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शिक्षाप्रद कथाएँ (1282)

माया क्या है? भ्रम| जो दिख रहा है, वह सत्य लगता है, यह भ्रम है| शरीर ही सबकुछ है, भ्रम है| नष्ट हो जाने वाली वस्तुएं शाश्वत हैं, भ्रम है| मकान-जायदाद, मेरी-तेरी, भ्रम है| रिश्ते-नाते सत्य हैं, भ्रम है… यही माया है|

प्राचीन समय की बात है| राजकुमार भोज अबोध बालक ही थे कि उनके पिता स्वर्गवासी हो गए| भोज के पिता ने शरीर छोड़ते हुए अपने छोटे भाई मुंज को पास बुलाकर कहा- “अभी यह राज्य तुम संभालो| जब भोज बड़ा और समझदार हो जाए तो उसे राजपाट सौंप देना|”

महाभारत की कहानी है| एक बार गुरु द्रोणाचार्य ने अपने कौरव-पांडव शिष्यों की परीक्षा लेनी चाही|

यह घटना आजादी के पूर्व की है| मुंशी प्रेमचन्द हिंदी के सर्वश्रेष्ठ कथाकार एवं उपन्यास-लेखक ने जीवन की शुरुआत अध्यापन कार्य से की थी, बाद में वे स्कूलों के इंस्पेक्टर बन गए थे| यह घटना उस समय की है, जब वह एक सामान्य स्कूल में एक सामान्य शिक्षक थे| एक बार इंस्पेक्टर विधालय के निरक्षण के लिए पधारे| प्रेमचन्द जी ने पूरी विनम्रता और कायदे से उन्हें स्कूल दिखलाया|

एक बार की बात है| वीतराग स्वामी सर्वदानन्द जी बिहार के छपरा स्थान पर पहुँचे| उन्होंने देखा कि एक मंदिर के पुजारी बड़े प्रेम से हवन करा रहा था|

एक दिन एक महात्मा मौर्य सम्राट चन्द्रगुप्त के प्रधानमंत्री आचार्य चाणक्य (या विष्णुगुप्त) के घर पधारे| भोजन की बेला थी| अतिथि से आचार्य ने निवेदन किया कि वह उनके साथ भोजन करें|

पिछले दिनों देश में बूढ़ी-प्रौढ़ों को पढ़ाने का आंदोलन काफी चला| एक गाँव में चल रहे प्रौढ़ शिक्षा केंद्र को देखने जब एक निरीक्षक दल पहुँचा, तब दरवाजे पर मुख्य निरीक्षक को 94 साल के वृद्ध सज्जन मिले|

यह घटना अंग्रेजी शासन काल की है| प्रसिद्ध काकेरी षड्यंत्र कांड के माध्यम से विदेशी अंग्रेजी शासन से जुझने वाले सुप्रसिद्ध क्रांतिकारी श्री रामप्रसाद बिस्मिल के जीवन-निर्माण में महर्षि दयानंद सरस्वती और आर्यसमाज का यजस्वी योगदान रहा है|

अपने समय के कुख्यात डाकू सुल्ताना को बड़ी मुश्किल से मुखबिरों के द्वारा पकड़ा गया| जंजीरों में बाँधकर उसे जेल में ले जाया गया| उस पर मुकदमा चला|

भारतीय राजनीति में लिबरल (उदार) के रुप में सुप्रसिद्ध श्रीनिवास शास्त्री उन दिनों मद्रास विश्वविद्यालय के उपकुलपति थे| वह न केवल नाम से उदार थे, व्यवहार में भी उनकी उदारता देखते ही बनती थी|

एक समय की बात है| प्रदीप खन्ना नाम के सज्जन दमे के मरीज़ थे| उन्हें अक्सर अपनी सांस रुकने पर कृतिम ऑक्सीजन–प्रणाली का सहारा लेना पड़ता था|

एक बार की बात है| गढ़वाल में वृक्षों की सहायता के लिए पर्वत पुत्रियों एवं हिमालय के पुत्रों ने वृक्षों से चिपककर उनकी रक्षा का व्यापक आंदोलन किया था|

एक सूफी नवाब थे| एक रोज एक भिखारी आया| इस फकीर ने देखा कि वह सूफी नवाब एक भव्य सुंदर तम्बू में मखमल की गद्दी पर बैठे हैं|

प्राचीन समय की बात है| एक साधु बहुत बूढ़े हो गए थे| उनके जीवन के आखिरी क्षण निकट आ पहुँचे| आखिरी क्षणों में उन्होंने अपने शिष्यों को अपने पास बुलाया| जब उनके पास सब आये, तब उन्होंने अपना पोपला मुहँ पूरा खोल दिया और शिष्यों से बोले- “देखो, मेरे मुँह में कितने दाँत बच गए हैं?”

