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एक दिन दुपहर ढलने के समय गुरु जी (Shri Guru Nanak Dev Ji) पेड़ की छाया के नीचे चादर बिछा कर लेट गए| उस वक्त सब वृक्षों की छाया ढल चुकी थी पर जहां गुरु जी (Shri Guru Nanak Dev Ji) लेटे हुए थे उस वृक्ष का परछावां ज्यों का त्यों खड़ा था| दो घडी उपरांत अपने खेतों की रखवाली करता राये बुलार आ उधर आ गया गया|

गुरु जी (Shri Guru Nanak Dev Ji) अब रोजाना ही पशुओं को जंगल जूह में ले जाते| एक दिन वैसाख के महीने में दुपहर के समय पशुओं को छाओं के नीचे बिठा कर गुरु जी लेट गए| सूरज के ढलने के साथ वृक्ष कि छाया भी ढलने लगी| आप के मुख पर सूरज कि धूप देखकर एक सफ़ेद साँप अपने फन के साथ छाया करके बैठ गया|

गुरु जी (Shri Guru Nanak Dev Ji) को चुपचाप व बिना किसे काम के घर में लेटे रहते देख महिता जी ने उन्हें किसे काम धंधे में लगाने कि सोची| पिता का कहना मान कर अगले ही दिन गुरु जी गाये भेसों को चराने ले गए| तीन चार दिन तो सब ठीक चलता रहा, सुबह पशुओं को बाहर ले जाते व सांयकाल वापिस घर ले आते|

ग्रीष्म ऋतु के समाप्त होते ही सावन-भादो आ गई| महिता कालू जी ने उचित समय को देखते हुए फसल बोने की सोची|

श्री गुरु नानक देव जी खेत की रखवाली करने खेत में जाते| परन्तु उनकी सारी खेती पशुओं ने चर ली| क्योंकि गुरु जी पशुओं को बाहर न निकालते|

राए बुलार ने महिता कालू जी को कहा कि आप खुश किस्मत हो आपको घर नानक जैसा पुत्र पैदा हुआ है| इन्हें आज से कटु वचन न कहना| मेरी तरफ से एक सुन्दर पोशाक लेकर जाओ|

श्री गुरु नानक देव जी को एकांत में लेटे देखकर माता तृप्ता कहने लगी – पुत्र! तुम बीमारो की तरह चुपचाप क्यों लेटे रहते हो? घर का कोई काम-काज दिल लगा कर किया करो|

महिता कालू जी ने श्री गुरु नानक देव जी को बहन नानकी व जीजा जै राम के पास भेज दिया| परन्तु वहां आप बेकार बैठे आनन्द लेते रहे|

श्री गुरु नानक देव जी मोदी खाने को बड़ी उदारता के साथ चला रहे थे| अधिकारियों ने नवाब को चुगली कर दी कि गुरु जी बड़ी लापरवाही व बेपरवाही के साथ मोदी खाना लुटा रहे है, जिसकी वजह से मोदी खाना खाली हो जाएगा|

गुरु जी को खुल्ले हाथों से मोदी खाने की नौकरी करते देख चुगलखोरो ने नवाब को जाकर फिर शिकायत कर दी कि अब तो गुरु जी पहले से भी दुगना – चौगुना मोदीखाना लुटाए जा रहे हैं|

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