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विशाल भारत की सांस्कृतिक विविधता ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का सन्देश देती है – ईशु – डा. जगदीश गांधी

विशाल भारत की सांस्कृतिक विविधता ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का सन्देश देती है - ईशु - डा. जगदीश गांधी

(1) सांस्कृतिक विविधता हमारी अन्तर्राष्ट्रीय धरोहर है :- संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा संवाद और विकास के लिए सांस्कृतिक विविधता का विश्व दिवस प्रतिवर्ष 21 मई को मनाने की घोषणा की गयी है। यह दिवस मानव जाति को सांस्कृतिक विविधता के विकास के लिए आपस में संवाद स्थापित के लिए प्रेरित करता है। यह दिवस जन समुदाय तथा उसके लीडर्स को सांस्कृतिक विविधता से होने वाले लाभों के बारे में शिक्षित करने का सुअवसर प्रदान करता है। सांस्कृतिक विविधता संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रमुख लक्ष्यों में से एक है। यह दिवस सांस्कृतिक विविधता के लिए विश्व के सभी देशों को प्रेरित करता है। यह दिवस महज एक दिन मनाने का दिवस नही है। यह दिवस इस बात के चिन्तन मनन का दिन है कि हम कैसे अपनी वसुंधरा को एक कुटुम्ब की तरह बना सकते हैं। इस दिशा में हम सभी विश्ववासियों को मिल-जुलकर हर दिन विश्व एकता के लिए यथा शक्ति कुछ न कुछ करते रहना चाहिए।

(2) हमारी सांस्कृतिक विविधता मानव जाति की साझा विरासत है :-सारी दुनिया में यह दिवस विश्व भर में प्रचलित संस्कृतियों के मध्य सामंजस्य स्थापित करने के लिए मनाया जाता है। साथ ही यह दिवस शांति और सतत् विकास के लिए अवसर प्रदान करता है। सांस्कृतिक वस्तुओं और सेवाओं की सबसे बड़ी ताकत उनकी दोहरी, आर्थिक और सांस्कृतिक प्रकृति में निहित है। इस विशिष्टता विकास के आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय आयामों को संबोधित करने में सक्षम अधिक एकीकृत नीतियों के लिए बढ़ती मांग के लिए एक प्रतिक्रिया प्रदान करता है। संस्कृति किसी भी अन्य की तरह एक वस्तु नहीं है और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर 2005 में अपनाया सांस्कृतिक अभिव्यक्ति की विविधता के संरक्षण और संवर्धन पर यूनेस्को कन्वेंशन द्वारा मान्यता प्राप्त है जो इस सिद्धांत, अधिक अभिनव और सतत विकास के लिए एक मार्गदर्शक सिद्धांत है।

(3) संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा दिसंबर 2013 में पारित प्रस्ताव के अनुसार यह दिवस मनाया जाता है। समस्त मानव जाति के लिए यह सांस्कृतिक विविधता की क्षमता जुटाने के लिए एक विश्वव्यापी निमंत्रण है। यह विविधता गरीबी से लड़ने और लिंग समानता, गुणवत्ता शिक्षा और मानव अधिकारों को बढ़ावा देने सहित, विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एक बहुमूल्य संसाधन है। हमें पूरी तरह से सतत विकास के लिए वैश्विक रणनीति में एकीकृत होना चाहिए। यूनेस्को और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) द्वारा संयुक्त रूप से प्रकाशित संयुक्त राष्ट्र रचनात्मक अर्थव्यवस्था रिपोर्ट 2013 के अनुसार रचनात्मक अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में से एक है। इस रिपोर्ट के अनुसार संसाधनों के मामले में हमने एक नए युग में प्रवेश किया है और हमारी प्रतिक्रिया हमारे सबसे शक्तिशाली अक्षय संसाधन, मानव बुद्धि और रचनात्मकता को दिलाने के लिए किया जाना चाहिए। हमारी सांस्कृतिक विविधता रचनात्मकता की एक प्रेरणा शक्ति है। इस रचनात्मकता के माध्यम से हम समाज को बदल सकते हैं। यह हमारी दुनिया की विविधता को बनाए रखने के लिए युवा लोगों में शिक्षा और सांस्कृतिक कौशल विकसित करने के लिए और परिवर्तन लाने के लिए हमारी भाषाओं, संस्कृतियों और धर्मों की विविधता में एक साथ जीना सीखना हमारी जिम्मेदारी है।

