🙏 जीवन में कुछ पाना है तो झुकना होगा, कुएं में उतरने वाली बाल्टी झुकती है, तब ही पानी लेकर आती है| 🙏
Homeशिक्षाप्रद कथाएँमिलना अकबर-बीरबल का (बादशाह अकबर और बीरबल)

मिलना अकबर-बीरबल का (बादशाह अकबर और बीरबल)

एक बार अकबर बादशाह युद्ध के बाद दिल्ली की तरफ वापस आ रहे थे| रास्ते में उन्हें इलाहाबाद में गंगा किनारे पर पड़ाव डालना पड़ा|

“मिलना अकबर-बीरबल का” सुनने के लिए Play Button क्लिक करें | Listen Audio

अकबर ने अपने एक दूत को वहां के राजा के पास भेजा| साथ में अकबर ने दूत के हाथ पत्र भी दिया, जिसे दूत ने राजा को दे दिया| पत्र में अकबर ने राजा से मिलने की इच्छा व्यक्त की थी|

झूंसी का राजा अकबर के पत्र को पढ़कर चिंतित हो गया| उसने समझा कि उसके छोटे से राज्य पर कब्जा करना चाहते हैं| राजा ने तुरंत बीरबल को बुलाया और स्थिति से अवगत कराया|

अकबर के पत्र का आशय समझ चुका था बीरबल| उसने कहा – “महाराज ऐसी कोई बात नहीं है| अकबर की इच्छा आपके राज्य पर अधिकार करने की नहीं है|”

“फिर क्या है?”

“आप चिंतित न हों महाराज, बादशाह अकबर की जो भी इच्छा है मैं उसका शीघ्र ही पता लगा लूंगा| आप मेरे साथ चलने की तैयारी करें|”

बीरबल दरबार से निकलकर मछेरों की बस्ती में पहुंचा| वहां पहुंचकर उसने नाव में ईंट, पत्थर, चूना लदवाया तथा कुछ राज मिस्त्रियों को गंगा पार चलने का आदेश दिया|

बीरबल अपना काम पूरा करके लौटा और राजा से कहा – “महाराज हम दो-तीन घंटे बाद चलेंगे|”

राजा बोला – “यदि हम लोगों को वहां पहुंचने में देर हो गई तो बादशाह का कहर हम पर टूट सकता है|”

“आप बेफिक्र रहें महाराज| मैं सब संभाल लूंगा|”

शाम के वक्त राजा और बीरबल बादशाह के पास पहुंचे और उन्हें सलाम बजाया|

अकबर उन्हें सम्मान के साथ खेमे में ले गया|

राजा ने डरते-डरते हाथ जोड़कर कहा – “जहांपनाह ने मुझे जैसे तुच्छ व्यक्ति को कैसे याद किया?”

“हमारा ऐसा कोई इरादा नहीं है| हमने तो तुम्हें केवल मुलाकात के लिए बुलाया था| मगर तुमने आने से पहले ये ईंट, पत्थर, चूना आदि क्यों भिजवाया?”

राजा ने कहा – “महाराज, इस बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है| सच तो यह है कि ये सब मेरे मंत्री ने अपनी समझ से किया है|”

अकबर बीरबल की ओर मुखतिब हुए|

बीरबल ने हाथ जोड़कर कहा – “महाराज, आपने हमारे महाराज को इसी उद्देश्य के लिए तो बुलाया था| आपकी इच्छा नदी के किनारे पर एक विशाल महल बनाने की थी न?”

“हां, ये सही है|”

अकबर बीरबल की बुद्धिमानी पर प्रसन्न हो उठे| उन्होंने तभी से बीरबल को अपने साथ रखने का फैसला कर लिया|

इसके बाद इलाहाबाद में विशाल किला बादशाह अकबर ने बनवया|

NO COMMENTS

LEAVE A COMMENT

🙏 ♻ प्रयास करें कि जब हम आये थे उसकी तुलना में पृथ्वी को एक बेहतर स्थान के रूप में छोड़ कर जाएं। सागर में हर एक बूँद मायने रखती है। ♻ 🙏