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पत्तों का कमाल

प्राचीनकाल की बात है | तब वहां पेड़ों में पत्ते नहीं हुआ करते थे | पशु, पक्षी, मानव सभी को बिना पत्तों के पेड़ देखने की आदत थी | तब उन सभी की आदतें व मौसम सहने की शक्ति उसी के अनुसार होती थी | तब सर्दी के मौसम में बहुत तेज हवा नहीं चल पाती थी, क्योंकि पत्तियों के अभाव में हवा की तेजी बढ़ ही नहीं पाती थी | ठीक इसी प्रकार गर्मियों में सभी लोग गर्मी से बचने के लिए कोई न कोई इंतजाम कर लेते थे, क्योंकि पत्तों के बिना पेड़ छायादार नहीं होते थे |

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एक बार की बात है | उस बार बहुत तेज गर्मी पड़ी | जानवरों तथा मनुष्यों, सभी को गर्मी सहना मुश्किल हो रहा था | जमीन का पानी सूखता जा रहा था | इस कारण अनेक कुएं व ताल-तलैया सुख गए थे | पानी की कमी के कारण और गर्मी की तीव्रता के कारण लोग मरने लगे |

गांव के जानवरों ने मिलकर सभा की कि राजा के पास जाकर प्रार्थना की जाए कि वह पेड़ों को ढकवा दें ताकि उनके लिए छाया का इंतजाम हो सके | कुछ हाथी, हिरन, शेर आदि मिलकर राजा के पास गए और राजा प्रार्थना की – “इस बार की तेज गर्मी ने हम सभी को बेहाल कर दिया है, साथ ही पानी की कमी से हमारे साथी दम तोड़ रहे हैं | कृपया कुछ इंतजाम कीजिए |”

राजा ने मंत्री को हुक्म दिया कि पेड़ों पर तिरपाल ढकवा दिए जाएं ताकि जानकर उनकी छाया में रह सकें | साथ ही पानी का इन्तजाम भी किया जाए |

मंत्री ने जंगल में जाकर दो-तीन पेड़ों को तिरपाल से ढकवा दिया जिससे जानवरों को कुछ राहत मिलने लगी | यद्यपि उस छाया में सभी जानवर नहीं आ पाते थे, परंतु वे बारी-बारी से पेड़ की छाया में रहकर समय बिता देते थे | इस कारण उनको राहत मिल गई |

मंत्री ने सोचा कि अब तो पानी के प्रबंध के बिना ही काम हो गया है | अत: उसने पानी के इन्तजाम की बात की ओर ध्यान ही नहीं दिया और राजकाज में व्यस्त हो गया |

जब राजा की प्रजा को इस बारे में पता लगा कि राजा ने जानवरों के लिए छाया का इंतजाम किया है तो वह भी प्रार्थना लेकर राजा के पास पहुंच गई | उसने भी वृक्षों की छाया तथा पानी के इंतजाम की प्रार्थना की | राजा ने पुन: मंत्री को आदेश दिया कि पेड़ों की टहनियों को ढककर प्रजा के लिए छाया का इंतजाम किया जाए | राजा ने पानी के इंतजाम के लिए कुएं खोदने का आदेश दिया | मंत्री ने फिर लापरवाही से जाकर दो-तीन पेड़ ढक दिए और फिर जनता को भूल कर दूसरें कामों में लग गया |

इतनी कम छाया में सिर छिपाने के लिए मुनष्यों में आपस में झगड़ा होने लगा | लोगों का आपसी झगड़ा बढ़ जाने पर बात राजा के कानों तक पहुंची | राजा ने मंत्री को बुलाकर पूछा – “क्या बात है मंत्री जी, हमारी प्रजा का ध्यान नहीं रखा जा रहा है ? बेचारी जनता बहुत दुखी है, आप तुरंत उसकी सहायता कीजिए |”

मंत्री ने कहा – “मेरा एक सुझाव है यदि हम पेड़ों को ढकने के बजाय उन पर पत्ते चिपका दें तो छाया भी हो जाएगी और लोगों को हवा भी मिलेगी | इससे लोगों की परेशानी जल्दी ही कम हो जाएगी |”

राजा ने कहा, “ठीक है, आप जाकर पेड़ों में पत्ते चिपकवा दीजिए |”

मंत्री ने कहा – “महाराज पेड़ों में सारे पत्ते एक समान लगेंगे तभी पेड़ खूबसूरत लगेंगे | आप कुछ कारीगरों का इंतजाम कर दीजिए |”

राजा ने कुछ कारीगरों को काम पर लगने का आदेश दिया | मंत्री ने नए स्थानों पर गहरे कुएं खुदवाने शुरू किए | वहां पानी निकल आया | परंतु अभी पेड़ों में पत्ते चिपकाने का कार्य बाकी था |

मंत्री अपने साथ कारीगरों को लेकर वृक्षों पर पत्ते चिपकाने में लग गया | परंतु एक समान पत्ते काटने व चिपकाने में बहुत समय लग रहा था | लोग गर्मी के मारे चीख-पुकार कर रहे थे |

एक गांव के मुखिया ने मंत्री से शिकायत की – “मंत्री जी ये कारीगर तो बहुत धीमे काम करते हैं, पुरे दिन एक पेड़ पर पत्तियां नहीं लगा सके | इसी तरह कार्य चलता रहा तो हम लोग गर्मी से मर जाएंगे |”

मंत्री ने कहा – “देखिए, हर कार्य में समय लगता है | यदि आप लोगों को इतनी परेशानी है तो आप हमारा साथ क्यों नहीं देते ?”

मुखिया बोला – “आप एक बार आदेश दे दीजिए फिर सारी प्रजा इस कार्य में जुट जाएगी | परंतु इन सब लोगों के बनाए पत्ते शायद एक ही आकार के न बन सकें |”

मंत्री ने उत्तर दिया – “कोई बात नहीं, हमें काम पूरा करने से मतलब है | बस, काम जल्दी पूरा हो जाना चाहिए |”

मंत्री की स्वीकृति पाते ही जनता पत्ते काटने व चिपकाने लगी | उस गांव के लोगों की देखा-देखी दूसरे लोग भी पत्ते चिपकाने में लग गए | जंगल के जानवरों ने देखा तो वे भी पत्ते चिपकाने में जुट गए |

देखते-देखते अधिकांश पेड़ों पर पत्ते नजर आने लगे | पत्ते लगाते समय अनेक पत्ते नीचे बिखरते जा रहे थे | इस प्रकार कुछ पत्ते जमीन पर भी बिछ गए |

अब सभी लोग खुश थे | चारों तरफ वृक्षों पर पत्ते लग गए थे | अत: गर्मी में पेड़ों की छाया में बैठने में सभी को बड़ा आनंद आ रहा था | सारी प्रजा व जंगल के जानवर खुश थे कि उनके लिए वृक्षों की छाया तथा कुएं के पानी का इंतजाम हो गया था |

बस, तभी से सभी वृक्षों पर अलग-अलग तरह के पत्ते उगने लगे | अब लोगों को वृक्षों की छाया के अतिरिक्त हवा का आनंद भी आने लगा था |

Munish Ahuja Founder SpiritualWorld.co.in

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