छान्दोग्य उपनिषद की कहानी है| एक बार जबाला नामक महिला के पुत्र सत्यकाम ने माँ से पूछा- “माँ, मेरी इच्छा ब्रह्मचर्य धारण करने की है| गुरु के पास जाऊँगा तो वह मुझसे पूछेंगे कि तुम्हारा क्या गोत्र है?

बौद्ध वाड्मय जातक की एक कथा है| एक बार वाराणसी के राजा ब्रह्मदत्त अपनी न्यूनता और दोष ढूँढने के लिए उत्तर भारत के कई नगरों में गए| उन्हें उनके दोष कहने वाला कही कोई नहीं मिला|

महाराष्ट्र में एक बड़े संत हुए है- संत एकनाथ| वह एक तीर्थोटन करते हुए प्रयाग राज पहुँचे|

काफ़ी समय पहले की बात है| उन दिनों देश में नंद नाम के राजा का शासन था| उसकी दो पत्नियाँ थी, सुनंदा और मुरा|

एक विधवा बंगालिन थी| वह अपनी पुत्री का विवाह करना चाहती थी, परंतु उसके विधवा होने के कारण कोई भी भद्र समाज का पंडित उसकी पुत्री का विवाह करने के लिए तैयार नहीं होता था, क्योंकि उन पंडितों को विधवा की पुत्री का विवाह कराने के कारण समाज से बहिष्कृत होने का डर था|

एक समय की बात है| एक साधु महात्मा थे| उनकी सारे नगर में प्रतिष्ठा थी| एक गृहस्थ का सारा परिवार उस महात्मा का भक्त था|

प्लासी के युद्ध-क्षेत्र में एक ओर बंगाल-बिहार के सूबेदार नवाब सिराजुद्दौला की फौज खड़ी थी| उसके मुकाबले अंग्रेजों के सेनाध्यक्ष क्लाइव की सेना थी|

स्वामी दयानंद सरस्वती का जनम १२ फरवरी १८२४ मे मोरबी (मुंबई) के पास काथियावाद शेत्र. गुजरात मे हुआ था| उनके पिता जी का नाम करशन जी लाल जी तिवारी और माँ का नाम यशोदा बाई था| ब्राह्मण परिवार मे जन्मे मूलशंकर एक अमीर , समृद्ध अथवा प्रभावशाली व्यक्ति थे| इनका प्रारंभिक जीवन बहुत आराम से बीता परन्तु पंडित बनने के लिए वे संस्कृत , वेद , शास्त्रों एवं अन्य धार्मिक पुस्तकों के अध्यन मे लग गए| 

विश्वभर में 14 फ़रवरी को वेलेटाइन डे अलग-अलग तरह से और अलग-अलग विश्वास के साथ मनाया जाता है| पश्चिमी देशों में इस दिन को बहुत धूमधाम से मनाया जाता है| जहाँ पर इसे प्यार के इजहार का दिन भी माना जाता है| इस दिन का हर धड़कते हुए दिल को बहुत बेसब्री से इंतजार होता है| प्रेमी और प्रेमिकाओं के लिए इस दिन की बहुत एहमियत है| और इस दिन को अत्यन्त खुशी का प्रतीक माना जाता है| इस दिन की रौनक अपने ही शबाब पर होती है| प्यार का इजहार करने के लिए परवाने फूलों के गुलदस्ते और भी प्यार से संबंधित चीजें देकर अपने प्रिय को खुशी जाहिर करते हैं|

महाशिवरात्रि के परम –पवन पर्व पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएं| यह दिन बहुत धूमधाम से मनाया जाता है और यह माना जाता है कि इसी दिन शिवजी ने कालकूट नाम का विष पिया था  जो की समुन्द्रमंथन के दौरान अमृत से पहले समुन्दर से निकला गया था| जबकि कुछ विद्वानों का यह भी मत है की आज के ही दिन शिवजी और माता पार्वती विवाह सूत्र मे बंधे थे|

एक समय की बात है| एक जांजलि नामक तपस्वी ब्रहामण थे| अपने तपोबल से उन्हें संपूर्ण लोकों को देखने की शक्ति प्राप्त हो गई थी|

एक बार की बात है| काशी निवास करते हुए शंकराचार्य अपने विधार्थियों के साथ धार्मिक कार्यों को विधिपूर्वक पूरा करते हुए गंगा की ओर जा रहे थे कि रास्ते के सामने एक चाण्डाल चार कुत्तों के साथ आ गया|

