🙏 सतनाम वाहे गुरु, गुरु पर्व की असीमित शुभकामनाएं... आप सभी पर वाहे गुरु की मेहर हो! 23 Nov 2018 🙏
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भगवान शंकर को पति के रूप में पाने हेतु माता-पार्वती कठोर तपस्या कर रही थी। उनकी तपस्या पूर्णता की ओर थी। एक समय वह भगवान के चिंतन में ध्यान मग्न बैठी थी। उसी समय उन्हें एक बालक के डुबने की चीख सुनाई दी। माता तुरंत उठकर वहां पहुंची। उन्होंने देखा एक मगरमच्छ बालक को पानी के भीतर खींच रहा है।

बीरबल बुद्धिमान तो थे किंतु रूपरंग में कुछ खास न थे| एक दिन दरबार में सुंदरता की बात चल पड़ी तो मुल्ला दोप्याजा ने बीरबल को नीचा दिखाने के उद्देश्य से कहा – “बीरबल जब भगवान सुंदरता बांट रहा था तो तुम कहां थे?”

आसमान पर काले घने बादल घिर आए थे| मैना जल्दी से उठकर अपने घोंसलें में पहुँचना चाहती थी| अंधेरा भी हो चला था और उसका घोंसला अभी दूर था| मौसम खराब होता देख उसने नीम के एक पेड़ पर रुकने का फैसला किया| उसी पेड़ पर बहुत से कौए भी थे| जैसे ही उन कौओं की नज़र उस मैना पर पड़ी तो वे ‘काँव-काँव’ करते हुए मैना पर टूट पड़े और कहने लगे, ‘हमारे पेड़ से भाग जाओ|’

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