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सुकन्या का विवाह

“सुकन्या! जंगल में सतर्क रहना| तुम ऐसी चीजें देखोगी और ऐसी समस्याओं से तुम्हारा सामना होगा, जिन्हें तुमने कभी देखा न होगा|” राजा शर्याति ने राजकुमारी सुकन्या को अंतिम सीख दी| सुकन्या सहेलियों के साथ जंगल में एक स्थान पर चली गयी|

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दीमकों की बांबी में उसने दो चमकदार चीजें देखीं| दो तीखे काँटे लेकर उन्हें निकालने के लिए सुकन्या ने उसे छेड़ डाला| किन्तु एक चीख निकली और उसमें से अति वृद्ध महर्षि च्यवन निकले, जिनकी आँखों से रक्त प्रवाहित हो रहा था| वे महिनो से ध्यानमग्न थे और उनके चारो ओर दीमकों ने बाँबी बना लिया था|

सभी राजकर्मचारी वहाँ एकत्रित हो गये| राजा को सूचना दी गयी| दयावान महर्षि ने राजकुमारी को क्षमा कर दिया| किन्तु वे असमर्थ थे| सुकन्या दोषी थी| उसने घोषणा की, ” मै महर्षि से विवाह कर उनकी सेवा करुँगी|” उसके पिता ने स्वीकृति दी|

सभी ही विवाह की तैयारी पूरी हो गयी और एक सादे उत्त्त्सव में सुकन्या का विवाह वृद्ध और अंधे महर्षि से हो गया| शेष सभी वापस आ गये| सुकन्या महर्षि के पास रह गयी|

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