भारतभूमि में एक शासक थे राजा रन्तिदेव| जन-कल्याण एवं आत्म-शुद्धि के लिए उन्होंने 48 दिन का व्रत किया|

अंगारों की तरह दिखते पलाश के फूल, आम के पेड़ों पर आये बौर, हरियाली से ढकी धरती और चारो और पीली सरसों बसंत ऋतु के शुभ आगमन की बधाई देते हैं वास्तव में बसंत पंचमी ऋतु परिवर्तन का ऐसा त्यौहार है, जो अपने साथ मद-मस्त परिवर्तन लेकर आती है|

एक शेर जिस गुफ़ा में रहता था उसी गुफ़ा में एक चूहे ने बिल बना रखा था| वह चूहा हमेशा शेर को परेशान करता रहता- वह कभी शेर के बाल कुतर देता, कभी पीठ पर नाचने-कूदने लग जाता- कभी-कभी तो वह शेर को काट भी लेता था| शेर उससे बहुत ही दुखी था|

यह एक पौराणिक कथा है। कुबेर तीनों लोकों में सबसे धनी थे। एक दिन उन्होंने सोचा कि हमारे पास इतनी संपत्ति है, लेकिन कम ही लोगों को इसकी जानकारी है। इसलिए उन्होंने अपनी संपत्ति का प्रदर्शन करने के लिए एक भव्य भोज का आयोजन करने की बात सोची। उस में तीनों लोकों के सभी देवताओं को आमंत्रित किया गया।

एक गाँव में चार पक्के मित्र रहते थे| उनमें से एक दर्जी था, एक सुनार, एक ब्राह्मण और एक बढ़ई था| "विकट समस्या" सुनने के लिए Play Button क्लिक करें | Listen Audio Your browser does not support the audio element. एक बार चारों ने निर्णय लिया कि विदेश में जाकर कुछ धन कमाया जाएँ| वे चारों ही साथ-साथ रवाना हो गए| चलते-चलते जब दिन ढल गया तो वे एक गाँव के पास किसी मंदिर में ठहर गए| रात

एक बार बलराम सहित ग्वाल-बाल खेलते-खेलते यशोदा के पास पहुँचे और यशोदाजी से कहा- माँ! कृष्ण ने तो आज मिट्टी खाई है। यशोदा ने कृष्ण के हाथों को पकड़ लिया और धमकाने लगी कि तुमने मिट्टी क्यों खाई है।

समुंद्र के किनारे एक टिटहरी दंपति रहता था| समय बीतने पर जब टिटहरी ने गर्भधारण किया तो उसने अपने पति से कहा, ‘स्वामी! आप तो जानते ही है कि यहाँ समय-समय पर ज्वार-भाटा आता रहता है| इससे मुझे अपने बच्चों के बह जाने की आशंका है| मेरा आपसे अनुरोध है कि आप किसी अन्य सुरक्षित स्थान पर चलिए|’

हिम्मतनगर में धर्मबुद्धि और कुबुद्धि नामक दो निर्धन मित्र रहते थे| दोनों ने दूसरे देश में जाकर धन कमाने की योजना बनाई और अपने साथ काफ़ी सामान लेकर विभिन्न क्षेत्रों में खूब भ्रमण किया और साथ लाए सामान को मुंहमाँगे दामों पर बेचकर ढेर सारा धन कमा लिया| दोनों मित्र अर्जित धन के साथ प्रसन्न मन से घर की ओर लौटने लगे|

एक समय की घटना है| श्री रामकृष्ण परमहंस रोज बहुत लगन से अपना लोटा राख या मिट्टी से मांजकर खूब चमकाते थे|

एक दिन साँवले सलोने बालश्रीकृष्ण रत्नों से जड़ित पालने पर शयन कर रहे थे। उनके मुख पर लोगों के मन को मोहने वाली मंद हास्य की छटा स्पष्ट झलक रही थी। कुटिल दृष्टि न लग जाए इसलिए उनके ललाट पर काजल का चिह्न शोभायमान हो रहा था। कमल के सदृश उनके दोनों सुंदर नेत्रों में काजल विद्यमान था।

एक बार की बात है| उज्जैन से झालरापाटन शहर में एक बारात आई थी| पूरे गाजे-बाजे के साथ बारात श्री लालचन्द मोमियां के यहाँ जा रही थी|

भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रात के बारह बजे मथुरा के राजा कंस की जेल मे वासुदेव जी की पत्नि देवी देवकी के गर्भ से सोलह कलाओ से युक्त भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था ।

एक जंगल था, जिसमे सभी जानवर भाईचारे तथा प्रेम से रहते थे| जंगलराज जैसी वहाँ कोई बात नही थी| शेर और बकरी एक ही घाट पर पानी पीते थे|

प्रत्येक प्राणी को मन-वचन-कर्म से निर्भय होना चाहिए| पता खड़का और बंदा सरका का जीवन-दर्शन रखने वाला प्राणी और जातियाँ जीवन-संघर्ष में यशस्वी नहीं हो सकती|

ऐसा माना जाता है कि प्रभु श्रीराम की रावण के ऊपर विजय प्राप्त करने के पश्चात ईश्वर की आराधना के लिये हनुमान हिमालय पर चले गये थे।

जंगल का राजा शेर, बूढ़ा और कमजोर हो गया था| अब वह पहले की तरह जानवरों का शिकार नहीं कर सकता था| कभी-कभी तो उसे दिन-दिनभर भूखा रहना पड़ता| दिनों-दिन वह अधिक कमजोर और बूढ़ा होता जा रहा था|

शामगढ़ नगर का निवासी सोमिलक जुलाहा बहुत ही कुशल शिल्पी था| वह राजाओं के पहनने योग्य अनेक सुंदर, चित्र-विचित्र और बहुमूल्य रेशमी वस्त्र बुना करता था| लेकिन फिर भी उसका हाथ तंग ही रहता|

बार की घटना है| भारत में अंग्रेजी राज्य के यशस्वी लेखक एवं राष्ट्रीय नेता श्री सुंदरलाल जी एक बार पूना गए| यह श्रीमद्भगवद्गीता की कर्मयोग की व्याख्या करने वाले भारतीय चिंतक एवं राष्ट्र नेता लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के व्यक्तिगत जीवन की एक झलक लेना चाहते थे|

रामायण के सुन्दर-काण्ड में हनुमानजी के साहस और देवाधीन कर्म का वर्णन किया गया है। हनुमानजी की भेंट रामजी से उनके वनवास के समय तब हुई जब रामजी अपने भ्राता लछ्मन के साथ अपनी पत्नी सीता की खोज कर रहे थे।

पहाड़ी की तलहटी में बना सुंदरपुर नामक एक गाँव था| सुंदरपुर में वैसे तो सुख-शांति का वास था लेकिन वहाँ के सरपंच की पत्नी कुमति बड़े ही दुष्ट स्वभाव की स्त्री थी| उसके कुटिल स्वभाव से सभी घरवाले परेशान थे| अपनी सीधी-सादी बहू सुकन्या को तो वह कुछ ज्यादा ही परेशान करती थी|

एक बार की बात है| एक राजा थे| उनका नाम जानश्रुति था| उनकी तीन पीढ़ियाँ जीवित थी| वह विख्यात ज्ञानी थे|

हनुमान जी के धर्म पिता वायु थे, इसी कारण उन्हे पवन पुत्र के नाम से भी जाना जाता है। बचपन से ही दिव्य होने के साथ साथ उनके अन्दर असीमित शक्तियों का भण्डार था।

पंडित रामशंकर यजमानी करके दूसरे गाँव से अपने घर कि ओर लौट रहे थे| वे बहुत प्रसन्न थे क्योंकि दक्षिणा में उन्हें बकरी मिली थी| पंडित रामशंकर की ख्याति आसपास के गाँवों में फैली हुई थी|

एक बार की बात है| काशी (वाराणसी) की घटना है| एक बार स्वामी विवेकानंद काशी की एक तंग गली से गुजर रहे थे कि बंदरों के एक समूह ने उनका सामान छीन लिया| बंदर गुर्रायें तो स्वामी जी घबरा गए| वह कुछ चिल्लाकर पीछे हटने लगे कि बंदर उन पर टूट पड़े, उनके कपड़े फाड़ दिए| स्वामी जी भागने लगे तो बंदर किलकारियाँ मारते उनका पीछा करने लगे|

जन्म:
हनुमान जी का जन्म त्रेता युग मे अंजना(एक नारी वानर) के पुत्र के रूप मे हुआ था। अंजना असल मे पुन्जिकस्थला नाम की एक अप्सरा थीं, मगर एक शाप के कारण उन्हें नारी वानर के रूप मे धरती पे जन्म लेना पडा। उस शाप का प्रभाव शिव के अन्श को जन्म देने के बाद ही समाप्त होना था।

