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रोज़ाना के स्वास्थ्य वादे : विपत्ति के क्षणों में

रोज़ाना के स्वास्थ्य वादे : विपत्ति के क्षणों में

हम सब की ज़िन्दगी में कई बार ऐसा पल आता है जब हम सुबह को उठते है व् यह महसूस करते है की मेरे जीवन में वो सब ऐसे नहीं हो रहा है जैसे मैंने सोचा था, ऐसे पल में हमें जरुरत हो खुद को साकारत्मक दृष्टिकोण अपनाने की व खुद को यह अहसास दिलाने की जो भी हमारे पास है वो उत्तम है। बहुत बढ़िया है हमें हर हर हालत में खुश रहना आना चाहिए। ऐसे में जरुरत है कुछ मंत्रो को अपने दिमाग में बसाने की ऐसे ही 13 मंत्र है जो आपके दिमाग को शान्त करेंगे व् हर तरह के दुखद पलो को दूर करने में सहाई सिद्ध होंगे।

यह मंत्र आपकी मानसिक व् शारीरिक सेहत को सशक्त बनाते है तो आइये इनको खुद बी हर सुबह दोहराये व् अपने दोस्तों को भी बताये ताकि वो व् भी अपनी सेहत को मजबूत बना सके।

1हर कोई अपने आप में सुंदर है शुक्रिया हमारे व्यक्तित्व का जिसने इस संसार को अपनी सकरात्मक्ता से सूंदर बनाया हुआ है।

2मै कभी भी किसी को आज्ञा नहीं दूंगा की उसकी मेरे बारे में की गयी आलोचना मुझपे कोई प्रभाव डाले।

3मई कभी भी किसी को गहरायी से जाने बिना कोई टिप्पणी नहीं करुगा।

4मेरी काया बहुत प्रशंशनीय है क्यूंकि वो मुझे कई तरह के काम रोज़ाना करने को देती है जैसे की चलना, घूमना, बैठना, साँस लेना, बातें करना जिनको मै कभी भी अन्यथा नहीं लूंगा।

5विज्ञापन जिनको मै अक्सर अपने इर्द गिर्द देखता है इनका वास्तविकता से कोई सरोकार नहीं है क्यूंकि इनके लिए एक प्रोफेशनल की टीम होती है जो पैसे का सहारा लेकर इनको ऐसा दिखाती है जैसे यह बिलकुल भी नहीं होते।

6मुझे उन लोगो के साथ बात करने में कोई दिलचस्पी नहीं है जो हमेशा खुद की आलोचना करते रहते है बल्कि मई ऐसे लोगो के सोहबत में जाना पसंद करुगा जो खुद को उच्चा उठाने की बात करते है।

7यह मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है की मै अपने शरीर का पूरा आदर करू भाव इसको समय से भोजन दूँ, जब जरूरी हो तब काम करू, जब थकान लगे तो पूरा आराम करने दूँ।

8मुझपे कपड़े जचते है यह मेरे लिए मायने रखता है न की उनकी कीमत।

9आज मैं अपने दिमाग में उठने वाली आवाज को खामोश करुँगी जो अक्सर मुझे डराने का काम करती है मेरी हिम्मत को कम करती है।

10मेरे सच्चे दोस्त वह है जो जो हमेशा मेरी मदद करते है मेरे आस पास पॉजिटिव माहौल बनाये रखते है मई जब भी निराशा में होता हु तो मुझे उस से बाहर निकलाते है मुझे कभी भी बुरा महसूस है होने देते कभी भी मेरी आलोचना नहीं करते न ही मेरा मजाक उड़ाते है।

11मैं अपने शरीर में होने वाले बदलावों को सहर्ष स्वीकार करता हूँ व् आभार व्यक्त करता हु चाहे वो बदलाव मुझे अच्छे न भी लगे।

12मुसीबत की घडी मैं खुद को आईने के सामने रखता हु, खुद को देख कर मुस्कराता हूँ व् कहता हूँ की मैं हर तरह की मुसीबत का सामना करने के लिए बिलकुल सक्षम हूँ।

13मैं जिस के साथ काम करना चाहता हूँ कभी उसने भी तो बुरा वक़्त सहा होगा।

Munish Ahuja Founder SpiritualWorld.co.in

Munish Ahuja Founder SpiritualWorld.co.in

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