(4) सी0एम0एस0 द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित किये जाने वाले 30 अन्तर्राष्ट्रीय शैक्षिक कार्यक्रमों में देश-विदेश से पधारे प्रतिभागी छात्रों के साथ प्रतिस्पर्द्धा करने के लिए सी0एम0एस0 के छात्र अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की तैयारी करते हैं। इस प्रकार सी0एम0एस0 के सभी शाखाओं के छात्रों में चुनी जाने वाली टीम में शामिल होने की होड़ लग जाती है, जिससे सी0एम0एस0 का लगभग प्रत्येक छात्र लाभान्वित होता है। इस प्रकार सी0एम0एस0 में वर्ष भर विभिन्न विषयों की जोरदार तैयारी का शैक्षिक वातावरण भी निर्मित होता है।

(5) विदेशों से तथा भारत के विभिन्न प्रदेशों से आये छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा का विचार छात्रों में एक नयी उमंग भर देता है। इन अंतर्राष्ट्रीय समारोहों में प्रतिभाग हेतु विश्व के अनेक देशों से आने वाले सभी प्रतिभागियों को सी0एम0एस0 के आदर्श वाक्य ‘जय जगत’ एवं भारत की संस्कृति और सभ्यता के साथ ही ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की विचारधारा से भी परिचित कराया जाता है। इस प्रकार इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से यह एक ऐसा अद्भुत मंच बन जाता है जिसमें विश्व के अनेक देशों की संस्कृति और सभ्यता के साथ ही भारत की संस्कृति एवं सभ्यता का समागम भी होता है जो छात्रों के लिये अनुपम उपलब्धि का अवसर प्रदान करता है। वास्तव में इस प्रकार के कार्यक्रम छात्रों के मन मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव डालते हैं और इस विचार को दृढ़ करते है कि मानवता एक है, ईश्वर एक है, विश्व एक है और यह पृथ्वी तथा प्रकृति सभी का पोषण समान रूप से करती है। ऐसे विचार भविष्य में ‘विश्व एकता’ तथा ‘विश्व शांति’ के उद्देश्य में सहायक होंगे।

(6) इन अन्तर्राष्ट्रीय आयोजनों में भाग लेने के लिये कोई प्रवेश शुल्क नहीं लिया जाता। साथ ही इन आयोजनों में प्रतिभाग करने वाले लखनऊ नगर के बाहर से आये छात्रों और उनके साथ आने वाले शिक्षकों को भोजन, ठहरने, नगर भ्रमण आदि की सुविधायें भी निःशुल्क उपलब्ध करायी जाती हैं। ऐसे आयोजनों से एक अन्तर्राष्ट्रीय मंच तो उपलब्ध होता ही है साथ ही आत्मविश्वास एवं विभिन्न विषयों का सर्वोच्च विश्व स्तरीय ज्ञान तथा बुद्धिमत्ता से लबालब छात्र अनेक राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार तथा स्कॉलरशिप जीतने का कीर्तिमान बना रहे हैं। इन सभी 30 अन्तर्राष्ट्रीय आयोजनों में से कुछ का विवरण इस प्रकार है :-

(7) सिटी मोन्टेसरी स्कूल, गोमती नगर शाखा विगत कई वर्षों से सारे विश्व में शान्ति, एकता, सौहार्द व भाईचारा कायम करने के उद्देश्य से कॉमनवेल्थ दिवस का आयोजन कर रहा है। कॉमनवेल्थ महोत्सव छात्रों को एक वृहत विश्व परिवार से जोड़ने का अवसर प्रदान करता है। कॉमनवेल्थ दिवस भारत की प्राचीन संस्कृति के आदर्श वसुधैव कुटुम्बकम् को बल प्रदान कराने तथा समस्त मानव जाति को एक विश्व परिवार के सदस्य होने की अनुभूति कराने के उद्देश्य से क्रियेटिव राइटिंग एवं पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिताओं का आयोजन करता है जिसमें विश्व भर से छात्र अपनी एण्ट्रीज भेजते हैं। कॉमनवेल्थ दिवस कॉमनवेल्थ के सदस्य 54 देशों को जो पहले ब्रिटिश राज्य के अंग थे, को एक सहयोगिता की कड़ी से जोड़ता है।

(8) इण्टरनेशनल कान्फ्रेंस ऑन प्रमोटिंग इन्टरफेथ डिस्कोर्स इन मल्टी-रिलीजियस कम्यूनिटी :- विश्व पटल पर आज विभिन्न धर्मो के आपसी टकराव की संभावनाएं बढ़ती ही जा रही है और ऐसे वातावरण में आज सकारात्मक आदान-प्रदान व सहयोग की अत्यन्त आवश्यकता है। वास्तव में सम्पूर्ण विश्व में धार्मिक एकता की जितनी जरूरत आज महसूस की जा रही है, उतनी पहले कभी नहीं रही। आज जहाँ प्रत्येक देश में, शहर में, मोहल्ले में अलग-अलग धर्मों के अनुयाई एक साथ रहते हों तो ऐसे में विभिन्न धर्मावलम्बियों के मिल जुल कर बैठक करने व विचारों के आदान-प्रदान की आवश्यकता बहुत बढ़ जाती है और इसका महत्व भी बढ़ जाता है। अतः सी0एम0एस0 द्वारा आयोजित किये जाने वाले इस अंतर्राष्ट्रीय समारोह का मकसद विभिन्न धर्मों का सैद्धान्तिक व व्यावहारिक दृष्टियों से अध्ययन करना एवं विभिन्न धर्मानुयाइयों के सहयोग व सकारात्मक मान्यताओं के माध्यम से विश्व एकता व विश्व शांति की स्थापना सुनिश्चित करना है। इस सम्मेलन में विभिन्न धर्मों के देश-विदेश के प्रतिनिधि भाग लेते हैं।

