🙏 सतनाम वाहे गुरु, गुरु पर्व की असीमित शुभकामनाएं... आप सभी पर वाहे गुरु की मेहर हो! 23 Nov 2018 🙏
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या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता |
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ||

एक बाबाजी घूमते-फिरते एक शहर में पहुँचे| रात हो गयी थी| सरदी के दिन थे| शहर का दरवाजा बंद हो गा था| बाबाजी को ठण्ड लगी| गरम कपड़ा पास में था नहीं| बाबा जी ने सोने के लिये जगह देखी| एक भड़भूँजे की भट्ठी थी|

“Yudhishthira said, ‘All persons on earth, O foremost of men, applaudvirtuous behaviour. I have, however, great doubts with respect to thisobject of their praise. If the topic be capable of being understood byus, O foremost of virtuous men, I desire to hear everything about the wayin which virtuous behaviour can be acquired. How indeed, is thatbehaviour acquired, O Bharata! I desire to hear it. Tell me also, Oforemost of speakers, what has been said to be the characteristics ofthat behaviour.’

🙏 सतनाम वाहे गुरु, गुरु पर्व की असीमित शुभकामनाएं... आप सभी पर वाहे गुरु की मेहर हो! 23 Nov 2018 🙏