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अतिथि पोस्ट (71)

डा. (श्रीमती) भारती गांधी का बालकों की शिक्षा, अध्यापिकाओं का प्रशिक्षण, महिलाओं का उत्थान और समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने के प्रति समर्पण एवं संघर्ष सर्वविदित है।

लखनऊ, 27 मार्च। सिटी मोन्टेसरी स्कूल, आर.डी.एस.ओ. कैम्पस की कक्षा-9 की प्रतिभाशाली छात्रा श्रेया सोलंकी ने हीरो मोटोकार्प प्रा. लि. के तत्वावधान में आयोजित पेंटिंग एवं क्विज प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार अर्जित कर विद्यालय का गौरव बढ़ाया है।

लखनऊ, 25 मार्च। सिटी मोन्टेसरी स्कूल, अलीगंज (प्रथम कैम्पस) का कक्षा-11 का छात्र विनायक पटेल अमेरिका में आयोजित ग्लोबल यंग लीडर्स कान्फ्रेन्स (जी.वाई.एल.सी.) में ‘ग्लोबल स्काॅलर’ के रूप में अपने विद्यालय एवं देश का प्रतिनिधित्व करेगा।

लखनऊ, 25 मार्च। सिटी मोन्टेसरी स्कूल, स्टेशन रोड कैम्पस द्वारा ‘डिवाइन एजुकेशन कान्फ्रेन्स’ का भव्य आयोजन सी.एम.एस. कानपुर रोड आॅडिटोरियम में उल्लासपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ।

लखनऊ, 22 मार्च। सिटी मोन्टेसरी स्कूल के कम्युनिटी रेडियो एवं मदर सेवा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में रेडियो कार्यक्रम ‘बचपन एक्सप्रेस’ का प्रसारण किया जा रहा है।

लखनऊ, 17 मार्च। सिटी मोन्टेसरी स्कूल, गोमती नगर ऑडिटोरियम में आयोजित विश्व एकता सत्संग में बोलते हुए बहाई धर्मानुयायी, प्रख्यात शिक्षाविद् सी.एम.एस. संस्थापिकानिदेशिका डा. (श्रीमती) भारती गाँधी ने कहा कि विश्व सरकार के गठन से ही विश्व मानवता का कल्याण सुनिश्चित किया जा सकता है।

लखनऊ, 15 मार्च। सिटी मोन्टेसरी स्कूल, अलीगंज (प्रथम कैम्पस) द्वारा ‘डिवाइन एजुकेशन कान्फ्रेन्स’ का भव्य आयोजन आज सी.एम.एस. गोमती नगर (द्वितीय कैम्पस) ऑडिटोरियम में किया गया।

लखनऊ, 11 मार्च। सिटी मोन्टेसरी स्कूल के तत्वावधान में विश्व का सबसे बड़ा अन्तर्राष्ट्रीय बाल फिल्म महोत्सव (आई.सी.एफ.एफ.-2019) आगामी 4 से 9 अप्रैल तक सी.एम.एस. कानपुर रोड ऑडिटोरियम में आयोजित किया जा रहा है।

लखनऊ, 8 मार्च। सिटी मोन्टेसरी स्कूल, गोमती नगर (द्वितीय कैम्पस) एवं राजेन्द्र नगर (प्रथम कैम्पस) द्वारा ‘डिवाइन एजुकेशन कान्फ्रेन्स’ का भव्य आयोजन आज सम्पन्न हुआ।

लखनऊ, 24 फरवरी। सिटी मोन्टेसरी स्कूल, महानगर कैम्पस द्वाराएनुअल मदर्स डे एवं डिवाइन एजुकेशन कान्फ्रेन्सका भव्य आयोजन आज सी.एम.एस. गोमती नगर (द्वितीय कैम्पस) ऑडिटोरियम में किया गया।

लखनऊ, 24 फरवरी। सिटी मोन्टेसरी स्कूल, कम्युनिटी रेडियो के तत्वावधान में रेडियो कार्यक्रम सीरीज़बचपन एक्सप्रेसकी शुरूआत बड़े धूमधाम से सी.एम.एस. गोमती नगर कैम्पस स्थित रेडियो स्टूडियो में हुई।