(9) चिल्ड्रेन्स इण्टरनेशनल समर विलेज (सी.आई.एस.वी.) कैम्प :- जाति, रंग, नस्ल, राष्ट्रीयता और भाषाओं के आधार पर होने वाले भेद को समाप्त कर पूरे विश्व में ‘जय जगत’ की स्थापना करने के उद्देश्य से सी0एम0एस0 के निरीक्षण विभाग के द्वारा इस अन्तर्राष्ट्रीय बाल शिविर का आयोजन प्रत्येक वर्ष किया जाता है। इस अंतर्राष्ट्रीय समर विलेज कैम्प के माध्यम से विश्व के कई देशों के 11 से 12 वर्ष आयु के बच्चों को एक स्थान पर 4 सप्ताह के लिए साथ-साथ इकट्ठा रखा जाता है। इसमें प्रतिभाग करने वाले प्रत्येक डेलीगेशन में 2 लड़के, 2 लड़कियाँ और एक वयस्क लीडर होता है। इससे विभिन्न संस्कृति, भाषा, सभ्यता, रीति-रिवाज में पले-बढ़े बच्चों के कोमल हृदय में आपसी भाईचारा, विश्व शांति तथा विश्व बन्धुत्व की भावना का समावेश होता है ताकि विश्वव्यापी दृष्टिकोण से परिपूर्ण ये बच्चे बड़े होकर मानव निर्मित सीमाओं से ऊपर उठकर एक विश्व की परिकल्पना को साकार करने में निश्चित ही सार्थक भूमिका निभाये। इंग्लैण्ड की चिन्ड्रेन्स इन्टरनेशनल समर विलेज संस्था (सी0आई0एस0वी0) पूरे विश्व के अलग-अलग देशों में इस तरह के बाल शिविरों का आयोजन करती रहती हैं। जिसमें सिटी मोन्टेसरी स्कूल के बच्चे विभिन्न देशों में आयोजित इस अन्तर्राष्ट्रीय बाल शिविरों में भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं। सिटी मोन्टेसरी स्कूल द्वारा आयोजित इस शिविर में भारत के बच्चों के अतिरिक्त यूरोप और अमेरिका के 10-12 देशों के बच्चे भाग लेते हैं।

(10) अन्तर्राष्ट्रीय साँस्कृतिक-साहित्यिक महोत्सव ‘यूरेका’ इण्टरनेशनल :- अन्तर्राष्ट्रीय साँस्कृतिक-साहित्यिक महोत्सव ‘‘यूरेका’’ छात्रों के लिए एक ऐसा विश्व मंच है जिसके माध्यम से देश-विदेश के छात्र एकता के सूत्र में बंधते हैं। प्राइमरी एवं जूनियर हाई स्कूल कक्षाओं के छोटे छात्रों के लिये आयोजित यह अनूठा अन्तर्राष्ट्रीय कार्यक्रम है जिसमें विश्व के कई देशों के साथ ही भारत के कई प्रान्तों से आये हुए छात्र भाग लेते हैं। इस प्रकार सी0एम0एस0 आनन्द नगर शाखा द्वारा इस समारोह को आयोजित करने का उद्देश्य अन्तर्राष्ट्रीय संस्कृति व संगीत के माध्यम से विश्व के भावी एवं युवा पीढ़ी की बहुमुखी प्रतिभा के विकास के साथ ही उनके मानवीय एवं आध्यात्मिक दृष्टिकोण को विकसित करना और पर्यावरण के प्रति जागरुकता पैदा करना है। इस प्रतियोगिता में छात्रों को आम जिन्दगी की किसी एक वस्तु को लेकर उसमें कुछ नया परिवर्तन करके ऐसे प्रस्तुत करना होता है जिससे वह मनुष्य की जीवन शैली ही बदल दे और मानवजाति के लिए एक क्रान्ति आ जाए। इस अन्तर्राष्ट्रीय समारोह में छात्रों की बहुमुखी प्रतिभा को निखारने के उद्देश्य से नृत्य, संगीत, कला, पर्यावरण, निबन्ध लेखन आदि प्रतियोगिताओं के आयोजन किये जाते हैं। यह अंतर्राष्ट्रीय समारोह बच्चों के स्वयं की प्रतिभा को निखारने का एक सशक्त माध्यम है।

