Homeतिलिस्मी कहानियाँ21 – जादुई दोस्त | Jadui Dost | Tilismi Kahaniya

21 – जादुई दोस्त | Jadui Dost | Tilismi Kahaniya

तो अब मगन सुधर चुका है और उसे अपनी गलती का एहसास हो चुका है. वह अप्सरा और उस के माता-पिता से माफी मांगता है ।

अप्सरा के पिता- “मगन,,,,बेटा तू हमारे बेटे जैसा ही है,, इसलिए हम ने तुझे माफ किया!”

अप्सरा- “हाँ,,,, मगन,,,, तुम चिंता मत करो,,सब ठीक है,,!”

करण- “अब हम भी यहां से जाना चाहते हैं अप्सरा जी।”

परी (करण से)- ” ठीक है! करण,,,,अब तुम लोग यहां से प्रस्थान करो। क्योंकि तुम्हारे कार्य के लिए तुम सब को देरी हो रही है…. मैं ईश्वर से प्रार्थना करती हूं कि तुम लोगों का यह सफर सफल हो जाए!”

अप्सरा के पिता- “हाँ पुत्र,,,हम दोनों का आशीर्वाद तुम्हारे और तुम्हारे मित्रों के साथ हैं!”

अप्सरा की माता- “तुम सब अपने कार्य मे जरूर सफल हो जाओगे!”

कर्मजीत- “आप का बहुत-बहुत धन्यवाद! अब हमें यहां से जाने की इजाजत दें!”

सुनहरी चिड़िया- ” जी रानी मां! अब हम चलते हैं!”

अप्सरा और उस के माता-पिता से इजाजत लेने के बाद सभी लोग अपने रास्ते पर आगे की ओर बढ़ते हैं।

वधिराज- ” अभी हमें उस जादूगर तक पहुंचने में और दिन लगेंगे!”

करण- ” तुम सही कह रहे हो वधिराज! अभी समय लगेगा”

करमजीत- “हाँ…थोड़ा देर से ही सही,बस हमारा काम अवश्य बन जाए!”

सुनहरी चिड़िया- ” हां तुम सही कह रहे हो करमजीत,, हम लोग इतना परिश्रम कर रहे हैं मुझे पूरा भरोसा है कि मुझे इस श्राप से मुक्ति जल्द ही मिल जाएगी!”

बुलबुल- “हाँ राजकुमारी,,, आप को आप के श्राप से जल्द ही मुक्ति मिल जाएगी,,, आप ईश्वर पर भरोसा रखें!”

कुश- “जी हाँ,,,,, राजकुमारी!”

और ऐसे ही सभी साथी कड़ी धूप में आगे की ओर बढ़ते रहते हैं। रात काफी हो जाती है तो सभी लोग एक स्थान पर रुक कर विश्राम करने की सोचते हैं।

सुबह के 4 बजे, जब सभी लोग सो रहे होते हैं कि तभी टॉबी की आंख खुलती है और टॉबी को कोई जानी पहचानी खुशबू आती है।

टॉबी– “ये खुशबू कहाँ से आ रही है। इसे तो मैं पहचानता हूँ!!”

टॉबी आसपास की जमीन को सूंघतें हुए खुशबू का पीछा करने लगता है।

टॉबी- ” याद क्यों नही आ रहा मुझे, ये खुशबू पहले भी आई है मुझे।”

और उस खुशबू का पीछा करते-करते टॉबी थोड़ी दूर पहुंच जाता है, जहां पर उस को अपनी पुरानी दोस्त शुगर दिखाई देती है।

वह खुश हो कर उछलने लगता है और गोल गोल घूमने लगता है।

टॉबी- ” अरे शुगर तुम???,,,, तुम यहां पर क्या कर रही हो?,,,, ”

शुगर (खुश हो कर)- “टॉबी!! तुम”

शुगर जल्दी से उस की तरफ भागती हुई, उसे गले लगा लेती है, जिस से टॉबी शरमा जाता है और उस का तेजी से दिल धड़कने लगता है

टॉबी- “वैसे तुम,,, यहां पर क्या कर रही हो बताओ तो!,,”

वहीं शुगर इतनी खुश थी कि वह उस की बातों पर ध्यान दे ही नहीं रही थी।

शुगर (मुस्कुरा कर)- “अरे टॉबी लेकिन पहले यह बताओ कि तुम कैसे हो? और यहां क्यों आये हो तुम?”

