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प्रेम की खुशबू

प्रेम की खुशबू

स्वामी जी महाराज को तुलसी साहिब से परमार्थ की रोशनी मिली थी| तुलसी साहिब स्वामी जी महाराज के घर आया करते थे| एक बार जब वे उनके घर आये तो कुछ प्रेमी सत्संगी महिलाओं को भी पता चला| वे बहुत प्रेम से जिस हालत में थीं, जल्दी-जल्दी चली आयीं| उस जमाने में आज जैसी मलमल नहीं थी, उनके खद्दर के कपड़े पसीने से भीगे हुए थे|

जब इन महिलाओं ने आकर माथा टेका तो तुलसी साहिब के एक सेवक गिरधारी लाल ने उनसे कहा, “बीबियो, पीछे हटकर बैठो, तुम्हारे कपड़ों से बदबू आती है|”

तुलसी साहिब ने कहा, “गिरधारी! तुझे इनके प्रेम की खुशबू की ख़बर नहीं| ये क्या ख़याल लेकर आयी हैं, तू नहीं जानता| इनसे तुझे बदबू आती है लेकिन मुझे नहीं आती|”

जिनको ऐसी प्रीति होती है, गुरु उनसे प्रसन्न होता है और अपना निज सेवक मानता है|

यह बहादुर आशिकों का ख़याल है| जिसको प्रेम की लगन लग
जाये, वह गोरा काला नहीं देखता, अन्धा-काना नहीं देखता|
(महाराज सावन सिंह)

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