रामदीन धोबी के पास एक गधा था| वह दिनभर उस गधे से जी-तोड़ काम लेता और शाम को उसे खुला छोड़ देता, ताकि वह जंगल तथा खेतों में हरी घास चरकर अपना पेट भर सके|

महाभारत का प्रसंग है| जुए में हारने के बाद पाँच पांडव बारह वर्ष के वनवास के दिन वनों एवं पर्वतों में व्यतीत कर रहे थे| एक समय वे द्वैतवन के समीप ब्रहामणों के साथ निवास कर रहे थे कि शकुनि और कर्ण ने दुर्योधन को सलाह दी की हमारा विचार है कि तुम खूब ठाट-बाट से द्वैतवन को चलो और अपने वैभव और ऐश्वर्य से पांडवों को चमत्कृत कर दो|

हनुमान …….आपार शक्ति, विवेक एवं शीलता तो उनका अक्स्मात परिचय हैं । लेकिन आज प्रभु के वो स्वरुप की अनुभुति हुई की मन मुग्ध हो गया ।

किसी नगर में एक धोबी रहता था| कपड़े धोने में उसका कोई सानी नही था| लेकिन वह अपने गधे के साथ बहुत दुर्व्यवहार करता था| दिनभर उससे हाड़-तोड़ काम कराने के बाद भी खाने को कुछ नही देता| बेचारा गधा यहाँ-वहाँ मुहँ मारकर जो मिलता उसी से अपना पेट भर लेता| यही कारण था कि वह बहुत कमज़ोर हो गया था|

यह घटना कपिलवस्तु नगर की है| वहाँ के राजा का नाम था शुद्धोदन| एक समय की बात है| राजा के पुत्र सिद्धार्थ अपने चचेरे भाई देवदत के साथ बगीचे में टहल रहे थे|

एक बार की बात है| जापान में भारत के प्रसिद्ध तत्वचिंतक स्वामी रामतीर्थ रेल-यात्रा कर रहे थे| वह रेलवे स्टेशन पर उतरे, प्लेटफार्म पर चक्कर लगा आए| पर उनकी मनचाही चीज नहीं मिली|

हिमाचल प्रदेश की सुरमई वादियों में यूं तो कदम-कदम पर देवस्थल मौजूद हैं, लेकिन इनमें से कुछ एक ऐसे भी हैं जो अपने में अनूठी गाथाएँ और रहस्य समेटे हुए हैं| ऐसा ही एक मंदिर है निरमंड का परशुराम मंदिर|

एक बार शेर ने उत्सव की घोसणा की| सभी जानवर आये| कुछ जानवर झुण्ड में तथा कुछ जोडों में आये थे| आनन्द का वातावरण बन गया| उत्सव आरम्भ हुआ| गायन हुआ, नृत्य चला, फिर बन्दर को नाचने के लिए कहा गया| बन्दर आनंदमग्न था| उसने मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया| जानवरों ने जमकर उसकी प्रशंसा की| शेर ने उसकी पीठ थपथपाई| बन्दर प्रसिद्ध हो गया|

यह घटना मुगलकाल की है| रहीम खानखाना एक अच्छे योद्धा, हिंदी-प्रेमी और सबसे अधिक वह एक दानी व्यक्ति थे| उनका नियम था कि वह हर दिन गरीबों या याजकों को दान देते थे| उनका दूसरा नियम था की दान देते हुए वह कभी अपनी निगाह लेने वाले पर नहीं डालते थे| वह नीचे नजर कर रूपये-पैसों के ढेर से मुट्ठी भरकर गरीबों को दान करते थे|

उज्जयिनी में राजा चंद्रसेन का राज था। वह भगवान शिव का परम भक्त था। शिवगणों में मुख्य मणिभद्र नामक गण उसका मित्र था। एक बार मणिभद्र ने राजा चंद्रसेन को एक अत्यंत तेजोमय ‘चिंतामणि’ प्रदान की। चंद्रसेन ने इसे गले में धारण किया तो उसका प्रभामंडल तो जगमगा ही उठा, साथ ही दूरस्थ देशों में उसकी यश-कीर्ति बढ़ने लगी। उस ‘मणि’ को प्राप्त करने के लिए दूसरे राजाओं ने प्रयास आरंभ कर दिए। कुछ ने प्रत्यक्षतः माँग की, कुछ ने विनती की।

