21 Feb 2017 
महर्षि दयानंद सरस्वती

महर्षि दयानंद सरस्वती के जन्मदिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं|

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→ चरित्र का निर्माण

भक्त बुल्ले शाह जी काफियां (58)

'रांझा-रांझा' करदी

'रांझा-रांझा' करदी हुण मैं आपे रांझा होई| टेक|सद्दो मैनूं धीरो रांझा हीर न आखो कोई|

तेरे इश्क़ नचाईआं कर थईया-थईया

तेरे इश्क़ नचाईआं कर थईया-थईया| टेक|

किह करिये

अब लगन लगी किह करिये,नांह जी सकिये नांह ते मरिये| टेक|

तोबा मत कर यार

तोबा मत कर यार, कैसी तोबा है?नित पढ़ दे इस्तग़फ़ार कैसी तोबा है| टेक|

इक अलफ़ पढ़ो छुटकारा ए

इक अलफ़ पढ़ो छुटकारा ए| टेक| इक अलफ़ों दो तीन चार होए,फिर लख करोड़ हज़ार होए,फिर ओथों बाझ शुमार होए,हिक अलफ़ दा नुक़ता न्यारा ए|

बुल्हे नूं समझावण आइयां

बुल्हे नूं समझावण आइयां,भैणा ते भरजाइयां| टेक|

वाह-वाह रमज़ सजण दी

वाह-वाह रमज़ सजण दी होर| टेक| कोठे चढ़कर देवां होका,इश्क़ विहाजो कोई न लोकां,इस दा मूल न खाणा धोखा,जंगल बस्ती मिले न ठौर|

इलमों बस करीं

इलमों बस करीं ओ यार इक्को अलफ़ तेरे दरकार| टेक|

घड़िआली दिओ निकाल

घड़िआली दिओ निकाल नी,अज पी घर आइला लाल नी| टेक|

कुत्ते

रातीं जागें करें इबादतरातों जागण कुत्ते,तैकूं उत्ते|

माटी कुदम क्रेंदी

माटी कुदम क्रेंदी यार वाह-वाह माटी दी गुलज़ार| टेक|

की बेदर्दों के संग यारी

की बेदर्दों के संग यारी?रोवण अखियां ज़ारो-ज़ारी| टेक|

मैं कमली आं

हाज़ी लोक मक्के नूं जांदे,मेरा रांझा माही मक्का,नी मैं कमली आं|

वहदत दा दरिआ

की करदा हुण की करदा,तुसी कहो ख़ां दिलबर की करदा| टेक|

उलटे होर ज़माने आये

उलटे होर ज़माने आये -तां में भेद सजण दे पाये| टेक|

चुप करके करीं गुज़ारा

चुप करके करीं गुज़ारे नूं| टेक| सच सुण के लोक न सैंह्दे ने,सच आखिये तां गल पेंडे ने,फिर सच्चे पास न बैंह्दे ने,सच्च मिट्ठा आशक़ प्यारे नूं|

