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किसान की समझदारी

किसान की समझदारी

एक किसान के पास एक बकरी, एक घास का गट्ठर और एक शेर था| मार्ग में एक नदी पड़ती थी, जिसे पार करने के लिए नदी तट पर एक छोटी नौका थी| लेकिन उस नौका से एक बार में दो ही चीजें नदी पार कर जा सकती थी|

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किसान सोचने लगा कि अब क्या करूँ? यदि मैं पहले शेर को ले जाता हूँ तो बकरी पीछे से घास खा जाएगी| यदि घास को ले जाता हूँ तो पीछे से शेर बकरी को खा जाएगा| बकरी को ले जाना ही ठीक होगा| इसे दूसरे किनारे पर छोड़कर फिर शेर को ले जाऊँगा| लेकिन शेर को बकरी के पास छोडूंगा तो बकरी को शेर खा जाएगा| क्या करूँ?

आखिर में उसके दिमाग में एक युक्ति आ ही गई|

किसान सबसे पहले बकरी को दूसरे किनारे पर छोड़ आया| फिर वापस आकर शेर को ले गया| शेर को वहाँ छोड़ा और बकरी को वापस ले आया| फिर बकरी को इस किनारे छोड़ा और घास का गट्ठर ले गया| घास शेर के पास छोड़कर वापस आया और फिर बकरी को ले गया| इस तरह उसने बिना किसी क्षति के नदी पार कर ली और प्रसन्न होकर घर की ओर चल पड़ा|


कथा-सार

समस्या कैसी भी विकट क्यों न हो शांति व धैर्य से विचार करने पर समाधान निकल ही जाता है| किसान की समस्या वास्तव में गंभीर थी परंतु जब उसने युक्ति से काम लिया तो वही चुटकियों में समस्या हल हो गई|

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