एक समय की बात है, तीन बैल गहरे मित्र थे| वे एक साथ रहते, चरते और खेलते थे| उसी क्षेत्र में एक शेर भी था, जो बैलों को मारकर खा जाना चाहता था| कई बार वह आक्रमण कर चुका थ, मगर हर बार वे तीनों सिर बाहर करके त्रिकोण-सा घेरा बना लेते थे थे तथा अपने तेज और मजबूत सींगो से अपनी सुरक्षा करते थे| बैल शेर को भगा देते थे|

एक समय की बात है| महात्मा बुद्ध का एक शिष्य उनके पास गया| महात्मा के चरणों में झुककर प्रणाम कर निवेदन किया- “भगवान् मुझे देश के ऐसे अंचल में जाने की अनुमति दें जहाँ अत्यंत क्रूर और भयंकर जन-जातियाँ रहती हों|”

भगवान विष्णु द्वारा अपने भाई हिरण्याक्ष का वध करनेकी वजह से हिरण्यकशिपु विष्णु विरोधी था और अपने विष्णुभक्त पुत्र प्रह्लाद को मरवाने के लिए भी उसने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। फिर भगवान विष्णु ने नृसिंह अवतार धारण कर हिरण्यकशिपु का वध किया था। खंभे से नृसिंह भगवान का प्रकट होना ईश्वर की शाश्वत, सर्वव्यापी उपस्थिति का ही प्रमाण है।

पक्षी और जानवर भिन्न जाति और स्वभाव के प्राणी हैं| कुछ पक्षी कुछ जानवरों को खा जाते हैं और कुछ जानवर पक्षियों का भक्षण करते है| यह भी आश्चर्य ही है कि अधिकांश एक-सा भोजन करते हैं| इसलिए कुछ मित्र हैं और कुछ शत्रु| उनमें लड़ाई चलती रहती है, किन्तु एक बार उनमें युद्ध छिड़ गया| पक्षियों में सर्वाधिक नुकसान बत्तखों का हुआ और जानवरों में सबसे अधिक हानि खरहे और चूहों को हुई|

प्राचीन समय की बात है| महाविद्वान कवि कालिदास को अपनी विद्वता पर अहंकार हो गया| उन्होंने बहुत से अवसरों पर उसका प्रदर्शन भी किया|

पुलत्स्य ऋषि के उत्कृष्ट कुल में जन्म लेने के बावजूद रावण का पराभव और अधोगति के अनेक कारणों में मुख्य रूप से दैविक एवं मायिक कारणों का उल्लेख किया जाता है। दैविक एवं प्रारब्ध से संबंधित कारणों में उन शापों की चर्चा की जाती है जिनकी वजह से उन्हें राक्षस योनि में पैदा होना पड़ा। मायिक स्तर पर शक्तियों के दुरुपयोग ने उनके तपस्या से अर्जित ज्ञान को नष्ट कर दिया था।

एक व्यापारी के पास एक गधा था| उसे अच्छा भोजन मिलाता था| वह मोटा और शक्तिशाली था| व्यापारी के पापस एक कुत्ता भी था| वह कुत्ते से खेलता था| कुत्ते उसकी गोद में बैठ जाता था, और पांव चाटता था| बदले में उसे रोटी, हड्डी और व्यापारी की प्यार भरी थपकी मिलाती थी|

संस्कृत भाषा का एक प्रसिद्ध ग्रंथ है-: ‘मृच्छ कटिकम्-| इस ग्रंथ में चारुदत ब्राहमण के उत्तम शील की चर्चा की है|

अगस्त्य मुनि ने आगे कहा, “एक दिन हिमालय प्रदेश में भ्रमण करते हुये रावण ने अमित तेजस्वी ब्रह्मर्षि कुशध्वज की कन्या वेदवती को तपस्या करते देखा। उस देखकर वह मुग्ध हो गया और उसके पास आकर उसका परिचय तथा अविवाहित रहने का कारण पूछा।

कछुए का एक राजा था| उसे राजा बृहस्पति के विवाह का निमंत्रण मिला| वह आलसी था, फलतः घर पर ही रह गया| विवाह के उत्सव में सम्मिलित नहीं हुआ| बृहस्पति नाराज हो गए| उन्होंने कछुए की पीठ पर अपना घर ढोने का शाप दे दिया|

एक बार की घटना है| फ्रांस में पहले राजतंत्र शासन था| एक समय वहाँ पर हेनरी चतुर्थ का शासन था| एक बार वह अपने राज्य के अधिकारियों के साथ किसी कार्यक्रम में जा रहे थे| रास्ते में एक भिक्षुक खड़ा था|