दिल लोचे माही यार नूं

दिल लोचे माही यार नूं| टेक|

मेरी बुक्कल दे विच चोर

मेरी बुक्कल दे विच चोर नी,मेरी बुक्कल दे विच चोर| टेक|

हम गुम हूए

अब हम गुम हूए गुम हूए,प्रेम नगर के सैर| टेक|

से वणजारे आए

से वणजारे आए नी माए,से वणजारे आए,लालां दा ओह वणज करेंदे,होका आख सुणाए|

उठ चल्ले गुआंढों यार

उठ चल्ले गुआंढों यार,रब्बा हुण की करिये| टेक|

जिस तन लगिआ इश्क़ कमाल

जिस तन लगिआ इश्क़ कमाल,नाचे बेसुर ते बेताल| टेक|

ख़ाकी

ख़ाकी ख़ाक स्यों रल जाणा,कुछ नहीं ज़ोर धिंगाणा| टेक|

बुल्ल्हिआ, की जाणां मैं कौन

बुल्ल्हिआ, की जाणां मैं कौन?|टेक|

हिन्दू नहीं ना मुसलमान

हिन्दू नहीं ना मुसलमान,बहिये त्रिंजण1 तज़ अभिमान| टेक|

आ मिल यारा सार लै मेरी

आ मिल यारा सार लै मेरी,मेरी जान दुखां ने घेरी| टेक|

रांझा जोगीड़ा बन आया

रांझा जोगीड़ा, बन आया नी,वाह सांगी सांग रचाया नी| टेक|

तांघ माही दी जली आं

तांघ माही दी जली आं नित काग उडावां खली आं| टेक|

अब तो जाग

अब तो जाग मुसाफ़र प्यारे,रैन गई लटके सब तारे| टेक|

उठ जाग

उठ जाग घुराड़े मार नहीं,एह सौण तेरे दरकार नहीं| टेक|

संभल के नेहु लाए

दिलबर संभल के नहु लाए,पिच्छों पछोतावहिंगा|

तूहिओं हैं मैं नाहीं वे सजणा

तूहिओं हैं मैं नाहीं वे सजणा,तूहिओं हैं मैं नाहीं| टेक|

इक टूणा

इक टूणा अचम्भा गावंगी,मैं रुट्ठा यार मनावांगी| टेक|

मुरली बाज उठी

मुरली बाज उठी अनघातांसुण सुण भुल्ल गईआं सभ बातां| टेक|

तेरा नाम तिहाई दा

तेरा नाम तिहाई दा,साईं तेरा नाम तिहाई दा| टेक|

बस कर जी

बस कर जी, हुण बस कर जी ,कोई गल असां नाल हस कर जी|टेक|

पात्तियां लिखां मैं शाम नूं

पत्तियां लिखां मैं शाम नूं मैनूं पिया नज़र न आवे| आंगन बना डरावना कित विधि रैण विहारे| पांधे पंडित जगत के मैं पूछ रही आं सारे|

मैं क्योंकर जावां क़ाबे नूं

मैं क्योंकर जावां क़ाबे नूं,दिल लोचे तख्त हज़ारे नूं| टेक|

मैनूं लगड़ा इश्क़

मैनूं लगड़ा इश्क़ अवलड़ा अव्वल दा, रोज़ अज़ल दा|टेक|

पाया है, किछु पाया है

पाया है किछु पाया है मेरे सतिगुरु अलख लखाया है| टेक|

चूढ़ी हां

मैं चूढ़ेटरी आं सच्चे साहिब दी सरकारों| टेक|

क्यों ओह्ले बैह् बैह् झाकीदा

क्यों ओह्ले बैह् बैह् झाकीदा?एह पर्दा किस तों राखी दा?| टेक|

गल रौले लोकां पाईं ए

गल रौले लोकां पाईं ए| टेक| सच आख मना क्यों डरना एं,इस सच पिच्छे तूं तरना एं,सच सदा अबादी करना एं,सच वस्त अचम्भा आई एं|

बेक़ैद

मैं बेक़ैद, मैं बेक़ैद;ना रोगी, ना वैद|

इक रांझा मैनूं लोड़ीदा

इक रांझा मैनूं लोड़ीदा| टेक| कुन फ़यकुन1 अग्गे दीआं लग्गीआं| नेहुं न लगड़ा चोरी दा|

पांधिया हो

झब सुख दा सुनेहुड़ा ल्यावीं वे पांधिया हो| टेक|

की जाणां

की जाणां मैं कोई रे बाबा,की जाणां मैं कोई|टेक|

इक्को रंग कपाई दा

सब इक्को रंग कपाई दा,इक आपे रूप वटाई दा| टेक|

मैंनूं कौण पछाणे

मैंनूं कौण पछाणे,मैं कुझ गो गई होर नी| टेक|

की कर गिआ माही

देखो नी की कर गिआ माही,लैंदा ही दिल हो गिआ राही| टेक|
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नम्रता का पाठ

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समझदारी की बात

एक सेठ था| उसने एक नौकर रखा| रख तो लिया, पर उसे उसकी ईमानदारी पर विश्वास नहीं हुआ| उसने उसकी परीक्षा लेनी चाही| अगले दिन सेठ ने कमरे के फर्श पर एक रुपया डाल दिया| सफाई करते समय नौकर ने देखा| उसने रुपया उठाया और उसी समय सेठ के हवाले कर दिया| दूसरे दिन वह देखता है कि फर्श पर पांच रुपए का नोट पड़ा है| उसके मन में थोड़ा शक पैदा हुआ| more...

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