टॉबी (मुस्कुरा कर)- ” मैं तो बिल्कुल ठीक हूं और मैं किसी जरूरी कार्य से यहां हूँ। मेरे साथी भी है मेरे साथ”

शुगर- “अच्छा!! तुम्हें देख कर बहुत अच्छा लगा मुझे!”

टॉबी- “लेकिन जब तुम वहां रहती थी तो मुझे अच्छा लगता था। उस वक्त हम दोनों छोटे थे!”

शुगर- “हां टॉबी, लेकिन मेरे मालिक ने वह जगह छोड़ दी, तो मुझे जाना पड़ा!”

टॉबी- “अच्छा! तुम बता कर भी तो नही गयी थी, अचानक गायब हो गयी।”

दरअसल टॉबी; करण के साथ जिस जगह पर रहता है वहीं पर दो साल पहले शुगर भी रहती थी लेकिन बाद में, वह अपने मालिक के साथ वहां से कहीं दूर चली गई थी।

टॉबी- ” तुम यहीं आस पास रहती हो क्या? ”

शुगर- “हाँ,,, टॉबी,,,!”

दोनों बातें कर ही रहे थे कि तभी वहां पर एक आदमी आता है जो दिखने में काफी हट्टा कट्टा था और उस के हाथ में एक छड़ी थी और एक आंख पर पट्टी लगी हुई थी।

टॉबी- “यह तो शक्ल से ही लग रहा है कोई बदमाश है, अभी मजा चखाता हूँ इस को। शुगर भी मेरी बहादुरी देख खुश हो जाएगी।”

शुगर- “नही टॉबी! ऐसा कुछ भी मत करना। क्योंकि—-!”

टॉबी- “तुम रुको जरा!!”

तो टॉबी अचानक से उस आदमी के पास जाता है और उस पर हमला करने लगता है।यह देख शुगर घबरा जाती है और उसे रोकती है।

शुगर- “अरे नही टॉबी! ऐसा मत करो, रुक जाओ।!”

टॉबी- ” तुम नहीं जानती,,,, शुगर,,, हो सकता है कि यह हमें नुकसान पहुंचाने आया हो!”

शुगर- “रूक जाओ मैं कह रही हूं ना!”

और टॉबी शुगर की कोई भी बात नहीं मानता और गुस्से में उस आदमी के पैर में काट लेता है।
तभी वो आदमी बहुत गुस्सा हो जाता है।

आदमी- “ऐ ना समझ,,, तूने जो किया है वो सही नहीं किया और इस के लिए तुझे अब श्राप मिलेगा!”

शुगर (चिल्लाते हुए)- “नही नहीं मालिक,,,, ऐसा मत करिये,,इसे माफ कर दीजिए।,!”

लेकिन वह आदमी अपनी छड़ी घुमाता है जिस से टॉबी की आवाज चली जाती है।
और तभी वहां पर करण और सभी लोग पहुंच जाते हैं।
और शुगर उन सभी को सारी बातें बता देती है।

लव- “अरे, ये टॉबी बोल तो रहा है, लेकिन लगता है मेरे कान खराब हो गए हैं!”

कुश- “हां भाई, मुझे भी कुछ सुनाई नहीं दे रहा!”

लव कुश दोनों अपने कानों पर थप्पड़ लगाने लगते हैं।

बुलबुल- ” अरे पागलों, उस की आवाज चली गयी है, बस मुँह हिलता दिख रहा है।”

करण- “टॉबी ये क्या हुआ अचानक! और ये तो शुगर है ना”

शुगर- ” हां करन! दरअसल यह मेरे मालिक है,,,,,टॉबी ने गलत समझ लिया था! और तभी—!”

शुगर पूरी बात बता ही रही थी कि उसका मालिक बीच मे बोल पड़ता है।

आदमी (गुस्से से)- ” शुगर चलो,, अब बहुत देर हो गई है, चलो यहां से!”

करण- ” टॉबी के किए के लिए हम आप से माफी मांगते हैं! श्री मान”

आदमी- ” लेकिन हम इसे क्षमा नहीं करेंगे! कभी नही”

लेकिन तभी टॉबी की आंखों से बहुत आंसू निकलने लगते है और वह अपनी आंखों से बार-बार शुगर के मालिक को मना रहा था।

शुगर- “देखिए ना मालिक, इसे अपने किये पर पछतावा है!”