अगस्त्य मुनि ने कहना जारी रखा, “पिता की आज्ञा पाकर कैकसी विश्रवा के पास गई। उस समय भयंकर आँधी चल रही थी। आकाश में मेघ गरज रहे थे। कैकसी का अभिप्राय जानकर विश्रवा ने कहा कि भद्रे! तुम इस कुबेला में आई हो।

बहुत दिन पहले एक झील के किनारे एक बहुत बड़ा नगर था| नगर जितना बड़ा था उतना ही सुन्दर भी था| वहां अनेक मंदिर और शानदार इमारते थी|

जब श्रीराम अयोध्या में राज्य करने लगे तब एक दिन समस्त ऋषि-मुनि श्रीरघुनाथजी का अभिनन्दन करने के लिये अयोध्यापुरी में आये। श्रीरामचन्द्रजी ने उन सबका यथोचित सत्कार किया।

एक भूखा शेर शिकार की खोज में जंगल में घूम रहा था|

एक बार एक सैनिक घोड़े पर सवार होकर शिकार के लिए जंगल जा रहा था| रास्ते में डाकुओं की एक बस्ती पड़ी| एक घर के दरवाजे के बाहर लटके पिंजरे में बैठा एक तोता चिल्ला उठा- “भागो, पकड़ लो, इसे मार डालो, इसका घोड़ा और माल-असबाब सब छीन लो|

प्राचीन काल में एक राजा थे। उनके कोई संतान नहीं थी। अत्याधिक पूजा-अर्चना व मन्नतों के पश्चात दैव योग से उन्हें पुत्र प्राप्ति हुई।

एक तालाब में तीन मछलियां रहती थीं| उनकी आपस में दोस्ती तो थी लेकिन तीनों का स्वभाव अलग-अलग था|

एक समय की बात है| अचानक ओलों की वर्षा से सारी फसल नष्ट हो गई| कुरू प्रदेश में एक गाँव में हाथीवान रहते थे| इसी गाँव में एक निर्धन ऋषि उशस्ति चाकृायण अपनी पत्नी के साथ रहने लगे| गाँव में कहीं अनाज का दाना नहीं मिला|

उज्जयिनी में राजा चंद्रसेन का राज था। वह भगवान शिव का परम भक्त था। शिवगणों में मुख्य मणिभद्र नामक गण उसका मित्र था। एक बार मणिभद्र ने राजा चंद्रसेन को एक अत्यंत तेजोमय ‘चिंतामणि’ प्रदान की। चंद्रसेन ने इसे गले में धारण किया तो उसका प्रभामंडल तो जगमगा ही उठा, साथ ही दूरस्थ देशों में उसकी यश-कीर्ति बढ़ने लगी। उस ‘मणि’ को प्राप्त करने के लिए दूसरे राजाओं ने प्रयास आरंभ कर दिए। कुछ ने प्रत्यक्षतः माँग की, कुछ ने विनती की।

एक था सिंह, जो जंगल का राजा था| वह खूब लम्बा- चौड़ा और बलवान था| वह बहुत रोबीला था और भयानक भी|

एक बार की बात है| बंगाल के सुप्रसिद्ध विद्वान पंडित ईश्वरचन्द्र विद्यासागर गर्मी की छुट्टियों में अपने गाँव आए| वह रेल की तीसरी श्रेणी के डिब्बे में बैठे थे| गाँव के स्टेशन पर पहुँचकर वह रेल से उतरे| उनके ही डिब्बे से कॉलेज का एक छात्र भी उतरा| स्टेशन के बाहर पहुँचकर वह कॉलेज का विद्यार्थी अपन सूटकेस जमीन पर रखकर चिल्लाने लगा-

पाँचों पाण्डव – युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव – पितामह भीष्म तथा विदुर की छत्रछाया में बड़े होने लगे। उन पाँचों में भीम सर्वाधिक शक्तिशाली थे। वे दस-बीस बालकों को सहज में ही गिरा देते थे। दुर्योधन वैसे तो पाँचों पाण्डवों ईर्ष्या करता था किन्तु भीम के इस बल को देख कर उससे बहुत अधिक जलता था। वह भीमसेन को किसी प्रकार मार डालने का उपाय सोचने लगा। इसके लिये उसने एक दिन युधिष्ठिर के समक्ष गंगा तट पर स्नान, भोजन तथा क्रीड़ा करने का प्रस्ताव रखा जिसे युधिष्ठिर ने सहर्ष स्वीकार कर लिया।

यह घटना प्राचीन समय की है| देवताओं और दानवों का युद्ध चलता रहता था| एक बार की लड़ाई में देवों ने दानवों को हरा दिया| इस पर देवता घमंड में भर गए| उन्होंने सोचा कि यह विजय हमारी ही है|

