed in battle against the grandsire, viz., Ganga’sson of righteous soul and regulated vows.

1 [कर्ण]
दुर्यॊधन तव परज्ञा न सम्यग इति मे मतिः
न हय उपायेन ते शक्याः पाण्डवाः कुरुनन्दन