🙏 सतनाम वाहे गुरु, गुरु पर्व की असीमित शुभकामनाएं... आप सभी पर वाहे गुरु की मेहर हो! 23 Nov 2018 🙏
Homeशिक्षाप्रद कथाएँब्रह्माजी के थैले

ब्रह्माजी के थैले

ब्रह्माजी के थैले

इस संसार को ब्रम्हा जी ने एक बार मनुष्य को अपने पास बुलाकर पूछा-‘तुम क्या चाहते हो?’

“ब्रह्माजी के थैले” सुनने के लिए Play Button क्लिक करें | Listen Audio

मनुष्य ने कहा-‘मैं उन्नति करना चाहता हूँ, सुख-शान्ति चाहता हूँ और चाहता हूँ की सब लोग मेरी प्रशंसा करें|’

ब्रम्हा जी ने मनुष्य के सामने दो थैले धर दिये| वे बोले-‘इन थैलों को ले लो| इनमे से एक थैले में तुम्हारे पड़ोसी की बुराइयाँ भारी हैं| उसे पीठ पर लाद लो| उसे सदा बंद रखना| न तुम देखना न दूसरे को दिखाना| दूसरे थैले में तुम्हारा दोष भरे हैं| उसे सामने लटका लो और बार-बार खोलकर देखा करो|

मनुष्य ने दोनों थैले उठा लिये| लेकिन उससे एक भूल हो गयी| उसने अपनी बुराइयों का थैला पीठ पर लाद लिया और उसका मुँह कसकर बंद कर दिया| अपने पड़ोसी की बुराइयों से भरा थैला उसें सामने लटका लिया| उसका मुँह खोलकर वह उसे देखता रहता है और दूसरों को भी दिखता रहता है| इससे उसने जो वरदान माँगे थे, वे भी उल्टे हो गये| वह अवनति करने लगा| उसे दुःख और अशांति मिलने लगी| सब लोग उसे बुरा बताने लगे|

तुम मनुष्य की वह भूल सुधार लो तुम्हारी उन्नति होगी| तुम्हें सुख-शान्ति मिलेगी| जगत् में तुम्हारी प्रशंसा होगी| तुम्हें करना यह है कि अपने पड़ोसी और परिचितों के दोष देखना बंद कर दो और दोषों पर सदा दृष्टि रखो|

Munish Ahuja Founder SpiritualWorld.co.in

Munish Ahuja Founder SpiritualWorld.co.in

नम्र निवेदन: वेबसाइट को और बेहतर बनाने हेतु अपने कीमती सुझाव कॉमेंट बॉक्स में लिखें, यह आपको अच्छा लगा हो तो अपनें मित्रों के साथ अवश्य शेयर करें। धन्यवाद।
NO COMMENTS

LEAVE A COMMENT

🙏 सतनाम वाहे गुरु, गुरु पर्व की असीमित शुभकामनाएं... आप सभी पर वाहे गुरु की मेहर हो! 23 Nov 2018 🙏