बहुत दिनों की बात है| हाथियों का एक बड़ा झुण्ड एक जंगल में रहता था| एक बड़े दांतों वाला विशालकाय हाथी उस दल का राजा था| यह गजराज अपने दल की देखभाल बड़े प्यार और ध्यान से करता था|

एक बार की घटना है| स्वामी रामतीर्थ ने 1903 से 1906 तक अपने चमत्कारी व्यक्तित्व से भारत, जापान और अमेरिका को चमत्कृत किया था|

बहुत पुरानी बात है| एक खटमल था| उसका बड़ा भारी कुटुम्ब था| ढेरों बच्चे थे| फिर उन सबके भी बहुत सारे बाल-बच्चे थे|

गौतम ऋषि के पुत्र का नाम शरद्वान था। उनका जन्म बाणों के साथ हुआ था। उन्हें वेदाभ्यास में जरा भी रुचि नहीं थी और धनुर्विद्या से उन्हें अत्यधिक लगाव था। वे धनुर्विद्या में इतने निपुण हो गये कि देवराज इन्द्र उनसे भयभीत रहने लगे।

एक बार की बात है एक विद्यालय में एक भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया| प्रतियोगिता का विषय था- “हम प्राणियों की सेवा कैसे कर सकते हैं?” विद्यालय में प्रतियोगिता शुरु हो गई|

एक बार की बात है तीन नवयुवक एक शहर में रहते थे| तीनों बड़े गहरे मित्र थे| उनमें से एक राजकुमार था, राजा का सबसे छोटा बेटा| दूसरा राजा के मन्त्री का पुत्र था और तीसरा था एक धनी व्यापारी का लड़का|

पंडित पुरचुरे शास्त्री महाराष्ट्र प्रदेश के शास्त्रों के बड़े पंडित थे, परंतु वह महारोग कोढ़ से पीड़ित हो गए थे, फलतः अपनी कुरुपती के बावजूद, परिवार, समाज, जनसमाज से लगभग उपेक्षित हो गए थे|

सुरंग के रास्ते लाक्षागृह से निकल कर पाण्डव अपनी माता के साथ वन के अन्दर चले गये। कई कोस चलने के कारण भीमसेन को छोड़ कर शेष लोग थकान से बेहाल हो गये और एक वट वृक्ष के नीचे लेट गये। माता कुन्ती प्यास से व्याकुल थीं इसलिये भीमसेन किसी जलाशय या सरोवर की खोज में चले गये। एक जलाशय दृष्टिगत होने पर उन्होंने पहले स्वयं जल पिया और माता तथा भाइयों को जल पिलाने के लिये लौट कर उनके पास आये। वे सभी थकान के कारण गहरी निद्रा में निमग्न हो चुके थे अतः भीम वहाँ पर पहरा देने लगे।

यूनान के विवरण में लिखा है कि सिकंदर के शासन के विरुद्ध भारत का बुद्धिजीवी वर्ग अपना उग्र रोष हर दृष्टि से प्रकट करने के लिए तत्पर था| सिकंदर के विरुद्ध एक भारतीय राजा को भड़काने वाले ब्राह्मण से यवनराज सिकंदर ने पूछा- “तुम क्यों इस राजा को मेरे विरुद्ध भड़काते हो?”

एक घने जंगल में एक बहुत ऊंचा पेड़ था| उसकी शाखायें छतरी की तरह फैली हुई थीं और बहुत घनी थीं|

जीवन में उन्नति के लिए जरुरी है कि प्रत्येक आदमी प्रतिदिन अपने जीवन का आत्म-निरिक्षण करे| वह कम-से-कम सोने से पहले अपने दिन-भर के कामों का लेखा-जोखा करे| वह देखे कि दिन-भर में मैंने कौन-सी भूलें की?

एक ब्राह्मण को एक दिन दान में एक बकरी मिली| वह बकरी को कंधे पर रखकर घर की ओर चल पड़ा| रास्ते में तीन धूर्तो ने उस ब्राह्मण को बकरी ले जाते देखा तो उनके मूंह में पानी भर आया| उन्हें भूख लग रही थी|

एक बार की बात है, एक धनी पिता ने अपने नालायक बेटे से कहा- “आज कुछ अपनी मेहनत से कमाकर लाओ, नहीं तो शाम को खाना नहीं मिलेगा|”

एक बार एक सियार भोजन की तलाश में भटक रहा था| आज का दिन उसके लिए बहुत बुरा साबित हुआ था, क्यों की उसे खाने को कुछ भी नहीं मिला था|