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पेट के कीड़े के 27 घरेलु उपचार – 27 Homemade Remedies for Intestinal Worms

आमाशय और अंतड़ियों में बहुत से विकार पाए जाते हैं| उनमें से कृमि रोग भी बच्चे को परेशान करता है| ये कृमि लगभग 20 प्रकार के होते हैं जो अंतड़ियों में घाव पैदा कर देते हैं| अत: रोगी बेचैन हो जाता है| ये पेट में वायु को बढ़ा देते हैं जिसके कारण हृदय की धड़कन बढ़ जाती है| कृमि रोग में रोगी को उबकाई आती रहती है| कई बार भोजन के प्रति अरुचि भी उत्पन्न हो जाती है| चक्कर आने लगते हैं तथा प्यास अधिक लगती है|

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यह रोग गंदगी के कारण होता है| मक्खियों द्वारा गंदा भोजन, जल, दूध आदि के सेवन से इसका प्रसार तेजी से होता है| रोगी की आंतों से कृमि के अण्डे मल के साथ निकलकर बाहर आ जाते हैं और धरती पर फैल जाते हैं| फिर ये लार्वा रेंगते-रेंगते बड़े हो जाते हैं| जब व्यक्ति सड़क, घास आदि पर चलता है तो ये उसके पैरों में चिपट जाते हैं तथा त्वचा भेदकर शरीर के भीतर पहुंच जाते हैं|

 

 

पेट के कीड़े के 27 घरेलु नुस्खे इस प्रकार हैं:

1. करेला, नीम, पालक और सेंधा नमक

एक चम्मच करेले का रस, एक चम्मच नीम की पत्तियों का रस, एक चम्मच पालक का रस और जरा-सा सेंधा नमक-सबको मिलाकर दो खुराक बनाएं| सुबह-शाम भोजन के बाद इसका सेवन करें| इन रसों में कीड़े मरकर मल के साथ बाहर निकल जाएंगे|


2. काला नमक और कालीमिर्च

छाछ में काला नमक और कालीमिर्च का चूर्ण मिलाकर पीने से पेट के कीड़े नष्ट हो जाते हैं|


3. लहसुन और पानी

लहसुन की चटनी बनाकर सुबह निहार मुंह खाकर ऊपर से पानी पी लें| कीड़े मर जाएंगे|


4. पानी और हल्दी

गरम पानी में आधा चम्मच हल्दी डालकर एक सप्ताह तक रोज इसका सेवन करें|


5. नीम और शहद

एक चम्मच नीम की पत्तियों के रस में दो चम्मच शहद मिलाकर नित्य सुबह-शाम सेवन करें|


6. अनार

अनार के पेड़ की छाल का काढ़ा बनाकर सेवन करें|


7. बायबिड़ंग और तुलसी

2 ग्राम बायबिड़ंग का चूर्ण और 8-10 पत्ते तुलसी-दोनों की चटनी बनाकर सुबह-शाम खाएं|


8. नारंगी, पानी और बायबिड़ंग

नारंगी के छिलके 10 ग्राम और बायबिड़ंग 10 ग्राम – दोनों को पीसकर चूर्ण बना लें| 3-3 ग्राम चूर्ण सुबह-शाम खाकर ऊपर से गरम पानी पी लें|


9. अनार और छाछ

थोड़े से अनार के छिलके सुखा-पीसकर चूर्ण बना लें| इसमें से 3 ग्राम चूर्ण छाछ के साथ सेवन करें|


10. अजवायन, बायबिड़ंग, कपूर और गुड़

3 ग्राम अजवायन, 3 ग्राम बायबिड़ंग तथा 1 ग्राम कपूर-इन सबको पीसकर उसमें जरा-सा गुड़ मिलाएं| 3 ग्राम दवा दिन के भोजन के बाद लें|


11. करेला और हींग

करेले के रस में एक चुटकी हींग डालकर पीने से पेट के कृमि मल के साथ निकल जाते हैं|


12. राई और गोमूत्र

25 ग्राम राई का चूर्ण गोमूत्र में मिलाकर सुबह-शाम लें|


13. आम और नमक

आम की गुठली की पुतली या गिरी निकालकर चूर्ण बना लें| फिर 5 ग्राम चूर्ण में जरा-सा नमक डालकर सेवन करें|


14. केला

कच्चे केले की सब्जी लगातार चार दिनों तक खाने से कृमि मर जाते हैं|


15. गाजर

गाजर का रस रोज एक कम की मात्रा में एक सप्ताह तक नित्य पीने से कृमि रोग नष्ट हो जाता है|


16. प्याज और नमक

प्याज के रस में जरा-सा नमक मिलाकर पिलाने से बच्चों के पेट में कीड़े मल द्वारा बाहर निकल जाते हैं|


17. शहतूत

शहतूत का शरबत पेट के कीड़े मारने के लिए बहुत उपयोगी है|


18. बथुआ और शहद

5 ग्राम बथुए के बीज पीसकर शहद मिलाकर सेवन करें|


19. पपीता और शहद

पपीते के बीजों को सुखाकर उनका चूर्ण बना लें| एक चुटकी चूर्ण दिन में तीन बार शहद के साथ दें|


20. अजवायन और गुड़

अजवायन का चूर्ण एक चुटकी की मात्रा में दिन में दो बार गुड़ के साथ देना चाहिए|


21. बथुआ

एक चम्मच बथुए का रस सुबह बिना कुछ खिलाए पिला दें|


22. केसर और दूध

केसर तथा कपूर-दोनों एक-एक रत्ती की मात्रा में पीसकर दूध के साथ चार-पांच दिन तक दें| कीड़े मल के साथ निकल जाएंगे|


23. पत्थरधोड़ी और शहद

पत्थरधोड़ी का चूर्ण दो रत्ती की मात्रा में शहद से चटाएं|


24. बायबिड़ंग और शहद

चौथाई चम्मच बायबिड़ंग का चूर्ण शहद के मिलाकर चटाना चाहिए|


25. तुलसी

एक चम्मच तुलसी का रस गरम करके बच्चे को पिलाएं|


26. हींग

बच्चे को सुबह-शाम एक-एक रत्ती की मात्रा में हींग भूनकर दें|


27. शहद और पारिजात

शहद में आधा चम्मच पारिजात के पत्तों का रस मिलाकर पिलाएं|

 

पेट के कीड़े का कारण

बच्चों द्वारा मिट्टी खाने, दूषित भोजन ग्र्ह्सं करने, गंदे कपड़े पहनने, शरीर की उचित सफाई न करने, मांस, मछली, गुड़, दही, सिरका आदि अधिक मात्रा में सेवन करने से पेट में कीड़े हो जाते हैं|

पेट के कीड़े की पहचान

बच्चों को बदहजमी, पेट में दर्द, बुखार आदि की शिकायत हो जाती हैं| उनके चेहरे का रंग उड़ जाता है| दस्त लग जाते हैं तथा भोजन में अरुचि उत्पन्न होने लगती है|

NOTE: इलाज के किसी भी तरीके से पहले, पाठक को अपने चिकित्सक या अन्य स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता की सलाह लेनी चाहिए।

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