लखनऊ, 24 फरवरी। सिटी मोन्टेसरी स्कूल, गोमती नगर ऑडिटोरियम में आयोजित विश्व एकता सत्संग में बोलते हुए बहाई धर्मानुयायी, प्रख्यात शिक्षाविद् सी.एम.एस. संस्थापिकानिदेशिका डा. (श्रीमती) भारती गाँधी ने कहा कि पारिवारिक एकता से ही विश्व एकता की राहें खुलेंगी, इसलिए बच्चों को प्रारम्भ से ही शान्ति, एकता, प्रेम सदाचारों की शिक्षा देना आवश्यक है।

(1) अच्छे विचार ग्रहण करने के लिए बाल्यावस्था सबसे महत्वपूर्ण है :-   

(1) मौके खोजे नहीं, पैदा किए जाते हैं :- देश के पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम जी का कहना था कि इंतजार करने वालों को सिर्फ उतना ही मिलता है, जितना कोशिश करने वाले छोड़ देते हैं। इसलिए हमें मौकों का इंतजार करने की बजाय वर्तमान हालात में ही अपने लिए मौके खोजने चाहिए। हर इंसान में किसी न किसी तरह की रचनात्मकता जरूर होती है। इसलिए हमें लगातार अपनी रचनात्मकता को निखारने की कोशिश करनी चाहिए,

(1) संयुक्त राष्ट्र संघ की महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल :-

देश में हुई 2016 की जनगणना में लड़कों की तुलना में लड़कियों की घटती संख्या के आंकडे़ चैंकाते ही नहीं बल्कि दुखी भी करते हैं।

(1) संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा विश्व सर्व-धर्म समन्वयसप्ताह मनाने की घोषणा :-

(1) भारत की आजादी 15 अगस्त 1947 के बाद 2 वर्ष 11 माह तथा 18 दिन की कड़ी मेहनत एवं गहन विचार-विमर्श के बाद भारतीय संविधान को 26 जनवरी 1950 को आधिकारिक रूप से अपनाया गया।

हम सब अच्छे जीवन, सफलता और शुभ-श्रेयस्कर होने की कामना करते हैं लेकिन जीवन तो उतार और चढ़ाव का खेल है।

धूप और छांव की तरह जीवन में कभी दुःख ज्यादा तो कभी सुख ज्यादा होते हैं। जिन्दगी की सोच का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि जिन्दगी में जितनी अधिक समस्याएं होती हैं, सफलताएं भी उतनी ही तेजी से कदमों को चुमती हैं।

संपूर्ण विश्व में ‘सार्वभौमिक बाल दिवस’ 20 नवंबर को मनाया गया। उल्लेखनीय है कि इस दिवस की स्थापना वर्ष 1954 में हुई थी।

‘दुर्घटना’ एक ऐसा शब्द है जिसे पढ़ते ही कुछ दृश्य आंखांे के सामने आ जाते हैं, जो भयावह होते हैं, त्रासद होते हैं, डरावने होते हैं।

केन्द्रीय मंत्री अनन्त कुमार का अचानक अनन्त की यात्रा पर प्रस्थान करना न केवल भाजपा बल्कि भारतीय राजनीति के लिए दुखद एवं गहरा आघात है।

केरल के विख्यात सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश एवं पूजा करने रास्ता खोलकर सुप्रीम कोर्ट ने नारी की अस्मिता एवं अस्तित्व को एक नयी पहचान दी है।

पर्युषण महापर्व मात्र जैनों का ही पर्व नहीं है, यह एक सार्वभौम पर्व है, मानव मात्र का पर्व है। पूरे विश्व के लिए यह एक उत्तम और उत्कृष्ट पर्व है,

पेट्रोल डीजल की कीमतें नई ऊंचाई पर और डॉलर के मुकाबले रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर होने से आर्थिक स्तर पर आम भारतीयों का दम-खम सांसें भरने लगा है,

