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सिंह और चूहा – शिक्षाप्रद कथा

सिंह और चूहा - शिक्षाप्रद कथा

एक बार एक छोटा-सा चूहा एक सिंह की मांद में घुस गया| सिंह उसे देखकर बहुत क्रोधित हुआ और गरजकर बोला – “तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरी आज्ञा के बिना मेरी गुफा में घुसने की? मैं तुम्हें जान से मार दूंगा|”
बेचारा चूहा भय से कांपने लगा| उसने सिंह से विनती की – “महाराज! कृपया मुझे मत मारिए| मेरी जिंदगी बख्श दीजिए| वैसे तो मैं बहुत छोटा और दुर्बल हूं, मगर मैं वादा करता हूं कि आपका एहसान जीवन भर न भूलूंगा और यदि कभी आपके किसी काम आ सका तो स्वयं को धन्य समझूंगा|”

सिंह ने मुस्कराते हुए उस छोटे-से चूहे पर नजर डाली और बोला – “इसमें शक नहीं कि तुम एक अत्यन्त दुर्बल और छोटे से जीव हो| मगर हो बड़े वाचाल| तुम मेरे जैसे बलशाली के भला क्या काम आओगे? फिर भी चिन्ता मत करो| मैं तुम्हें नहीं मारूंगा, मगर याद रखो, फिर कभी इस गुफा में कदम मत रखना|” कहकर शेर ने उसे छोड़ दिया|

“महाराज! मैं आपका कृतज्ञ हूं|” कहकर चूहे ने हाथ जोड़ लिए| वह तो अभी भी भय से कांप रहा था|

चूहा गुफा से निकलकर सिर पर पैर रखकर भाग गया| वैसे मन ही मन वह सिंह का बहुत एहसानमंद था|

एक दिन की घटना है कि किसी शिकारी ने जंगल में जाल डाला हुआ था| सिंह शिकार की तलाश में भटक रहा था कि शिकारी के जाल में फंस गया| बेचारा अभी कुछ समझ पाता कि उसका शरीर बुरी तरह जाल में लिपट गया| वह सब इतना अचानक हुआ था कि बेचारे सिंह को संभलने का अवसर ही नहीं मिला| घबराकर वह गरजने लगा| मगर जाल बहुत मजबूत था| बेचारे सिंह की एक न चली| जाल तोड़ना उसके लिए संभव नहीं था|

असहाय सिंह की गर्जना उस चूहे ने सुन ली, जिसे सिंह ने एक बार जीवनदान दिया था| वह समझ गया कि सिंह किसी कष्ट में हैं| वह अपने बिल से बाहर आया| भागता हुआ सिंह के पास पहुंचा और सिंह के प्रति अपनी संवेदना जताई, बोला – “महाराज! चिन्ता मत कीजिए, धैर्य रखें| मैं इस जाल को काट देता हूं| आप अगले कुछ क्षणों में ही स्वतंत्र हो जाएंगे|”
और सचमुच देखते ही देखते उस छोटे से चूहे ने उस कठोर जाल को सैकड़ों स्थानों से कुतर दिया| अब क्या था, दूसरे ही क्षण सिंह जाल से आजाद हो गया| जाल से बाहर आते ही सिंह ने चूहे का आभार प्रदर्शन किया| उसे धन्यवाद दिया|

चूहा भी बहुत प्रसन्न था कि आखिर वह सिंह के लिए कुछ तो कर सका|

शिक्षा: जरूरी नहीं कि छोटे प्राणी की कोई उपयोगिता न हो|

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