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अग्निमांद्य के 18 घरेलु उपचार – 18 Homemade Remedies for Indigestion

जठराग्नि के मन्द पड़ जाने को अग्निमांद्य कहते हैं| इस रोग में आमाशय (मेदा) तथा आंतों के पचाने की शक्ति कम हो जाती है जिसके कारण खाया-पिया भोजन पिण्ड की तरह पेट में रखा रहता है|

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इसमें भूख नहीं लगती तथा पानी पीने की भी इच्छा नहीं होती| इसके प्रभाव से शरीर में विष उत्पन्न होने लगते हैं| वायु भी बढ़ने लगती है तथा कई बार मल-मूत्र तक रुक जाता है|

कभी-कभी पेट में वायु का गोला घूमने लगता है| वायु के न निकलने की हालत में उसका दबाव हृदय पर पड़ता है, इसलिए हृदय की धड़कन बढ़ जाती है| उस समय सांस लेने में भी कठिनाई होती है| घबराहट के कारण रोगी इधर-उधर देखता है ताकि उसको आराम की कोई चीज दिखाई दे जाए| रोगी को लगता है, जैसे उसे दिल का दौरा पड़ गया हो| असल में अधपचा भोजन अंतड़ियों में पड़ा सड़ने लगता है जिसकी खुश्की और वायु व्यक्ति को परेशान करती है|

 

अग्निमांद्य के 18 घरेलु नुस्खे इस प्रकार हैं:

1. पीपल और गरम पानी

दो पीपल को पीसकर चूर्ण बना लें| कुछ दिनों तक रोज रात को गरम पानी से यह चूर्ण खाएं|


2. पुदीना, जीरा, हींग और कालीमिर्च

थोड़ा-सा हरा पुदीना, आधा चम्मच भुना हुआ जीरा, 2 रत्ती हींग, थोड़ी-सी कालीमिर्च और चुटकी भर नमक-सबको पीसकर चटनी बना लें| इसमें से दो चम्मच चटनी पानी में उबालकर काढ़े की तरह पी जाएं|


3. कलमी शोरा, फिटकिरी और नौसादर

आधा चम्मच कलमी शोरा, जरा-सी पिसी हुई फिटकिरी और आधा चुटकी नौसादर – तीनों को पिघलाकर ठंडा कर लें| फिर इसकी चार खुराक करके दिनभर में चार बार सेवन करें|


4. मनुक्का, अंजीर, पानी और हरड़

चार दाने मनुक्का, दो दाने अंजीर और दो छोटी हरड़ लेकर एक कप पानी में पकाकर पी जाएं|


5. ग्वारपाठा और नौसादर

ग्वारपाठे के रस में जरा-सा नौसादर मिलाकर सेवन करें|


6. चित्रक, अजमोद, लाल इलायची, सोंठ और सेंधा नमक

चित्रक, अजमोद, लाल इलायची, सोंठ और सेंधा नमक-सब बराबर की मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें| फिर आधा चम्मच चूर्ण गर्म पानी के साथ सुब शाम सेवन करें|


7. सौंफ, अजवायन, कलौंजी और सेंधा नमक

चार चम्मच सौंफ, चार चम्मच अजवायन, दो चम्मच कलौंजी और आधा चम्मच सेंधा नमक – सबको महीन पीस लें| इनमें से आधा-आधा चम्मच चूर्ण रोज भोजन के बाद पानी से सेवन करें|


8. अदरक, लहसुन, धनिया और कालीमिर्च

एक गांठ अदरक, दो कलियां लहसुन, एक चम्मच धनिया तथा आठ-दस दाने कालीमिर्च लेकर चटनी बना लें| यह चटनी लगभग 20 दिनों तक रोज खाने के साथ खाएं| अग्निमांद्य ठीक हो जाएगा|


9. अजवायन, सौंफ और इलायची

एक चम्मच पिसी हुई अजवायन, एक चम्मच सौंफ तथा दो लाल इलायची के दाने लेकर चूर्ण बना लें| इसमें से आधा चम्मच चूर्ण प्रतिदिन भोजन के बाद सुबह-शाम सेवन करें|


10. प्याज और पुदीना

प्याज के थोड़े-से रस में पुदीने का रस मिलाकर सेवन करें| यह पेट के सभी रोगों का आजमाया हुआ नुस्खा है|


11. दही, जीरा, कालीमिर्च और काला नमक

दही में भुने हुए जीरे का चूर्ण आधा चम्मच, एक चुटकी कालीमिर्च का चूर्ण तथा एक चुटकी काला नमक डालकर भोजन के साथ सेवन करें|


12. लौंग और इलायची

चार लौंग तथा एक लाल इलायची का काढ़ा बनाकर नित्य भोजन के बाद पिएं|


13. लौंग और हरड़

चार-पांच लौंग और एक हरड़ को दो कप पानी में उबालें| जब पानी एक कप की मात्रा में रह जाए तो उसमें जरा-सा काला नमक डालकर पी जाएं| यह काढ़ा पेट का दर्द, अग्निमांद्य तथा अजीर्ण के लिए बहुत लाभकारी है|