(1) प्रभु का स्मरण करने का रास्ता भी एक है तथा मंजिल भी एक है :-

विश्व भर में जो धर्म के नाम पर लड़ाई-झगड़ा हो रहा है, उसके पीछे एकमात्र कारण हमारा अज्ञान है। प्रायः लोग कहते हैं कि प्रभु का स्मरण करने के अलग-अलग धर्म के अलग-अलग रास्ते हैं किन्तु मंजिल एक है। सभी धर्मों के पवित्र ग्रन्थों के अध्ययन के आधार पर हमारा मानना है कि प्रभु को स्मरण करने का रास्ता भी एक है तथा मंजिल भी एक है। प्रभु की इच्छा व आज्ञा को जानना तथा उस पर दृढ़तापूर्वक चलते हुए प्रभु का कार्य करना ही प्रभु को स्मरण करने का एकमात्र रास्ता है। सिटी मोन्टेसरी स्कूल की स्कूल प्रेयर बहुत गहरी है – हे ईश्वर, तुने मुझे इसलिए उत्पन्न किया है कि मैं तुझे जाँनू तथा तेरी पूजा करूँ। हमारा जीवन केवल दो कामों के लिए (पहला) प्रभु की शिक्षाओं को भली प्रकार जानने तथा (दूसरा) उसकी पूजा (अर्थात प्रभु का कार्य ) करने के लिए हुआ है। सभी पवित्र ग्रन्थों गीता, त्रिपटक, बाईबिल, कुरान, गुरूग्रन्थ साहिब, किताबे अकदस की शिक्षायें एक ही परमात्मा की ओर से आयी हैं तथा हमें उसी एक परमात्मा का कार्य करने की प्रेरणा भी देती हैं। हम मंदिर, मस्जिद, गिरजा तथा गुरूद्वारा कहीं भी बैठकर पूजा, इबादत, प्रेयर, पाठ करें, उसको सुनने वाला परमात्मा एक ही है। इस प्रकार हम सब एक है, ईश्वर एक है तथा धर्म एक है।

विश्व शांति के हम साधक हैं जंग होने देंगे, युद्धविहीन विश्व का सपना भंग होने देंगे। हम जंग होने देंगे..

(1) भारत का युवा वर्ग तैयार है एक विश्वव्यापी नई युवा क्रांति के लिए :-

(1) परीक्षा का रिजल्ट बालक के सम्पूर्ण जीवन का पैमाना नहीं है :-

ज्ञान के साथ ही उस पर बुद्धिमत्तापूर्वक चलना और एक्शनकरना भी आवश्यक है:-

परमात्मा ने दो तरह की योनियाँ बनायी हैं – पहला पशु योनियाँ तथा दूसरा मानव योनि। हिन्दु शास्त्रों के अनुसार  84 लाख पशु योनियों में अगिनत वर्षों तक कष्टमय जीवन बीताने के बाद मानव योनि में जन्म बड़े सौभाग्य से मिलता है।

परमात्मा ने हमें इस पृथ्वी पर दो प्रकार के कार्य करने के लिए भेजा है

(1) अवतारों को ही सारी सृष्टि को बनाने वाले परमपिता परमात्मा का सही पता मालूम होता है

(1) दीपावली का पर्व हमें अपने अन्दर आत्मा का प्रकाश धारण करने की प्रेरणा देता है

(1) शान्ति की सबसे बड़ी संस्था संयुक्त राष्ट्र संघ के वैश्विक निःशस्त्रीकरण के प्रयास:- संयुक्त राष्ट्र संघ की जनरल एसेम्बली ने वर्ष 1978 के स्पेशल सेशन में सदस्य देशों को शस्त्रों की बढ़ती होड़ के खतरों पर अंकुश लगाने तथा जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रतिवर्ष 24 से 30 अक्टूबर तक को वैश्विक निःशस्त्रीकरण सप्ताह मनाने की घोषणा की।

(1) 24 अक्टूबर, 1945 को संयुक्त राष्ट्र संघ’ (यू.एन.ओ.) की स्थापना

द्वितीय विष्व युद्ध की विभीषिका से व्यथित होकर अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति श्री फ्रैन्कलिन रूजवेल्ट ने 1945 में विष्व के नेताओं की एक बैठक बुलाई जिसकी वजह से 24 अक्टूबर, 1945 को विश्व की शान्ति की सबसे बड़ी संस्था संयुक्त राष्ट्र संघ’ (यू.एन.ओ.) की स्थापना हुई।

(1) संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा प्राकृतिक आपदाओं तथा मानव निर्मित संकटों से निपटने के लिए जनजागरण

(1) संयुक्त राष्ट्र संघ ने महात्मा गांधी के जन्मदिवस को अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस घोषित किया

