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कुत्ते – काफी भक्त बुल्ले शाह जी

कुत्ते

रातीं जागें करें इबादत
रातों जागण कुत्ते,
तैकूं उत्ते|

भौंकणों बन्द मूल ना हुंदे
जा रूड़ी ते सुत्ते,
तैकूं उत्ते|

ख़सम अपणे दा दर न छड्डदे
भावें वज्जण जुत्ते,
तैकूं उत्ते|

बुल्लेशाह कोई वस्त विहाज लै
नहीं ते बाज़ी लै गये कुत्ते,
तैकूं उत्ते|

कुत्ते

इस भावपूर्ण काफ़ी में बुल्लेशाह निष्ठा की चर्चा करते हुए कुत्ते की स्वामि-भक्ति की चर्चा करके, उसे साधक की निष्ठा से जोड़ देते हैं| वे कहते हैं कि रात-भर जागते हो, इबादत करते हो| रात-भर तो कुत्ते भी जागते हैं| तब तो कुत्ते तुमसे कहीं बढ़कर हैं|

कुत्ते कूड़े के ढेर पर पड़े हुए निरन्तर भौंकते रहते हैं| इस लिहाज़ से तो कुत्ते तुमसे कहीं बढ़कर हैं|

भले ही कोई उन्हें कितना मारे या ठुकराए, वे अपने मालिक का द्वार नहीं छोड़ते| इस दृष्टि से भी कुत्ते तुमसे कहीं बढ़कर हैं|

बुल्लेशाह कहते हैं कि साधना के मार्ग पर चलकर निष्ठापूर्वक कोई कमाई कर लो, वरना कुत्ते बाज़ी ले जाएंगे| अरे, तुमसे कहीं बढ़कर हैं कुत्ते|

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