Homeशिक्षाप्रद कथाएँभेड़िया और मेमना

भेड़िया और मेमना

एक मेमना बहुत ही चंचल स्वभाव का था| उसकी माँ उसे अक्सर समझाया करती थी, ‘बेटा! अकेले इधर-उधर न जाया कर! ज़माना खराब है|’ लेकिन वह अपनी माँ की बात अनसुनी कर देता था|

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एक दिन की बात है…वह झरने पर पानी पीने गया| अभी वह पानी पी रहा था कि कहीं से एक भेड़िया भी वहाँ पानी पीने के लिए आ गया| भेड़िए ने सोचा कि इस मेमने का माँस अवश्य ही बहुत मुलायम और स्वादिष्ट होगा| मुझे इसका शिकार करना चाहिए| लेकिन इसे मारना सरासर गलत है क्योंकि जब से जंगल में नया कानून बना है, तब से नियम बन गया है कि कोई बिना कारण किसी को नही मर सकता|

उसने उसे मारने के लिए अपनी बुद्धि से एक युक्ति सोची|

अपनी युक्ति को मूर्तरूप देने के लिए वह मेमने के पास गया और गुर्राकर बोला, ‘ऐ मेमने! तू मेरे पानी को गंदा कर रहा है|’

मेमने ने कहा, ‘यह आप कैसे कह सकते है? पानी तो आपकी तरफ़ से बहकर मेरी तरफ़ आ रहा है| अतः पानी को तो आप ही गंदा कर रहे है|’

भेड़िया गुर्राया, ‘मुझ से मुहँजोरी करता है| ठहर, तुझे अभी बताता हूँ|’

‘भेड़िए मामा! आप तो नाहक ही नाराज़ हो रहे है|’ निर्भीकता से मेमना बोला|

इतना सुनना था कि भेड़िया भड़क गया और बोला, ‘अबे! तू मुझसे बहस करता है| तू तो शायद वही मेमना है, जो पिछले साल मुझे गाली देकर भाग गया था|’

‘मैं तो पिछले साल इस दुनिया में ही नही था|’ मेमने ने आश्चर्य से उसकी तरफ़ देखते हुए कहा|

‘तू नही तो तेरा बाप रहा होगा|’ कहते हुए वह मेमने पर टूट पड़ा|

तभी मेमने के परिवार वाले उसे ढूँढते हुए वहाँ आ पहुँचे| सभी उस भेड़िए पर टूट पड़े और मार-मारकर उसे वहाँ से भगा दिया|


कथा-सार

बलशाली जब अनियंत्रित हो जाता है, तब वह अपने से दुर्बल पर अत्याचार करता है| उसके लिए कोई नियम-कानून नही होता, होता भी है तो वह उसकी परवाह नही करता| भेड़िया भी कुछ इसी तरह का था, वह तो किसी भी प्रकार से मेमने का शिकार करना चाहता था|