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श्री गुरु अर्जुन देव जी का धीरज – साखी श्री गुरु अर्जन देव जी

श्री गुरु अर्जुन देव जी का धीरज

श्री गुरु रामदास जी की तेरहवी वाले दिन सभी सम्बन्धी इकट्ठे हो गए| वे श्री अर्जुन देव जी को पगड़ी बांधना चाहते थे| प्रिथी चन्द जी एकदम क्रोधित हो गए|

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वे कहने लगे कि पगड़ी बांधने का हक तो मेरा है, मैं बड़ा लड़का हूँ| बाबा बुड्ढा जी कुछ बुद्धिमान सिक्ख व बाबा मोहरी जी आदि सम्बन्धी श्री गुरु अर्जुन देव जी को ही पगड़ी बांधना चाहते थे| श्री गुरु रामदास जी की आज्ञानुसार यह हक श्री (गुरु) अर्जुन देव जी का ही था| श्री अर्जन देव जी की विशालता की सीमा न रही जब उन्होंने पगड़ी पकड़कर प्रिथी चन्द जी को दे दी| आपने साथ ही साथ यह भी कहा कि आप बड़े भाई हो| मैं तो आप का दास हूं| पगड़ी आप ही बांधो| इसके हकदार आप ही है|

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