(1) हम सब मिलकर संकल्प लेते हैं, 2022 तक नए भारत के निर्माण का:-

1942 में हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने एक संकल्प लिया था, ‘भारत छोड़ो’ का और 1047 में वह महान संकल्प सिद्ध हुआ, भारत स्वतंत्र हुआ। हम सब मिलकर संकल्प लेते हैं, 2022 तक स्वच्छ, गरीबी मुक्त, भ्रष्टाचार मुक्त, आतंकवाद मुक्त, सम्प्रदायवाद मुक्त तथा जातिवाद मुक्त नए भारत के निर्माण का। भारत के लाखों स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने अपनी कुर्बानियाँ देकर ब्रिटिश शासन से 15 अगस्त 1947 को अपने देश को अंग्रेजों की दासता से मुक्त कराया था। तब से इस महान दिवस को भारत में स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारत के महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने अपने देश की आजादी के लिए एक लम्बी और कठिन यात्रा तय की थी। देश को अन्यायपूर्ण अंग्रेजी साम्राज्य की गुलामी से आजाद कराने में अपने प्राणों की बाजी लगाने वाले लाखों स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बलिदान तथा त्याग का मूल्य किसी भी कीमत पर नहीं चुकाया जा सकता। इन सभी ने अपने युग की समस्या अर्थात ‘भारत को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त कराने के लिए’ अपने परिवार और सम्पत्ति के साथ ही अपनी सुख-सुविधाओं आदि चीजों का त्याग किया था। आजादी के इन मतवाले शहीदों के त्याग एवं बलिदान से मिली आजादी को हमें सम्भाल कर रखना होगा। भारत की आजादी की लड़ाई में लाखों शहीदों के बलिदानी जीवन हमें सन्देश दे रहे हैं – हम लाये हैं तूफान से किश्ती निकाल के, इस देश को रखना मेरे बच्चों सम्भाल के।

मेरा जन्म केरल के एक छोटे-से गांव वायनाड में हुआ था। मेरे पिता काॅफी के एक बगीचे में दैनिक मजदूरी का काम करते थे। तमाम पिछड़े गांवों की तरह मेरे गांव में भी सिर्फ एक ही प्राइमरी स्कूल था। हाई स्कूल करने के लिए बच्चों को गांव से चार किलोमीटर दूर पैदल जाना पड़ता था। बचपन में मेरा मन पढ़ाई में नहीं लगता था, इसलिए स्कूल के बाद मैं पिता के पास बगीचे में चला जाता था। पढ़ाई से बेरूखी के कारण मैं कक्षा छह में फेल हो गया। 

1. आलस्य से हम सभी परिचित हैं। काम करने का मन न होना, समय यों ही गुजार देना, आवश्यकता से अधिक सोना आदि को हम आलस्य की संज्ञा देते हैं और यह भी जानते हैं कि आलस्य से हमारा बहुत नुकसान होता है। फिर भी आलस्य से पीछा नहीं छूटता, कहीं-न-कहीं जीवन में यह प्रकट हो ही जाता है। आलस्य करते समय हम अपने कार्यों, परेशानियों आदि को भूल जाते हैं और जब समय गुजर जाता है तो आलस्य का रोना रोते हैं, स्वयं को दोष देते हैं, पछताते हैं। सच में आलस्य हमारे जीवन में ऐसे कोने में छिपा होता है, ऐसे छद्म वेश में होता है, जिसे हम पहचान नहीं पाते, ढूँढ़ नहीं पाते, उसे भगा नहीं पाते; जबकि उससे ज्यादा घातक हमारे लिए और कोई वृत्ति नहीं होती। 

अमेरिका के अखबार द क्रिश्चियन साइंस माॅनिटर के अनुसार अफ्रीका महादेश समृद्धि की तरफ तेज कदमों से बढ़ रहा है। अफ्रीका महाद्वीप में 54 देश समाहित हैं और जिनमें करीब एक अरब बीस करोड़ से अधिक लोग रहते हैं। तेल और खनिज पदार्थों के प्रचुर भंडार वाली अफ्रीकी अर्थव्यवस्थाएं अब भी अपने प्राकृतिक संसाधनों के दोहन से कोसों दूर हैं। इस महादेश ने वर्ष 2017 में मुक्त व्यापार क्षेत्र बनाने का लक्ष्य तय किया है। अगर यह काम संपन्न हो गया, तो इससे पूरे अफ्रीका में वस्तुओं, सेवाओं और लोगों की आवाजाही काफी तेजी से बढ़ेगी। व्यापार, कृषि और वन्य जीवों के संरक्षण की दिशा में बढ़ते कदम अक्सर सुर्खिया नहीं बनते। लेकिन अफ्रीकी के मामले में उनकी भी अहम भूमिका है।