14. मूली, कालीमिर्च और सेंधा नमक

मूली के दो चम्मच रस में दो कालीमिर्च का चूर्ण तथा जरा-सा सेंधा नमक मिलाकर सेवन करें|


15. पपीता और बताशा

आधा चम्मच कच्चे पपीते के दूध को बताशे में रखकर खा जाएं|


16. पानी और जीरा

पानी में दो चम्मच जीरा डालकर उबालें| जब पानी आधा रह जाए तो उसे पी जाएं|


17. नीम, तुलसी, कालीमिर्च और लौंग

चार-पांच नीम की पत्तियां, चार तुलसी की पत्तियां, चार दाने कालीमिर्च तथा चार दाने लौंग – सबको पीसकर चटनी बना लें| इसमें से 4 ग्राम चटनी नित्य भोजन के बाद खाकर पानी पी लें|


18. प्याज, कालीमिर्च और सेंधा नमक

प्याज के रस में कालीमिर्च तथा सेंधा नमक डालकर पीने से रोगी को काफी लाभ होता है|


अग्निमांद्य में क्या खाएं क्या नहीं

हाजमा खराब होने पर कोई भी खाद्य पदार्थ आसानी से नहीं पचता| आंतों को अधिक मेहनत न करनी पड़े, अत: हल्का तथा पाचक भोजन करना चाहिए| दालों में मूंग की दाल खाई जा सकती है क्योंकि यह हल्की होने के कारण कमजोर पाचन क्रिया द्वारा आसानी से पच जाती है| साथ ही रोटी या चपाती के साथ लौकी, तरोई, परवल आदि की उबली हुई सब्जियां खाएं| रात को सोने से पहले ईसबगोल की भूसी दूध के साथ लें| दो-तीन मुनक्के तवे पर भूनकर जरा-से काले नमक के साथ भी ले सकते हैं|

सुबह खाली पेट एक चम्मच अदरक का रस शहद चाटें| शराब, भांग, सिगरेट, बीड़ी या कोई अन्य मादक पदार्थ जैसे चाय, कॉफी आदि का सेवन न करें| चाय पीनी हो तो गुरुकुल कांगड़ी की चाय का सेवन करें| पूड़ी, कचौड़ी, पकौड़े, खोए के पदार्थ, तली हुई चीजें, समोसे, बंगाली मिठाई आदि का सेवन न करें| सुबह शौच जाने के बाद कम से कम दो कि.मी. टहलने का कार्यक्रम बनाएं या फिर हाथ-पैर की कोई कसरत करें| कड़वे, तीखे या कषाय रस वाले पदार्थ बिलकुल न खाएं| भोजन में हींग, काला नमक, कालीमिर्च, लाल इलायची, सेंधा नमक आदि के आलावा किसी अन्य प्रकार के मसाले का प्रयोग न करें| मन को शान्त रखें तथा क्रोध से बचें|

अग्निमांद्य का कारण

हम जो कुछ खाते हैं, वह आमाशय में पहुँचता है| लेकिन शोक, क्रोध, चिन्ता, भय, ईर्ष्या, पाखाना-पेशाब रोकने, दिन में आधिक सोने, रात में देर तक जागने, बासी तथा गरिष्ठ भोजन करने, शराब, सिगरेट आदि पीने के कारण यह रोग हो जाता है| यही विकार भोजन को दूषित कर देता है| अत: भोजन की प्राकृतिक पाचन क्रिया धीमी पड़ जाती है|

अग्निमांद्य की पहचान

अग्निमांद्य होने पर पेट भारी हो जाती है| वायु बार-बार ऊपर चढ़ती है| इसलिए डकारें आती हैं| पाखाना-पेशाब साफ नहीं आता| बार-बार हाजत लगती है| इसलिए कई बार शौच को जाना पड़ता है| वायु आंतों में रिक्त स्थान करके भर जाती है जिस कारण पेट में दर्द होता है और गुड़गुड़ होती रहती है| पेट फूल जाता है तथा बड़ी बेचैनी होती है| पेट के भारी होने से वायु जब मस्तिष्क की ओर बढ़ने लगती है तो सिर में दर्द होता है| काम में मन नहीं लगता| श्वास फूलने लगता है| शरीर में कमजोरी आ जाती है| चूंकि वायु दिल पर दबाव डालती है, इसलिए दिल भी तेजी से धड़कने लगता है| रोगी हर दृष्टि से चाहता है कि उसको आराम मिले|

NOTE: इलाज के किसी भी तरीके से पहले, पाठक को अपने चिकित्सक या अन्य स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता की सलाह लेनी चाहिए।

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