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2018 की धनतेरस कब की है? धनतेरस के पीछे की कहानी व रिवाज़!

2018 की धनतेरस कब की है? धनतेरस के पीछे की कहानी व रिवाज़!

धनतेरस 5 नवंबर 2018 को दिन सोमवार की है।

इस दिन को दिवाली से पहले पांच दिन तक चलने वाले त्यौहारों का पहला दिन माना जाता है। इस को धन्वंतरि त्रियोदशी व धनत्रयोदशी भी कहा जाता है। यह त्यौहार हिन्दू मास कार्तिक के कृष्ण पक्ष के तेरहवें चंद्र दिवस को मनाया जाता है। धनतेरस शब्द में धन पैसे का सूचक है। इस दिन देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है ताकि परिवार में सुख संपदा व खुशहाली बनी रहे। इस दिन का महत्व व्यापारी वर्ग में ज्यादा है।

 

1धनतेरस क्विदंती (के पीछे की कहानी)

धनतेरस क्विदंती (के पीछे की कहानी)

धनतेरस क्विदंती (के पीछे की कहानी)

इसके पीछे एक बड़ी ही रोचक कहानी है, एक राजा था हिमा, उसका एक ही 16 वर्षीय बेटा था जिसकी जन्मपत्री में यह लिखा था की इसकी मौत शादी के चौथे दिन सर्प दंश से हो जाएगी। उस कहे दिन इसकी पत्नी ने इसको सोने न देने के लिए कमरे के बाहर गहनों व् सोने का ढेर लगा दिया साथ ही असंख्य दिए जला कर रस्ते को रौशनी से चकाचौंध कर दिया, व अपने पति को गाने व कहानियाँ सुनाने लगी ताकि वो सो न सके।

जब यम मौत का देवता वहां पर सर्प भेस में आया तो इतनी रौशनी को देख कर उसकी आँखे चुंधिया गयी रस्ते में इतना सोना बिछा था की वो कक्ष के भीतर प्रवेश नहीं कर पाया वह उसी ढेर के ऊपर बैठ गया व् गाने सुनंने लगा। सुबह होते ही वह चुपके से चला गया। इस तरह से यूपा पत्नी ने अपने पति को यम के चंगुल से बचा लिया। तभी से इस दिन को यमनदीपदान के नाम से भी जानते है, इस दिन यम देव को श्रद्धा भाव से दिए जलाकर पूजा जाता है।

एक और प्रचलित कथा के अनुसार इसी दिन जब सुरो व देवो के बीच अमृत को लेकर समुन्दर मंथन हो रहा था तभी इसके दौरान धन्वंतरि (विष्णु अवतार: देवताओं के चिकित्सक) समुन्दर से अमृत गागर लेकर प्रगट हुए थे।

 

2धनतेरस की तैयारिया

धनतेरस की तैयारिया

धनतेरस की तैयारिया

इस पवित्र दिन को मनाने के लिए घरो व दुकानों का नवीकरण किया जाता है उनको सजाया जाता है। घरो के बाहर सुंदर रंगो से पारंपरिक डिजाईन की रंगोली बनाई जाती है ताकि देवी लक्ष्मी का स्वागत किया जा सके। उनके चिर परीक्षत इंतज़ार के सूचक के तौर पर समस्त घर में चावल के आटे व सिन्दूर के पाँव के निशान बनाये जाते है। सारी रात दिए जलाये जाते है।

 

3धनतेरस के रिवाज़

धनतेरस के रिवाज़

धनतेरस के रिवाज़

इस दिन हिन्दुओं में यह रिवायत है की नया सोना या चांदी लेना चाहिए व् एक या दो बर्तन जिसको शुभ माना जाता है. ऐसा माना जाता है की नया धन चाहे वो किसी धातु के रूप में हो अच्छे किस्मत का प्रतीक होता है। शाम को लक्ष्मी पूजा की जाती है व मिटटी के छोटे छोटे दिए जलाये जाते है जो की तमस को रौशनी से दूर करते है। इसी दिन लक्ष्मी जी की महिमा का गुणगान भजनो के रूप में किया जाता है।

 

4धनतेरस उत्सव

धनतेरस उत्सव

धनतेरस उत्सव

इस दिन को बहुत ही हर्ष व उत्साह से मनाया जाता है। शाम को लक्ष्मी पूजा की जाती है व मिटटी के छोटे छोटे दिए जलाये जाते है जो की तमस को रौशनी से दूर करते है। इसी दिन लक्ष्मी जी की महिमा का गुणगान भजनो के रूप में किया जाता है। नैवैद्य के रूप में पारम्परिक मिठाईओं का भोग लगाया जाता है। इसी दिन महाराष्ट्र के कई इलाकों में धनिये के बीजों को हलके से पीस कर गुड़ के साथ नैवैद्य के रूप में पूजते है।

गांवों में इस दिन पालतू जानवरो को पूजा जाता है जो की उनकी रोजी रोटी का सहारा होते है। दक्षिण भारत में गौ माता को लक्ष्मी माता का अवतार मान कर सजाया जाता है व फिर उनको पूजा जाता है।

 

 Ms. Ginny Chhabra (Article Writer)

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