भारतीय संविधान दुनिया का सबसे बड़ा संविधान है और पूरा हस्तलिखित है। इसमें 48 आर्टिकल, 12 अनुसूची और 94 संशोधन हैं। संविधान सभा के सभी 283 सदस्यों के संविधान पर हस्ताक्षर हैं जो 26 जनवरी 1950 से लागू किया गया था। संविधान को तैयार करने में 2 साल 11 महीने और 17 दिन का समय लगा था। संविधान सभा के अध्यक्ष डा. राजेन्द्र प्रसाद और ड्राफ्ंिटग कमेटी के चेयरमैन डा. बी.आर. अम्बेडकर थे उन्हें संविधान का पितामह तथा जनक भी कहा जाता है। भारत में प्रत्येक वर्ष 26 नवंबर के दिन राष्ट्रीय संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है वर्ष 1949 में 26 नवम्बर को संविधान सभा द्वारा भारत के संविधान को स्वीकृत किया गया था, जो 26 जनवरी, 1950 को प्रभाव में आया। हमारा संविधान हमारी संस्कृति तथा सभ्यता के अनुरूप है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 में विश्व एकता, विश्व शान्ति तथा अन्तर्राष्ट्रीय कानून का सम्मान करने के लिए प्रत्येक नागरिक तथा देश को कार्य करने के लिए बाध्य करता है।

राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी ने आधारभूत नवाचार और उत्कृष्ट पारम्परिक ज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले 55 लोगों को सम्मानित किया। श्री मुखर्जी ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित नवप्रवर्तन उत्सव के दौरान इन सभी लोगों को सम्मानित किया। इनमें से सबसे प्रमुख गुजरात के 82 वर्षीय भंजीभाई मथुकिया को कृषि से संबंधित कई नए तरीके विकसित करने के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान किया गया। इस मेले में हिस्सा लेने वाले वैज्ञानिक नहीं हैं लेकिन वे ऐसे खोजकर्ता हैं जिन्होंने अपनी खुद की जरूरत या अपने आसपास की समस्या के निदान के लिए अनोखी खोजें कर डाली। जैसे बिना बिजली से चलने वाली फ्रिज, क्ले वाटर फिल्टर, गर्मी में उगने वाले सेब की किस्म, मरीजों के नहाने के लिए कुर्सी, कूड़ा उठाने वाली मशीन आदि। नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन की तरफ से आयोजित नवप्रवर्तन उत्सव में 55 से भी ज्यादा जमीनी इनोवेटरों ने हिस्सा लिया और अपने उत्पादों को उन्होंने यहां प्रदर्शित भी किया। 

किसी भी बालक के व्यक्तित्व निर्माण में ‘माँ’ की ही मुख्य भूमिका:

कोई भी बच्चा सबसे ज्यादा समय अपनी माँ के सम्पर्क में रहता है और माँ उसे जैसा चाहे बना देती है। इस सम्बन्ध में एक कहानी मुझे याद आ रही है जिसमें एक माता मदालसा थी वो बहुत सुन्दर थी। वे ऋषि कन्या थी। एक बार जंगल से गुजरते समय एक राजा ने ऋषि कन्या की सुन्दरता पर मोहित होकर उनसे विवाह का प्रस्ताव किया। इस पर उन ऋषि कन्या ने उस राजा से कहा कि ‘‘मैं आपसे शादी तो कर लूगी पर मेरी शर्त यह है कि जो बच्चे होगे उनको शिक्षा मैं अपने तरीके से दूगी।’’ राजा उसकी सुन्दरता से इतनी ज्यादा प्रभावित थे कि उन्होंने ऋषि कन्या की बात मान ली। शादी के बाद जब बच्चा पैदा हुआ तो उस महिला ने अपने बच्चे को सिखाया कि बुद्धोजी, शुद्धोजी और निरंकारी जी। मायने तुम बुद्ध हो। तुम शुद्ध हो और तुम निरंकारी हो। आगे चलकर यह बच्चा महान संत बन गया। उस जमाने में जो बच्चा संत बन जाते थे उन्हें हिमालय पर्वत पर भेज दिया जाता था। इसी प्रकार दूसरे बच्चे को भी हिमालय भेज दिया गया। राजा ने जब देखा कि उसके बच्चे संत बनते जा रहंे हैं तो उन्होंने रानी से प्रार्थना की कि ‘महारानी कृपा करके एक बच्चे को तो ऐसी शिक्षा दो जो कि आगे चलकर इस राज्य को संभालें।’ इसके बाद जब बच्चा हुआ तो महारानी ने उसे ऐसी शिक्षा दी कि वो राज्य को चलाने वाला बन गया। बाद में हिमालय पर्वत से आकर उसके दोनों भाईयों ने अच्छे सिद्धांतों पर राज्य को चलाने में अपने भाई का साथ दिया|

