🙏 जीवन में कुछ पाना है तो झुकना होगा, कुएं में उतरने वाली बाल्टी झुकती है, तब ही पानी लेकर आती है| 🙏
Homeपरमार्थी साखियाँफ़क़ीर और चीटियाँ

फ़क़ीर और चीटियाँ

‘तज़करात-उल-औलिया’ मुसलमानों की एक रूहानी पुस्तक है| उसमें एक छोटी-सी कहानी आती है कि एक बार एक फ़क़ीर जब सफ़र पर निकला तो उसने साथ में रोटी बाँध ली कि वह रास्ते में खायेगा| रात को एक मस्जिद में सोया, सुबह उठकर दस बारह मील सफ़र किया| फिर ख़याल आया कि रोटी खा लूँ| जब रोटी की गठरी खोली तो देखा कि रोटी चीटियों से भरी पड़ी थी| फ़क़ीर को बहुत दुःख हुआ कि मैं इनको कितनी दूर ले आया हूँ, इस जगह कोई घर-बार नहीं है| कोई अपनी माँ छोड़कर आयी है, कोई अपना बाप छोड़कर आयी है, कोई बच्चे छोड़कर आयी है| यह सोचकर वह वापस चल पड़ा और दस बारह मील का सफ़र करके वापस उसी मस्जिद में आया| रोटी झाड़ी और चीटियों से कहा कि जाओ अपने-अपने घर को| मज़हब क़त्लो-ग़ारत (मारना-काटना) नहीं सिखाता, बल्कि दया सिखाता है|

FOLLOW US ON:
NO COMMENTS

LEAVE A COMMENT

🙏 ♻ प्रयास करें कि जब हम आये थे उसकी तुलना में पृथ्वी को एक बेहतर स्थान के रूप में छोड़ कर जाएं। सागर में हर एक बूँद मायने रखती है। ♻ 🙏