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पेड़ का मालिक कौन? (बादशाह अकबर और बीरबल)

केशव और राघव दो पड़ोसी थे| उनके मकान के सामने ही एक आम का पेड़ था| उन दोनों के बीच पेड़ के मालिकाना हक को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया| बात काफी आगे बढ़ गई और न्याय के लिए दोनों बादशाह अकबर के पास पहुंचे|

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“हुजूर! यह पेड़ मेरा है…मैंने सात वर्षों तक इसे सींचकर पौधे से पेड़ बनाया है| इस साल यह पेड़ पहली बार फल दे रहा है तो राघव कहता है कि यह पेड़ उसका है|” केशव ने दुहाई दी|

“तुम क्या कहना चाहते हो राघव?” बादशाह अकबर ने पूछा|

“हुजूर, केशव झूठ बोल रहा है, यह पेड़ मेरा है और अब फलों के कारण लालच कर रहा है|” राघव ने कहा|

बादशाह अकबर ने फैसले के लिए बीरबल को आगे कर दिया| बीरबल ने दोनों पक्षों की बात को ध्यान से सुना और फिर फैसले के लिए दोनों को अगले दिन दरबार में हाजिर होने को कहा|

दोनों के जाने के बाद बीरबल ने अपने सेवकों से कहा – “जाओ, केशव और राघव के घर जाकर उनसे कहो कि आप के पेड़ पर कुछ चोरों ने हमला कर दिया है और वे आम तोड़ रहे हैं| ध्यान रहे इससे अधिक और कुछ न कहना|”

बीरबल ने अपने दो और सेवकों को दोनों के घर जाकर छिपकर उनकी बातें सुनने की जिम्मेदारी सौंपी|

बीरबल के सेवक पहले केशव के घर गए| केशव घर पर नहीं था, तो वे उसकी पत्नी को संदेश दे आए| इसके बाद वे राघव के घर गए| वहां राघव मौजूद नहीं था| अत: यहां पर भी सेवकों ने राघव की पत्नी को संदेश दे दिया|

कुछ देर बाद जब केशव लौटा तो उसकी पत्नी ने उसे आम के पेड़ पर चोरों के कब्जे की बात बताई| इस पर केशव ने कहा, ‘लूट लेने दो, मुझे क्या फर्क पड़ता है| मैंने तो एक दांव खेला था| मुझे नहीं मिलता तो राघव को भी नहीं मिलेगा, चोर ले जाएंगे| तुम मुझे खाना दो, खाकर सोते हैं, सुबह देख लेंगे क्या होता है|”

उधर राघव की पत्नी ने जब यह बात राघव को बताई तो वह बौखला उठा और लाठी लेकर तुरन्त आम के पेड़ की तरफ दौड़ा| पत्नी ने आवाज लगाई – “खाना तो खा लते|”

“अरे, मेरी सात वर्षों की मेहनत को चोर ले जाएं, मैं यह कैसे देख सकता हूं| पहले चोरों से तो निपट लूं, फिर खाना खा लूंगा|” राघव ने कहा|

बीरबल के सेवकों ने छिपकर दोनों की बात सुनी और वापस आकर बीरबल को सबकुछ बता दिया|

अगले दिन दरबार में केशव और राघव फैसले के लिए उपस्थित हुए| बीरबल को यूं तो मालूम हो गया था कि पेड़ का मालिक कौन है, फिर भी वे बोला – “इस पेड़ ने तमाम विवादों को जन्म दिया है, अत: इन विवादों को खत्म करने के लिए जरूरी है कि पेड़ ही कटवा दिया जाए| तुम दोनों का क्या विचार है?”

“जैसी हुजूर की इच्छा|” केशव ने कहा|

“हुजूर, भले ही आप यह पेड़ केशव को दे दें, पर कटवाएं नहीं| कम-से-कम यह तसल्ली तो रहेगी कि पेड़ नजरों के सामने है|” राघव ने कहा|

“फैसला हो गया|” बीरबल बोला – “यह पेड़ राघव का है, केशव झूठ बोल रहा है, केशव झूठ बोल रहा है, केशव ने पेड़ को चोरों से बचाना जरूरी नहीं समझा, क्योंकि यह पेड़ उसका था ही नहीं| वह तो धोखे से पेड़ को हथियाने की फिराक में था, जबकि राघव पेड़ को बचाने के लिए तुरन्त दौड़ पड़ा था और अब पेड़ काटने की बात पर भी राघव को देख पहुंचा| हम इस पेड़ का मालिक राघव को घोषित करते हैं और केशव को षड्यंत्र रचने के आरोप में बीस कोड़े मारे जाने का हुक्म देते हैं|”

बादशाह अकबर ने भी बीरबल के न्याय की प्रशंसा की|

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