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क्या है इस साल की होली में, होलिका दहन का शुभ मुहुर्त

क्या है इस साल की होली में, होलिका दहन का शुभ मुहुर्त

होली की पूर्व संध्या में होलिका दहन किया जाता है। इसके पीछे प्राचीन कथा है कि असुर हिरण्यकश्यप भगवान विष्णु से घोर शत्रुता रखता था। स्वयं को उसने ईश्वर कहना शुरू कर दिया था। वहीं दूसरी ओर प्रह्लाद जो कि हिरण्यकश्यप का पुत्र था वो भगवान विष्णु का बहुत बड़ा भक्त था ओर पिता के लाख कहने पर भी प्रह्लाद ने भगवान विष्णु की भक्ति नहीं छोड़ी। हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र को मारने कि बहुत कोशिश की और अंत में उसने अपनी बेहेन जिसका नाम होलिका था। होलिका को भगवान शिव ने एक चादर दी थी जिसे अगर ओड ले तो अग्नि उसे कभी भस्म नहीं के सकती। एक दिन होलिका ने चादर ओड कर और प्रह्लाद अपनी गोद में बैठा के अग्नि में बैठ गई परूंत प्रह्लाद को किसी प्रकार की कोई हानि नहीं हुई उसे विष्णु भक्ति ने बचा लिया था और बुरे इरादों से होलिका भस्म हो गई। और इस दिन को होलिका दहन के नाम से जाना जाता है। जहां हमे बुराई पर अच्छाई की जीत देखने मिलती है।

हिन्दू धार्मिक ग्रंथो के अनुसार, होलिका दहन जिसे होलिका दीपक और छोटी होली के नाम से भी जाना जाता है। होलिका दहन सूर्यास्त के पश्चात प्रदोष के समय, पूर्णिमा तिथि मे ही करना चाहिए।

होली के त्योहार से ठीक एक रात पहले होलिका दहन मनाया जाता है। होलिका की पवित्र अग्नि में लोग जौ कि बाले और शरीर पर लगाया उबटन डालते है। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में खुशहाली आती है, और बुरी नजर का प्रभाव दूर होता है। इस साल 20 मार्च को होलिका दहन है और 21 मार्च को होली मनाई जाएगी। होलिका दहन का फल शुभ मुहूर्त में ही करने पर मिलता है।

इस बार होलिका दहन का मुहूर्त शाम 20:58 स 24:23 मिनट तक है यानी इसकी अवधि 3 घंटे 25 मिनट की है। होलिका से जोड़ी अलग अलग परंपरा है। कहीं कहीं होलिका की आग घर ले जाई जाती है और उस आग से रोटी बनाना शुभ माना जाता है।

 

तेजस्वनी पटेल, पत्रकार (+91 9340619119)

– तेजस्वनी पटेल, पत्रकार
(+91 9340619119)

 

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