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मुखपाक के 25 घरेलु उपचार – 25 Homemade Remedies for Oris

मुंह के भीतर छाले पड़ने को ‘मुखपाक’ भी कहते हैं| यह एक ऐसा रोग है जिसके कारण रोगी को भोजन करने, बोलने तथा गाने आदि में अपार कष्ट होता है|

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वैसे तो यह सामान्य विकार है, लेकिन जब यह बड़ा रूप धारण कर लेता है तो काफी समय तक बना रहता है| इसलिए इसको दूर करने का उपाय तुरन्त करना चाहिए| यह रोग आंतों में गरमी भर जाने की वजह से होता है| वायु गरमी को लेकर जब गले की ओर बढ़ती है तो दूषित फंगस जीभ, तालू आदि पर चिपक जाता है| यही फफूंदी धीरे-धीरे छालों के रूप में बदल जाती है| इस हालत में रोगी को कुछ भी अच्छा नहीं लगता| उसके प्राण मुंह के छालों में ही अटके रहते हैं| कई बार गलत खान-पान के कारण भी यह रोग लग जाता है|

 

मुखपाक के 25 घरेलु नुस्खे इस प्रकार हैं:

1. शहद

कत्थे को महीन पीसकर उसमें थोड़ा-सा शहद मिला लें| फिर इसे छालों पर लगाएं| मुंह झुकाकर लाल नीचे की ओर टपका दें|


2. शहद

फूला हुआ सुहागा तथा शहद – दोनों को मिलाकर छालों पर लगाएं|


3. त्रिफला और गरम पानी

त्रिफला चूर्ण रातो को सोते समय गरम पानी से लेना चाहिए| इससे पेट का कब्ज ढीला पड़ेगा और सुबह मल साफ आएगा| पेट ठीक होते ही छाले अपने-आप सूख जाएंगे|


4. आंवला और गरम पानी

आंवले का चूर्ण सुबह-शाम 5-5 ग्राम की मात्रा में गरम पानी से लें|


5. ईसबगोल और पानी

रात को सोते समय एक या दो चम्मच ईसबगोल की भूसी खाकर ऊपर से पानी पी लें|


6. तुलसी और चमेली

तुलसी तथा चमेली के पत्ते चबाकर लाल नीचे टपकाने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं|


7. शहतूत और पानी

दो चम्मच शहतूत का शरबत ताजे पानी में डालकर गरारे करें|


8. टमाटर

टमाटर का रस पानी में मिलाकर उससे गरारे करें|


9. धनिया

साबुत धनिया को पीसकर चूर्ण बना लें| फिर इस चूर्ण को छालों पर बुरककर लार नीचे गिरा दें|


10. धनिया और पुदीना

हरा धनिया, सूखा धनिया तथा पुदीना – तीनों 5-5 ग्राम लेकर चटनी बना लें| इस चटनी को जीभ पर लगाकर लाल बाहर गिराते रहें| यह चटनी दिनभर में चार-पांच बार लगाएं|


11. अमरूद और पानी

अमरूद की चार-पांच मुलायम पत्तियों को एक गिलास पानी में उबालें| फिर इस पानी को छानकर कुल्ला करें| इससे मुंह की दुर्गंध भी दूर होती है|


12. सौंफ और पानी

भोजन के बाद केवल सौंफ का पानी पीने से मुंह के छाले सूख जाते हैं| इसके लिए एक गिलास पानी में दो चम्मच सौंफ डालकर औटाएं| फिर पानी को छानकर ठंडा होने के लिए रख दें| यही सौंफ का पानी प्रयोग करें|


13. अंजीर और दूध

अंजीर के पेड़ से कच्चे अंजीरों का दूध इकट्ठा करके छालों पर लगाएं|


14. जायफल

जायफल को पानी में घिसकर उंगली से जीभ तथा तालू पर लेप करें| लार बाहर निकाल दें|


15. अरहर

अरहर की हरी पत्तियों को चबाकर थूक दें| लार पेट में जाने दें| छालों को दूर करने की यह बड़ी कारगर दवा है|


16. मेहंदी और फिटकिरी

मेहंदी तथा फिटकिरी – दोनों को बराबर की मात्रा में पीसकर छालों पर लगाएं|


17. इलायची

लाल इलायची के छिलकों को सुखाकर पीस लें| फिर इस चूर्ण को पानी में भिगोकर या पानी में पेस्ट बनाकर छालों पर लगाएं|


