🙏 सतनाम वाहे गुरु, गुरु पर्व की असीमित शुभकामनाएं... आप सभी पर वाहे गुरु की मेहर हो! 23 Nov 2018 🙏
Homeधार्मिक ग्रंथसम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता15. पुरुषोत्तमयोगपरमेश्वर के रूप का वर्णन (अध्याय 15 शलोक 12 से 15)

परमेश्वर के रूप का वर्णन (अध्याय 15 शलोक 12 से 15)

परमेश्वर के रूप का वर्णन (अध्याय 15 शलोक 12 से 15)

सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता - अध्याय 15 शलोक 12

श्रीभगवान बोले (THE LORD SAID):

यदादित्यगतं तेजो जगद्भासयतेऽखिलम्।
यच्चन्द्रमसि यच्चाग्नौ तत्तेजो विद्धि मामकम्॥15- 12॥

Hजो तेज सूर्य से आकर इस संपूर्ण संसार को प्रकाशित कर देता है, और जो तेज चन्द्र औऱ अग्नि में है, उन सभी को तुम मेरा ही जानो।

EKnow that the radiance of the sun that lights up the world, and of the moon and fire, is my own effulgence.
सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता - अध्याय 15 शलोक 13
गामाविश्य च भूतानि धारयाम्यहमोजसा।
पुष्णामि चौषधीः सर्वाः सोमो भूत्वा रसात्मकः॥15- 13॥

Hमैं ही सभी प्राणियों में प्रविष्ट होकर उन्हें धारण करता हूँ (उनका पालन पोषण करता हूँ)। मैं ही रसमय चन्द्र बनकर सभी औषधीयाँ (अनाज आदि) उत्पन्न करता हूँ।

EPermeating the earth, I support all beings with my radical energy and like the ambrosial moon, I provide the sap that nourishes all plants.
सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता - अध्याय 15 शलोक 14
अहं वैश्वानरो भूत्वा प्राणिनां देहमाश्रितः।
प्राणापानसमायुक्तः पचाम्यन्नं चतुर्विधम्॥15- 14॥

Hमैं ही प्राणियों की देह में स्थित हो प्राण और अपान वायुओं द्वारा चारों प्रकार के खानों को पचाता हूँ।

EI am the fire, possessed of pran and apan, within the body of all living beings that consumes the four kinds of food.
सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता - अध्याय 15 शलोक 15
सर्वस्य चाहं हृदि संनिविष्टो मत्तः स्मृतिर्ज्ञानमपोहनं च।
वेदैश्च सर्वैरहमेव वेद्यो वेदान्तकृद्वेदविदेव चाहम्॥15- 15॥

Hमैं सभी प्राणियों के हृदय में स्थित हूँ। मुझ से ही स्मृति, ज्ञान होते है। सभी वेदों द्वारा मैं ही जानने योग्य हूँ। मैं ही वेदों का सार हुँ और मैं ही वेदों का ज्ञाता हुँ।

ESeated in the heart of all beings, I am their memory and knowledge and also the strength that overcomes all impediments; I am that which is worthy of being apprehended by the Ved; and I verily am the author of the Vedant as well as their knower. 
Munish Ahuja Founder SpiritualWorld.co.in

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