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लालची कुता

लालची कुता

एक कुत्ते को घुमते-फिरते अचानक हड्डी का एक टुकड़ा मिला| उसने वह हड्डी मुहँ में दबा ली, इधर-उधर देखा, उसे कोई दूसरा कुता नज़र नही आया| इससे पहले कि कोई दूसरा कुता आकर उस हड्डी पर अपना हक जताता वह हड्डी लेकर वहाँ से दौड़ पड़ा|

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सोचा कि उस हड्डी को ऐसी जगह ले जाकर खाएगा जहाँ उसे कोई दूसरा तंग करने वाला न हो| कुता भागते-भागते नदी किनारे पहुँचा| वह लकड़ी के पुल से नदी पार करने लगा| अचानक उसने नदी की तरफ़ देखा| पानी में उसे अपनी परछाई दिखाई दी| कुत्ते को लगा कि वह कोई अन्य कुता है और उसके मुहँ में भी हड्डी है| उस कुत्ते के मन में लालच आ गया| सोचा, क्यों न उस कुत्ते से हड्डी छीन लूँ|

कुत्ते को डराने के लिए वह ज़ोर से अपनी ही परछाई पर भौंका, पर उसके भौंकते ही मुहँ में दबा हड्डी का टुकड़ा भी नदी में जा गिरा|

लालच में पड़ कर कुत्ते ने अपने मुहँ में दबी हड्डी भी गँवा दी|

आधी छोड़ पूरी को धावै| आधी रहै न पूरी पावै||


कथा-सार

एक के दो करना भला किसे अच्छा नही लगता, परंतु लोभ-लालच में पड़कर ऐसा करना ठीक नही| हो सकता है कि एक पास में है उससे भी हाथ धोना पड़े| लालची कुता भी हड्डी के लोभ में पड़कर अपने मुहँ में दबी हड्डी से भी हाथ धो बैठा|

Munish Ahuja Founder SpiritualWorld.co.in

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