आदमी ( गुस्से से)- ” इस पर बिल्कुल भी ध्यान मत दो शुगर!”

शुगर- ” लेकिन मालिक उस से गलती हुई है,,, एक बार तो उसे माफ कर दीजिए,, उस की आवाज उसे वापस दे दीजिए!”

और शुगर जोर जोर से रोते हुए अपने मालिक से प्रार्थना करने लग जाती है

वधिराज- “कृपया आप श्राप की मुक्ति का कोई तरीका तो बताइए श्री मान!!”

करण- “हां हम सब आप से विनती करते हैं, हमारे दोस्त को माफ कर दीजिए!”

तो आखिर कार सब के कहने पर उस आदमी को शुगर और टॉबी पर दया आ जाती है।

आदमी- “ठीक है,,,तरीका है,,, पश्चिम में दूर एक बूढ़ी दादी मां रहती हैं,,, जिन्होंने मुझे जादुई कला सिखाई थी , तब मैं 18 वर्ष का था…मुझे पता है कि उन्हें इस का उपाय जरूर पता होगा!”

कर्मजीत- ” ठीक है श्री मान जी! आप का बहुत-बहुत धन्यवाद!”

बुलबुल- “लेकिन महाराज,,, आप शुगर को हमारे साथ जानें दें,,,क्यूंकि टॉबी उसे बहुत चाहता है!”

आदमी- “नही, ये बिल्कुल नहीं हो सकता!”

शुगर– “मुझे जाने दीजिए मालिक, मैं जल्द ही लौट आऊंगी।”

आदमी- “नहीं, ऐसा सोचना भी मत!! अब तुम सब यहां से जाओ!”

तो वह आदमी शुगर को ले कर वहां से चला जाता है, और टॉबी काफी दुखी हो जाता है।

करण- “दुखी मत हो टॉबी, तुम्हारे ठीक होने के बाद हम शुगर को भी ले आएंगे!”

कर्मजीत- “हां टॉबी, अभी तुम्हारी आवाज वापिस लाना ज्यादा जरूरी है।”

बुलबुल- “अब हमें यहाँ से निकलना चाहिए!”

करण और उस के सभी मित्र वहां से चले जाते हैं।

आधे घण्टे बाद, अचानक से उन्हें झाड़ियों के पीछे से आवाज आती है।

करण- “सावधान दोस्तों, वहां कोई हमारे पास आ रहा है!”

लव कुश- “छुप जाओ!!”

बुलबुल- “चलो जल्दी हम पेड़ पर चढ़ जाते हैं!”

कर्मजीत- “तलवार के साथ तैयार रहना करण!”

तभी अचानक हिलती हुई झाड़ियों में से शुगर भागती हुई बाहर निकलती है और टॉबी पर कूद पड़ती है।

करण- “अरे शुगर तुम!”

कर्मजीत– “हमें लगा कोई शत्रु होगा!”

चिड़िया- “लेकिन इतने तेजी से क्यों आई तुम!”

शुगर- “टॉबी के लिए आई हूं मैं। मेरे मालिक से छुप कर भाग कर आई हूं, अब जल्दी निकलो यहां से!”

बुलबुल- “हां जल्दी चलो, वरना शुगर का मालिक यहां तक आ जाएगा इसे ढूंढते हुए!”

तो सब चलते जाते हैं और बड़ी मशक्कत के बाद उन को उस बूढ़ी दादी का पता चल पाता है।
सब उन की झोपड़ी के सामने पहुंच जाते हैं।

करन- ” दादी मां हम आप से मिलने आए हैं, कृपया बाहर आइये और हमारी समस्या का समाधान करिए!”

लव- “जी दादी मां कृपया हमारी सहायता करिए!”

और थोड़ी देर बाद अचानक दादी मां किसी जादू से उड़ते हुए सामने प्रकट हो जाती हैं और उस के चारों तरफ चमकीली आभा निकल रही थी।

दादी मां- “अब मैं भला तुम सब जवानों की सहायता क्यों करूं! बदले में मुझे क्या मिलेगा? ”

कुश- ” आप को क्या चाहिए दादी मां? बताइये”

चिड़िया- ” आप चाहे तो हम से धन ले लीजिए!”

