नवरात्रि व्रत, पूजन और इसका महत्व

(0 votes)
  • font size
  • 5947 Views



नवरात्रि एक ख़ास हिन्दू पर्व है जिसे न केवल भारत वर्ष अपितु अन्य देशों मे भी बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है| नवरात्रि का शाब्दिक अर्थ है नौ रातें|

एन नौ रातों और दस दिनों के दौरान देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है| न केवल देवी दुर्गा, अपितु देवी सरस्वती अथवा देवी महालक्ष्मी जी की भी स्तुति की जाती है| दुर्गा का शाब्दिक अर्थ , सर्व दुखों का नाश करने वाली होती है| सम्पूर्ण भारतवर्ष मे इसे महान उत्साह के साथ मनाया जाता है|

 देवी के ९ रूपों के नाम इस प्रकार हैं :- 

शैलपुत्री - इसका अर्थ- पहाड़ों की पुत्री होता है।

ब्रह्मचारिणी - इसका अर्थ- ब्रह्मचारीणी।

चंद्रघंटा - इसका अर्थ- चाँद की तरह चमकने वाली।

कूष्माण्डा - इसका अर्थ- पूरा जगत उनके पैर में है।

स्कंदमाता - इसका अर्थ- कार्तिक स्वामी की माता।

कात्यायनी - इसका अर्थ- कात्यायन आश्रम में जन्मि।

कालरात्रि - इसका अर्थ- काल का नाश करने वली।

महागौरी - इसका अर्थ- सफेद रंग वाली मां।

सिद्धिदात्री - इसका अर्थ- सर्व सिद्धि देने वाली। 

अपनी आप बीती, आध्यात्मिक या शिक्षाप्रद कहानी को अपने नाम के साथ इस पोर्टल में सम्मलित करने हेतु हमें ई-मेल करें । (Email your story with your name, city, state & country to: This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it. ) Submit your story to publish in this portal

नवरात्रि एतिहासिक दृष्टि से - 

दुर्गा महाशक्ति का पर्व सनातन काल से मनाया जा रहा है|  ऐसा मन जाता है की सर्वप्रथम श्री रामचंद्र जी ने शारदीय नवरात्रि पूजा का प्रारंभ समुन्द्र तट पर किया था| उसके बाद दसवें दिन लंका विजय के लिए प्रस्थान किया था| असत्य पर सत्ये की विजय सर्व विदित है की किस प्रकार भगवान् श्री राम ने असत्य पर सत्ये की विजय हांसिल की और तभी से दशहरा मनाया जाने लगा| आदिशक्ति के हर रूप की नवरात्रि के नौ दिनों में क्रमशः अलग-अलग पूजा की जाती है। माँ दुर्गा की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री है। ये सभी प्रकार की सिद्धियाँ देने वाली हैं। इनका वाहन सिंह है और कमल पुष्प पर ही आसीन होती हैं। नवरात्रि के नौवें दिन इनकी उपासना की जाती है।

नवदुर्गा और दस महाविद्याओं में काली ही प्रथम प्रमुख हैं। भगवान शिव की शक्तियों में उग्र और सौम्य, दो रूपों में अनेक रूप धारण करने वाली दशमहाविद्या अनंत सिद्धियाँ प्रदान करने में समर्थ हैं। दसवें स्थान पर कमला वैष्णवी शक्ति हैं, जो प्राकृतिक संपत्तियों की अधिष्ठात्री देवी लक्ष्मी हैं। देवता, मानव, दानव सभी इनकी कृपा के बिना पंगु हैं, इसलिए आगम-निगम दोनों में इनकी उपासना समान रूप से वर्णित है। सभी देवता, राक्षस, मनुष्य, गंधर्व इनकी कृपा-प्रसाद के लिए लालायित रहते हैं।

देवी पूजन का महत्व :- 

देवी काली और दुर्गा सभी दुखों को दूर करने वाली और सब सुख प्रदान करने वाली है| नवरात्री के हर एक दिन अलग तरीके से पूजा करके देवी माता, आदिशक्ति की आराधना कर इन्हे खुश किया जाता है , फलसवरूप जीवन मई खुशिओं का संचार हो , हर प्रकार की नकारात्मक भावों से छुटकारा मिलता है| 

देवी माता अपने भगतों पर सहज ही रीझ जाती है| माता का अटूट प्यार, दुलार और स्नेह आशीर्वाद के रूप मे मिलता रहता है| जिसके साधक को किसी अन्य सहायता की जरुरत नहीं पढ़ती और वह सर्वशक्तिमान हो जाता है| माँ की करुणा अपार है जिसका कोई अंत नहीं है| 

श्री दुर्गा चालीसा श्री दुर्गा आरती श्री नवदुर्गा रक्षामंत्र भक्त पीपा जी

Please write your thoughts or suggestions in comment box given below. This will help us to make this portal better.

