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Homeसम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता

सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता

ॐ तत्सत् व्याख्या (अध्याय 17 शलोक 23 से 28)

अर्जुन का दुर्बल ह्रदय (सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय 1 शलोक 28 से 47)

अर्जुन की प्रार्थना (अध्याय 11 शलोक 1 से 4)

अर्जुन को योग प्रेरणा (अध्याय 11 शलोक 32 से 34)

अर्जुन द्वारा याचना (अध्याय 11 शलोक 35 से 46)

अश्वत्थ वृक्ष की व्याख्या (अध्याय 15 शलोक 1 से 6)

आत्मोत्थान प्रेरणा (सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय 6 शलोक 5 से 10)

आलोचना व प्रशंसा (सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय 7 शलोक 24 से 30)

आसुरी व दैवी स्वभाव (सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय 9 शलोक 11 से 15)

आसुरी सम्पदा के चिहन् (अध्याय 16 शलोक 6 से 20)

कर्तव्य व कर्म का महत्व (सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय 3 शलोक 1 से 8)

कर्म की महिमा (सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय 5 शलोक 1 से 12)

कर्म के पांच हेतु (अध्याय 18 शलोक 13 से 18)

क्षत्रिय का धर्म युद्ध (सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय 2 शलोक 31 से 38)

गुण अनुसार भेद वर्णन (अध्याय 17 शलोक 7 से 22)

जीवात्मा का वर्णन (अध्याय 15 शलोक 7 से 11)

ज्ञान में निष्ठा (अध्याय 18 शलोक 49 से 55)

ज्ञान वर्णन (सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय 9 शलोक 1 से 6)

ज्ञान सहित क्षेत्र (अध्याय 13 शलोक 1 से 18)

ज्ञानयोग का वर्णन (सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय 2 शलोक 11 से 30)

ज्ञानयोग का विस्तार (सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय 5 शलोक 13 से 26)

ज्ञानी की महिमा (सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय 4 शलोक 33 से 42)

ज्ञानी व अज्ञानी के लक्षण (सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय 3 शलोक 25 से 36)

तीन गुणों का विस्तार (अध्याय 14 शलोक 5 से 8)

दर्शन की दुर्लभता (अध्याय 11 शलोक 51 से 55)

देवताओं की पूजा (सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय 7 शलोक 20 से 23)

दैवी और आसुरी सम्पद् (अध्याय 16 शलोक 1 से 5)

ध्यानयोग का वर्णन (सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय 5 शलोक 27 से 29)

ध्यानयोग वर्णन (सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय 6 शलोक 11 से 32)

निष्काम कर्म वर्णन (सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय 6 शलोक 1 से 4)

निष्काम कर्मयोग (अध्याय 18 शलोक 56 से 66)

निष्काम कर्मयोग (सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय 2 शलोक 39 से 53)

परमेश्वर के रूप का वर्णन (अध्याय 15 शलोक 12 से 15)

पुरषोत्तम का विषय (अध्याय 15 शलोक 16 से 20)

पूजा के फल (सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय 9 शलोक 20 से 25)

प्रकृति व पुरुष वर्णन (अध्याय 13 शलोक 19 से 34)

प्रज्ञ लक्षण महिमा (सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय 2 शलोक 54 से 72)

भक्ति की श्रेष्ठता (अध्याय 12 शलोक 1 से 12)

भक्तियोग की व्याख्या (सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय 10 शलोक 8 से 11)

भक्तियोग वर्णन (सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय 8 शलोक 8 से 22)

भक्तों की महिमा (सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय 7 शलोक 13 से 19)

भक्तों के लक्षण (अध्याय 12 शलोक 13 से 20)

भगवत्प्राप्ति की विधि (अध्याय 14 शलोक 9 से 27)

भगवान का दर्शन देना (अध्याय 11 शलोक 47 से 50)

भगवान की महिमा (सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय 9 शलोक 16 से 19)

भागवत् महिमा का वर्णन (सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय 10 शलोक 12 से 18)

भागवद् महिमा (सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय 4 शलोक 1 से 18)

मनोसंयम विधि (सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय 6 शलोक 33 से 36)

यज्ञ विवरण (सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय 4 शलोक 24 से 32)

यज्ञादि कर्म अनिवार्य (सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय 3 शलोक 9 से 24)

युद्ध कौशल वर्णन (सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय 1 शलोक 1 से 19)

योगभ्रष्ट की गति (सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय 6 शलोक 37 से 47)

योगी का आचरण (सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय 4 शलोक 19 से 23)

योद्धाओं का अवलोकन (सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय 1 शलोक 20 से 27)

विभूति व योगशक्ति (सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय 10 शलोक 1 से 7)

विभूतियां तथा योगशक्ति (सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय 10 शलोक 19 से 42)

विश्वरूप का कथन (अध्याय 11 शलोक 5 से 8)

विश्वरूप का दर्शन (अध्याय 11 शलोक 14 से 31)

विश्वरूप का वर्णन (अध्याय 11 शलोक 9 से 13)

विषयक प्रश्नोत्तर (सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय 8 शलोक 1 से 7)

शास्त्रोक्त आचरण प्रेरणा (अध्याय 16 शलोक 21 से 24)

शुक्ल व पक्ष वर्णन (सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय 8 शलोक 23 से 28)

श्री कृष्णार्जुन वार्ताला (सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय 2 शलोक 1 से 10)

श्री गीता महात्म्य (अध्याय 18 शलोक 67 से 78)

सगुण ब्रह्म का ज्ञान (सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय 7 शलोक 1 से 12)

संसार उत्पत्ति वर्णन (सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय 9 शलोक 7 से 10)

संसार की उत्पत्ति (अध्याय 14 शलोक 1 से 4)

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