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बेपरदगी पर परदा

बेपरदगी पर परदा

हजर स्वामी जी महाराज के वक़्त दो-चार प्रेमी बीबियाँ थीं: उनमें एक बीबी शिब्बो थी| एक बार वह स्नान करने लगी तो एक योगी उसके घर के पास से गुज़रा| जब योगी ने गुरु-प्रेम का शब्द पढ़ा, तो शिब्बो का अपने गुरु, स्वामी जी महाराज की ओर ध्यान लग गया| वह इतनी ध्यान-मग्न हो गयी कि वस्त्र पहनना भी भूल गयी और अपने गुरु के प्रेम में मग्न वह नंगी ही घर से निकल पड़ी| गलियों में से होती हुई स्वामी जी महाराज के पास जा पहुँची और उनके चरणों पर गिरकर रोने लगी| स्वामी जी महाराज ने फरमाया, “अरी पगली, तू तो नंगी है, जा कपड़े पहनकर आ|” जब वह दूसरी ओर कपड़े पहनने चली गयी तो स्वामी जी महाराज ने हँसकर कहा, “शुक्र है! कोई तो प्रेमी मिला|”

सतगुरु की दया-मेहर की ख़ास बात यह भी हुई कि बीबी शिब्बो गलियों में से गुज़रती हुई उनके पास आयी तो रास्ते में किसी ने उसको नहीं देखा|

प्रेम दिवाने जो भये, प्रीतम के रंग माहिं|
सहजो सुधि बुधि सब गई, तन की सोधी नाहिँ||
(सहजो बाई)

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