(11) अन्तर्राष्ट्रीय संगीत महोत्सव ‘सेलेस्टा’ :- संगीत आत्मा का भोजन है। सुमधुर एवं आध्यात्मिक संगीत मन को सुन्दर, शान्त एवं सरस बनाने के साथ ही आत्मा की शक्तियों को बढ़ाता भी है। यह बालकों की ज्ञान वृद्धि में सहायक होने के साथ ही साथ जीवन के कठिन क्षणों में भी सभी को समस्याओं से लड़ने की शक्ति भी प्रदान करता है। संगीत के माध्यम से बच्चों में भक्ति, सरसता, करूणा एवं शान्ति की भावना संचारित होती है जो छात्रों के चिन्तन में एकाग्रता एवं बुद्धि में कुशाग्रता लाने में सहायक होती है। इस प्रकार सी0एम0एस0 की अलीगंज सेक्टर ‘ओ’ शाखा द्वारा इस संगीत, नृत्य, गायन, लोक नृत्य, नाट्य कला पेंटिंग, कोरियोग्राफी आदि के सांस्कृतिक महोत्सव को आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य कलाओं के माध्यम से भावी एवं युवा पीढ़ी की बहुमुखी प्रतिभा के विकास के साथ ही उनके मानवीय एवं आध्यात्मिक दृष्टिकोण को विकसित करना है। अन्तर्राष्ट्रीय संगीत महोत्सव ‘सेलेस्टा’ जीवन के सौन्दर्य का उत्सव है और इस अन्तर्राष्ट्रीय संगीत महोत्सव में देश-विदेश के छात्र धरती और संस्कृति की विभिन्नताओं में एकता का विशेष प्रदर्शन करते हैं। सेलेस्टा बाल एवं युवा प्रतिभाओं को स्वस्थ गायन एवं नृत्य आदि विभिन्न कलाओं का एक अन्तर्राष्ट्रीय मंच प्रदान करता है तथापि यह संगीत महोत्सव देश-विदेश के भावी कलाकारों को विभिन्न प्रतियोगिताओं के माध्यम से अपनी प्रतिभाओं को विकसित करने का एक सुअवसर भी प्रदान करता है।

(12) भारतवर्ष अनेकता में एकता से ओतप्रोत लघु विश्व का स्वरूप है – भारत एक विविधतापूर्ण देश है। धार्मिक, राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक, आर्थिक तथा भौगोलिक आदि विविध दृष्टियों से भारत में भी अनेकता दृष्टिगोचर होती है। यहाँ कुछ प्रदेश ध्रुव प्रदेश के समान ठण्डे हैं तो कुछ प्रदेश अफ्रीकी रेगिस्तानों जैसे गर्म एवं शुष्क है, कहीं वर्षा की अधिकता है, तो कहीं लोग वर्षा की बूँद-बूँद को भी तरस जाते हैं। कहीं आकाश छूते पहाड़ हैं, तो कहीं समतल मैदान, कहीं रेगिस्तान हैं, तो कहीं हरी-भरी उपजाऊ भूमि। यहाँ विविध धर्मों, सम्प्रदायों, जातियों एवं धार्मिक आस्थाओं के लोग रहते हैं। अनगिनत भाषाएँ बोली जाती हैं। हर प्रदेश का अपना-विशिष्ट भोजन, रहन-सहन व रीति-रिवाज है। किन्तु बाह्य रूप से दिखलाई देने वाली इस अनेकता के मूल में एकता ही निहित है। भारत विश्व का सबसे महत्त्वपूर्ण धर्मनिरपेक्ष प्रजातान्त्रिक राष्ट्र है। हमारे देश में अनेक राज्य हैं तथा उत्तर में कश्मीर से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी तक इसका विस्तृत भू-भाग है। हम यह कह सकते हैं कि राष्ट्र रूपी शरीर के विभिन्न अंग हमारे अलग-अलग प्रदेश हैं तथा शरीर को पूर्णरूपेण स्वस्थ रखने के लिए सभी अंगों का स्वस्थ तथा सुदृढ़ होना आवश्यक है। भारत एक लघु विश्व का स्वरूप धारण किये हुए हैं। भारत की सांस्कृतिक विविधता ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का सन्देश देती है अर्थात सारी वसुधा एक विश्व परिवार है।

डा. जगदीश गांधी

डा. जगदीश गांधी

– डा. जगदीश गांधी, शिक्षाविद् एवं
संस्थापक-प्रबन्धक, सिटी मोन्टेसरी स्कूल, लखनऊ

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