18. करेला और पानी

करेले के रस को पानी में डालकर कुल्ला करने से छाले दूर होते हैं|


19. मसूर

मसूर की दाल को आग में भून लें| इसमें समभाग बरेली वाला सफेद कत्था मिलाएं| दोनों को पीसकर मुख में लगाएं| लार नीचे टपका दें|


20. जौ

जौ को आग में जलाकर कोयला कर लें| अब इनको पीस डालें| इसमें दो चुटकी पिसा हुआ कत्था मिलाएं| दोनों का मिश्रित चूर्ण छालों पर लगाएं|


21. गाय

छालों में गाय या भैंस का घी उंगली से लगाएं|


22. मुलहठी, नीम और मेहंदी

मुलहठी, नीम की पत्तियां तथा मेहंदी की पत्तियां पानी में उबालकर पानी छान लें| फिर इस पानी से गरारे करें|


23. आम, पीपल और पानी

आम की छाल, पीपल के पेड़ की छाल तथा बबूल की छाल लेकर पानी में औटा लें| फिर इस पानी से बार-बार कुल्ला करें|


24. बेर और पानी

बेर के पत्तों को पानी में उबालकर उससे कुल्ला करना चाहिए|


25. मौलसिरी और पानी

मौलसिरी के पेड़ की छाल को पानी में उबालकर उससे कुल्ला करें|


मुखपाक में क्या खाएं क्या नहीं

दूध, चावल, दही-रोटी, मट्ठा, साबूदाना, केला, अमरूद, सेब, सन्तरा, मौसमी आदि फल प्रतिदिन खाएं| सब्जियों में पालक, मूली, गाजर, पत्तागोभी, शलजम, लौकी, तरोई आदि इस रोग में बहुत लाभदयक हैं| रोटी को घी के बजाय मक्खन से चुपड़कर खाएं| गाय तथा बकरी का दूध रात को सोते समय अवश्य लें|

गरम पदार्थ, मिर्च-मसाले, तेल, खटाई, इमली, नीबू आदि का प्रयोग नहीं करना चाहिए| पेट में कब्ज पैदा करने वाली चीजें न खाएं| यदि कब्ज हो जाए तो सनाय का चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में रात के समय लें| तली हुई चीजें, चटपटी तथा मसालेदार पदार्थ भी नहीं खाने चाहिए| खुश्क तथा दस्त लगने वाली चीजें भी छालों में हानिकारक होती हैं| इसके अलावा चाय, शराब, बीड़ी-सिगरेट या नशा करने वाली चीजों से दूर रहें|

मुखपाक का कारण

मुंह में छाले होने का मुख्य कारण कब्ज तथा अजीर्ण है| इसके साथ ही मांस, मछली, अंडा, मिर्च, तेल, सोंठ, गरम मसालों से युक्त भोजन अधिक मात्रा में सेवन करने से मुंह में छाले उभर आते हैं| तेल तथा तेल में तले हुए पदार्थों और बहुत गरम चीजों को खाने से भी यह रोग हो जाता है| गरम पदार्थ मुख की कोमल श्लेष्मिक कला में प्रदाह उत्पन्न कर देते हैं जिससे गरमी का सीधा प्रभाव मुंह के भीतर दिखाई देने लगता है| पेट की गरमी बढ़ जाती है और पाचन-क्रिया ठीक प्रकार से नहीं हो पाती| दूसरे गरमी के कारण पेट में मल सड़ता रहता है| फिर वह गरमी वायु को ऊपर की ओर खिसकाती है जो मुंह में छाले पैदा कर देती है|

मुखपाक की पहचान

इस रोग में जीभ के किनारों, तालू तथा होंठो के भीतरी भाग में छोटी-छोटी फुंसियां पैदा हो जाती है| ये फुंसियां कभी-कभी छोटी दिखाई देती है तथा तभी बड़ी मालूम पड़ती हैं| इनमें जलन होती है| इनका रंग लाल होता है| इनमें सुई चुभने जैसी पीड़ा होती है| कभी-कभी खुजली भी होने लगती है| कई बार सारा मुख लाल पड़ने के बाद सूज जाता है| यदि रोग बढ़ जाए तो फुंसियों के पकने की नौबत आ जाती है| मुंह में सूजन आने से प्राय: कुछ भी खाना-पीना मुश्किल हो जाता है|

NOTE: इलाज के किसी भी तरीके से पहले, पाठक को अपने चिकित्सक या अन्य स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता की सलाह लेनी चाहिए।

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