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अपणा दस्स टिकाणा – काफी भक्त बुल्ले शाह जी

अपणा दस्स टिकाणा

अपणा दस टिकाणा,
किधरों आया किद्धर जाणा| टेक|

जिस ठाणे का माण करें तूं,
ओह्ने नाल न जाणां|

ज़ुल्म करें ते लोक सतावें,
कसब फड़िओ लुट खाणा|

कर लै चावड़ चार दिहाड़े,
ओड़क तूं उठ जाणा|

शहर ख़मोशां दे चल बसिये,
जित्थे मुलक समाणा|

भर-भर पूर लंघावे हाह्डा,
मलकुलमौत मुहाणा|

एहनां समनां चौं है बुल्ला,
औगुणहार पुराना|

व्याख्या

अपना ठिकाना बता

हे जीव, बता, तेरा ठिकाना कहां है, किधर से आए हो और किधर जाना है| तुम्हें जिस ठिकाने का गर्व है, वह तुम्हारे साथ (परलोक) नहीं जाएगा| तुम अत्याचार करते हो, लोगों को स्टेट हो, लोगों को लूटकर खाना तुमने अपना पेशा बना रखा है, अरे भाई भले ही तुम चार दिन अहंकार कल लो, लेकिन आख़िर में तुम्हें इस दुनिया से उठ ही जाना है| चलो, हम भी शहर ख़मोशां (क़ब्रिस्तान) में  चलकर बसते हैं, (क्योंकि एक दिन) सारा संसार उसी में समा जाएगा, मौत का फ़रिश्ता बहुत निर्मम मल्लाह है, वह क़श्ती भरकर लोगों को इधर (इहलोक) से उधर (परलोक) ले जाता है| बुल्लेशाह इस सभी से कहीं पुराना अवगुणों से भरा बन्दा है|

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