SpiritualWorld.co.in, Administrator
अपनी आप बीती, आध्यात्मिक या शिक्षाप्रद कहानी को अपने नाम के साथ इस पोर्टल में सम्मलित करने हेतु हमें ई-मेल करें । (Email your story with your name, city, state & country to: This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it. ) Submit your story to publish in this portal

 

नम्रता का पाठ

एक बार अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन नगर की स्थिति का जायजा लेने के लिए निकले। रास्ते में एक जगह भवन का निर्माण कार्य चल रहा था। वह कुछ देर के लिए वहीं रुक गए और वहां चल रहे कार्य को गौर से देखने लगे। कुछ देर में उन्होंने देखा कि कई मजदूर एक बड़ा-सा पत्थर उठा कर इमारत पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। किंतु पत्थर बहुत ही भारी था, इसलिए वह more...

व्यर्थ की लड़ाई

एक आदमी के पास बहुत जायदाद थी| उसके कारण रोज कोई-न-कोई झगड़ा होता रहता था| बेचारा वकीलों और अदालत के चक्कर के मारे परेशान था| उसकी स्त्री अक्सर बीमार रहती थी| वह दवाइयां खा-खाकर जीती थी और डॉक्टरों के मारे उसकी नाक में दम था| एक दिन पति-पत्नी में झगड़ा हो गया| पति ने कहा - "मैं लड़के को वकील बनाऊंगा, जिससे वह मुझे सहारा दे सके|" more...

धर्म और दुकानदारी

एक दिन एक पण्डितजी कथा सुना रहे थे| बड़ी भीड़ इकट्ठी थी| मर्द, औरतें, बच्चे सब ध्यान से पण्डितजी की बातें सुन रहे थे| पण्डितजी ने कहा - "इस दुनिया में जितने प्राणी हैं, सबमें आत्मा है, सारे जीव एक-समान हैं| भीड़ में एक लड़का और उसका बाप बैठा था| पण्डितजी की बात लड़के को बहुत पसंद आई और उसने उसे गांठ बांध ली| अगले दिन लड़का दुकान पर गया| थोड़ी देर में एक more...
 

समझदारी की बात

एक सेठ था| उसने एक नौकर रखा| रख तो लिया, पर उसे उसकी ईमानदारी पर विश्वास नहीं हुआ| उसने उसकी परीक्षा लेनी चाही| अगले दिन सेठ ने कमरे के फर्श पर एक रुपया डाल दिया| सफाई करते समय नौकर ने देखा| उसने रुपया उठाया और उसी समय सेठ के हवाले कर दिया| दूसरे दिन वह देखता है कि फर्श पर पांच रुपए का नोट पड़ा है| उसके मन में थोड़ा शक पैदा हुआ| more...

आध्यात्मिक जगत - World of Spiritual & Divine Thoughts.

Disclaimer

 

इस वेबसाइट का उद्देश्य जन साधारण तक अपना संदेश पहुँचाना है| ताकि एक धर्म का व्यक्ति दूसरे धर्म के बारे में जानकारी ले सके| इस वेबसाइट को बनाने के लिए विभिन्न पत्रिकाओं, पुस्तकों व अखबारों से सामग्री एकत्रित की गई है| इसमें किसी भी प्रकार की आलोचना व कटु शब्दों का प्रयोग नहीं किया गया|
Special Thanks to Dr. Rajni Hans, Ms. Karuna Miglani, Ms. Anisha Arora, Mr. Ashish Hans, Ms. Mini Chhabra & Ms. Ginny Chhabra for their contribution in development of this spiritual website. Privacy Policy | Media Partner | Wedding Marketplace

Vulnerability Scanner

Connect With Us