🙏 सतनाम वाहे गुरु, गुरु पर्व की असीमित शुभकामनाएं... आप सभी पर वाहे गुरु की मेहर हो! 23 Nov 2018 🙏
Homeशिक्षाप्रद कथाएँसारस की शिक्षा

सारस की शिक्षा

सारस की शिक्षा

एक गाँव के पास एक खेत में सारस पक्षी का एक जोड़ा रहता था| वहीं उनके अंडे थे| अंडे बढ़े और समय पर उनसे बच्चे निकले| लेकिन बच्चों के बड़े होकर उड़ने योग्य होने से पहले ही खेत की फसल पक गयी| सारस बड़ी चिंता में पड़े|

“सारस की शिक्षा” सुनने के लिए Play Button क्लिक करें | Listen Audio

किसान खेत काटने आवे, इससे पहले ही बच्चों के साथ उसे वहाँ से चले जाना चाहिये पर बच्चे उड़ सकते नहीं थे| सारस ने बच्चों से कहा-‘हमारे न रहने पर यदि कोई खेत के पास आवे तो उसकी बात सुनकर याद रखना|’

एक दिन जब सारस चारा लेकर शाम को बच्चों के पास लौटा तो बच्चों ने कहा-‘आज किसान आया था| वह खेत के चारों ओर घूमता रहा| एक दो स्थानों पर खड़े होकर देर तक खेत को घूरता रहा| वह कहता था कि खेत अब काटने-योग्य हो गया| आज चलकर गाँव के लोगों से कहूँगा कि वे मेरा खेत कटवा दें|

सारस ने कहा-‘तुमलोग डरो मत| खेत अभी नहीं कटेगा| अभी खेत कटने में देर है|’

कई दिन पीछे जब एक दिन सारस शाम को बच्चों के पास आया तो बच्चे बहुत घबड़ाये थे| वे कहने लगे-‘अब हम लोगों को यह झटपट छोड़ देना चाहिये| आज किसान फिर आया था| वह कहता था कि गाँव के लोग बड़े स्वार्थी हैं| वे मेरा खेत कटवाने का कोई प्रबन्ध नहीं करते| कल मैं अपने भाइयों को भेजकर खेत कटवा लूँगा|

सारस बच्चों के पास निश्चिन्त होकर बैठा और बोला-‘अभी तो खेत कटता नहीं| दो-चार दिन में तुम लोग ठीक-ठीक उड़ने लगोगे| अभी डरने की आवश्यकता नहीं है|’

कई दिन और बीत गये|सारस के बच्चे उड़ने लगे थे और निर्भय हो गये थे| एक दिन शाम को सारस से वे कहने लगे-‘यह किसान हमलोगों को झूठ-मूठ डराता है|’ इसका खेत तो कटेगा नहीं| वह आज भी आया था और कहता था कि ‘मेरे भाई मेरी बात नहीं सुनते| सब बहाना बनाते हैं| मेरी फसल का अन्न सुखकर झर रहा है| सब बहाना बनाते है| मेरी फसल का अन्न सुखकर झर रहा है| कल बड़े सबेरे मैं आऊँगा और खेत काटूँगा|’

सारस घबराकर बोला-‘चलो! जल्दी करो! अभी अँधेरा नहीं हुआ है| दूसरे स्थान पर उड़ चलो| कल खेत अवश्य कट जायगा|’

बच्चे बोले-‘क्यों? इस बार खेत कट जायगा, यह कैसे?’

सारस ने कहा-‘किसान जबतक गाँव वालो और भाइयों के भरोसे था, खेत के कटने की आशा नहीं थी| जो दूसरों के भरोसे कोई काम छोड़ता है, उसका काम नहीं होता| लेकिन जो स्वयं काम करने को तैयार होता हैं, उसका काम रुका नहीं रहता| किसान जब स्वयं कल खेत काटने वाला है, तब तो खेत कटेगा ही|’

अपने बच्चों के साथ सारस उसी समय वहाँ से उड़कर दूसरे स्थान पर चला गया|

Munish Ahuja Founder SpiritualWorld.co.in

Munish Ahuja Founder SpiritualWorld.co.in

नम्र निवेदन: वेबसाइट को और बेहतर बनाने हेतु अपने कीमती सुझाव कॉमेंट बॉक्स में लिखें, यह आपको अच्छा लगा हो तो अपनें मित्रों के साथ अवश्य शेयर करें। धन्यवाद।
NO COMMENTS

LEAVE A COMMENT

🙏 सतनाम वाहे गुरु, गुरु पर्व की असीमित शुभकामनाएं... आप सभी पर वाहे गुरु की मेहर हो! 23 Nov 2018 🙏