विश्व की साहसी महिलायें हर क्षेत्र में मिसाल कायम कर रही हैं। कुछ ऐसी बहादुर तथा विश्वास से भरी बेटियों से रूबरू होते हैं, जिन्होंने समाज में बदलाव और महिला सम्मान के लिए सराहनीय तथा अनुकरणीय मिसाल पेश की है। देश में डीजल इंजन ट्रेन चलाने वाली पहली महिला मुमताज काजी हो या पश्चिम बंगाल में बाल और महिला तस्करी के खिलाफ आवाज उठाने वाली अनोयारा खातून। ऐसी कई आम महिलाएं हैं जो भले ही बहुत लोकप्रिय न हो लेकिन उन्हें इस साल नारी शक्ति पुरस्कार के लिए चुना गया। राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च को 30 महिलाओं को पुरस्कृत किया। पुरस्कार पाने वालों में नागालैण्ड की महिला पत्रकार बानो हारालू भी शामिल है जो नागालैण्ड में पर्यावरण संरक्षण के लिए काम कर रही है। उत्तराखण्ड की दिव्या रावत ग्रामीणों के साथ मशरूम की खेती को विकसित करने की भूमिका निभा रही है। छत्तीसगढ़ पुलिस में कांस्टेबल स्मिता तांडी ने 2015 में जीवनदीप समूह बनाया जो गरीबों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए आर्थिक मदद करता है।

(1) क्या ‘असाधारण’ व्यक्तियों तथा ‘साधारण व्यक्तियों’ के द्वारा आत्मा के विकास में कोई फर्क है? हाँ!

(अ) समाज में कुछ ‘असाधारण’ तथा बिरले लोग ही’ ऋषि-मुनियों तथा महापुरूषों के रूप में विकसित हुए हैं जिन्होंने अपनी आत्मा के विकास के लिए कोई ‘नौकरी या व्यवसाय’ नहीं किया। इन महापुरूषों ने पर्वतों, कन्धराओं, गुफाओं तथा घास-फूस की झोपड़ियों या साधारण परिस्थितियांे में रहकर तथा समाज में अत्यन्त सादा एवं सरल जीवन जीकर और व्यापक ‘समाज के लिए उपयोगी बनकर’ समाज की महत्ती सेवा की और इस प्रकार अपनी आत्मा का विकास किया।

थामस एल्वा एडिसन प्राइमरी स्कूल मे पढ़ते थे। एक दिन घर आए और मां को एक कागज देकर कहा, टीचर ने दिया है। उस कागज को पढ़कर माँ की आँखों में आंसू आ गए। एडिसन ने पूछा क्या लिखा है? आँसू पोंछकर माँ ने कहा- इसमें लिखा है- ‘‘आपका बच्चा जीनियस है। हमारा स्कूल छोटे स्तर का है और शिक्षक बहुत प्रशिक्षित नहीं हैं, इसे आप स्वयं शिक्षा दें। कई वर्षों बाद माँ गुजर गई। तब तक एडिसन प्रसिद्ध वैज्ञानिक बन चुके थे। एक दिन एडिसन को अलमारी के कोने में एक कागज का टुकड़ा मिला। उन्होंने उत्सुकतावश उसे खोलकर पढ़ा। ये वही कागज था, जिसमें लिखा था- आपका बच्चा बौद्धिक तौर पर कमजोर है, उसे अब स्कूल न भेजें। एडिसन घंटों रोते रहे, फिर अपनी डायरी में लिखा- एक महान माँ ने बौद्धिक तौर पर कमजोर बच्चे को सदी का महान वैज्ञानिक बना दिया।