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वहम के 8 घरेलु उपचार – 8 Homemade Remedies for Hallucination

विविध परेशानियों एवं कष्टों के कारण जब मस्तिष्क कमजोर हो जाता है तो व्यक्ति को वहम घेर लेता है| ऐसे में वह हर समय नकारात्मक बातें सोचता रहता है| उसके अंदर आत्मविश्वास की कमी, हीन भावना, निराशा एवं चिंता व्यापक रूप से अपनी जड़ जमा लेती है|

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वहम के 8 घरेलु नुस्खे इस प्रकार हैं:

1. संगत में बैठना

रोगी को क्रोध, भय एवं चिन्ता छोड़ देनी चाहिए| मन में जो इच्छाएं पाल ली हैं तथा जिनके कारण क्रोध, लोभ और चिन्ता सताती रहती है, उनको दूर करने के लिए अच्छी संगत में बैठना चाहिए|


2. ईश्वर का चिन्तन

एकान्त में बैठकर ईश्वर का चिन्तन करना और प्रसन्न रहना चाहिए|


3. देशी घी, कालीमिर्च, बादाम, मुनक्का, इलायची और दूध

एक चम्मच देशी घी, पांच दाने कालीमिर्च, दो बादाम, पांच मुनक्का, दो छोटी इलायची तथा 20 ग्राम शक्कर लें| सबसे पहले घी के अलावा अन्य सभी चीजों को कूट-पीस लें| फिर घी में मिलाकर पिट्ठी बना लें| अब इस पिट्ठी को आधा लीटर दूध में मिलाकर छौंका बनाकर सुबह के समय सेवन करें|


4. दूध, पीपल और मिश्री

आधा किलो दूध में पीपल के पेड़ के दो पत्तों को उबालकर छान लें| फिर उसमें मिश्री मिलाकर पी जाएं| कुछ दिनों तक लगातार पीने से दिमागी कमजोरी दूर होगी और वहम निकल जाएगा|


5. सेब और आंवला

सुबह बिना कुछ खाए-पिए सेब या आंवले का मुरब्बा खाएं|


6. कद्दू और दूध

पके हुए कद्दू की दूध में खीर बनाकर खाने से भी वहम दूर होता है|


7. पानी और शहद

कुछ दिनों तक पानी में दो चम्मच शहद मिलाकर पिएं|


8. सोंठ और शहद

आधा चम्मच सोंठ को शहद में मिलाकर सेवन करें|

 

वहम का कारण

जो लोग शक्ति से अधिक शारीरिक एवं मानसिक परिश्रम करते हैं| तथा चिन्ता, शोक मोह आदि में डूबे रहते हैं, उनको व्यर्थ का वहम हो जाता है| वे यह सोचते रहते हैं कि उन्हें जीवन में सफलता कभी नहीं मिलेगी| जो लोग सदैव निराश रहते हैं, जिनकी मानहानि हुई हो, जो भय से ग्रस्त हैं या जिनकी कोई दबी हुई इच्छा पूर्ण न हो पाई हो तथा जिनका ओज नष्ट हो गया हो, ऐसे व्यक्ति भी वहम का रोग पाल लेते हैं|

वहम की पहचान

वहम रोग में हृदय की धड़कन बढ़ जाती है| रोगी चिन्ता बहुत करता है| छाती में दर्द रहने लगता है| उसे लगता है कि उसके सिर पर मेढक बैठा है जो सिर को फोड़ रहा है| कई रोगी सोचते हैं कि कोई कीड़ा उनके पेट में चला गया है जो पेट को काट रहा है| कुछ रोगी मन से भ्रम को दूर करने की कोशिश करते हैं, लेकिन उसे दूर नहीं कर पाते| यदि उनको कोई कुछ समझाने की कोशिश करता है तो वे उसके शत्रु बन जाते हैं| परन्तु यदि कोई उनके अनुकूल बात कह देता है तो वे उससे प्रसन्न होते हैं| ऐसे लोगों की श्वास की दुर्गंध आती है तथा उनके पास बैठने की इच्छा नहीं होती|

NOTE: इलाज के किसी भी तरीके से पहले, पाठक को अपने चिकित्सक या अन्य स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता की सलाह लेनी चाहिए।

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