दादी मां (जोर जोर से हंस कर)- ” अरे मूर्ख लोग,, मुझे धन नहीं बल्कि मेरी कुछ पहेलियों का उत्तर चाहिए,, और यदि तुम सभी ने मिल कर मेरे कुछ प्रश्नों और पहेलियों का जवाब दे दिया तो ही मैं तुम्हारी सहायता करूंगी !”

करण- ” ठीक है दादी मां!”

और दादी मां खुशी के मारे हवा में यहां वहां उड़ने लगती है और अपने सवाल पूछना शुरू करती है।

दादी माँ- “एक व्यक्ति जिस का नाम रघुवर है वो नींद लिए बिना 42 दिनों तक कैसे रहा?,, जबकि इतने दिनों तक बिना सोए कोई भी व्यक्ति नहीं रह सकता!”

बुलबुल- “अरे,,, यह कैसा प्रश्न है?”

दादी मां (जोर-जोर से कर हस कर)- ” हां यही प्रश्न है हा हा हा हा चलो बताओ अब!”

सब काफी सोच में पड़ जाते हैं और उत्तर ढूंढ़ने के लिए काफी सोच विचार करने लगते है।

करण- ” तो दादी मां जैसा कि आप ने बताया कि रघुवर 42 दिनों तक नींद लिए बिना रहा है लेकिन इस में रात की चर्चा नहीं करी गई है तो इस का मतलब यह है कि वह रात में सोया है तो उत्तर होगा “रात में नींद ले कर!”

दादी मां उस का जवाब सुन कर आश्चर्यचकित हो जाती है।

दादी माँ- ” हां तुम्हारा जवाब बिल्कुल सही है,, अब मेरा अगला प्रश्न सुनो,, जो कि एक पहेली है!”

सुनहरी चिड़िया- ” बताइए दादी मां!”

दादी मां- ” यह एक ऐसी चीज है जो जितना भी ज्यादा बढ़ता है तो मानव को अत्यधिक कम दिखाई देता है,,,मानव उस समय अपने नेत्र खुले होने के बावजूद भी कुछ नही देख पाता है!”

करण और उस के दोस्त अचंभे में पड़ जाते हैं।,, और फिर सोचने लगते हैं।

कर्मजीत- ” दादी मां इस का उत्तर होगा ‘अंधेरा’,,, क्यूकी अंधेरा जितना ज्यादा बढ़ता है मनुष्य को उतना ही कम दिखाई देता है और नेत्र खुले होने के बावजूद भी मनुष्य देख नही पता है!”

कुश- “हां मैं भी यही कहने वाला था!’

लव- “वाह मेरे भाई, तू कब से इतना बुद्धि वाला हो गया!”

दादी मां बहुत खुश होती है और उन्हें सब की चतुराई और बुद्धिमत्ता पर बहुत ही ज्यादा आश्चर्य और खुशी भी होती है।

दादी मां (प्रसन्न हो कर)- ” ठीक है क्योंकि तुम लोगों ने मेरे प्रश्नों के जवाब दे दीजिए तो अब मैं तुम्हारी सहायता करूंगी!”

चिड़िया- “धन्यवाद दादी मां!”

शुगर- “जी दादी मां,,, टॉबी की आवाज वापस लौटा दीजिए!!

करण- “जी दादी माँ,, आप की हम पर बहुत ही बड़ी कृपा होगी !”

तो दादी मां टॉबी के पास जाती है और उसे अपनी गोदी में बिठा कर उस के गले को सहलाती है।

और तभी अपनें जादू से दूसरे हाथ में एक शीशा (mirror) लातीं है।

दादी मां- “बेटा टॉबी,,,, इस में अपना चेहरा देखो और जो मैं बोल रही हूं उसे मन मे दोहराओ!”

और टॉबी ऐसा ही करता है… जिस के बाद उस की आवाज से वापस मिल जाती है।

टॉबी दादी मां की गोदी से उतर कर शुगर को गले लगाता है।

शुगर- ” तुम बहुत अच्छी हो शुगर, मेरी सहायता करने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया!”

कर्मजीत (मजाक करते हुए)- “अच्छा,,,, तो फिर हम ने क्या किया टॉबी? ”

और सभी लोग हंसते हैं।

तो अगले एपिसोड में हम देखेंगे करण और उसके दोस्तों का आगे का सफर।तब तक के लिए बने रहिये हमारे साथ।

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