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मित्रो! पहली यात्रा में मुझ पर जो विपत्तियां पड़ी थीं, उनके कारण मैंने निश्चय कर लिया था कि अब व्यापार यात्रा न करूंगा और अपने नगर में सुख से रहूंगा|

खलीफा हारूं रशीद के शासन काल में एक गरीब मजदूर रहता था, जिसका नाम हिन्दबाद था|

“जहांपनाह! मेरी मां मुझे लेकर अपने घर में आई ताकि उसे अकेलापन न खले, फिर उसने मेरा विवाह इसी नगर के बड़े आदमी के बेटे के साथ कर दिया|

युवक बोला, “मेरे पिता इस नगर के बादशाह थे| उनका राज्य बड़ा विस्तृत था| किंतु बादशाह और उसके सभी अधीनस्थ लोग अग्निपूजक थे|

जुबैदा ने खलीफा के सामने सिर झुकाकर निवेदन किया, “हे आलमपनाह! मेरी कहानी बड़ी ही विचित्र है, आपने अभी तक इस प्रकार की कोई कहानी नहीं सुनी होगी|

मेरा नाम अजब है और मैं महाऐश्वर्यशाली बादशाह किसब का बेटा हूं| पिता के स्वर्गवास के बाद मैं सिंहासनारूढ़ हुआ और उसी नगर में रहने लगा, जिसे मेरे पिता ने अपने राजधानी बनाया था|

मैं एक बड़े राजा का पुत्र हूं| बचपन से ही मेरी विद्यार्जन में गहरी रुचि थी| मेरे पिता ने दूर-दूर से प्रख्यात शिक्षक बुलाकर मेरी शिक्षा के लिए रखे|

मैं एक बड़े बादशाह का बेटा हूं| मेरा चाचा भी एक समीपवर्ती राज्य का स्वामी था| मेरे चाचा का एक बेटा मेरी उम्र का था और उसकी दूसरी संतान एक पुत्री थी|

खलीफा फारुन-अल-रशीद के शासन में बगदाद में एक मजदूर रहता था| वह बड़ा हंसमुख और बातूनी था|

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