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सूअर का पीछा और जीवन-दान

सूअर का पीछा और जीवन-दान

उपवन की दशा देखकर राजा हरिश्चंद्र को क्रोध आ गया| उन्होंने सूअर को ललकारा तो सूअर छोड़कर भाग खड़ा हुआ|

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राजा हरिश्चंद्र ने उसका पीछा किया| पीछा करते-करते वह सूअर राजा हरिश्चंद्र को एक भयानक वन में ले गया| राजा के साथ आये सैनिक काफी पीछे छुट गए|

घनघोर जंगल में राजा ने सूअर को घेर लिया और जैसे ही उस पर बाण छोड़ने लगे, वह सूअर मनुष्य की बोली में बोला, “राजन! मैं जंगली जानवर हूं| मुझमें बुद्धि-विवेक नहीं है| मैनें जो किया, वह मेरा स्वभाव है, अपराध नहीं| आप तो राजा हैं| न्यायप्रिय हैं| बुद्धिमान हैं| आप मुझे मेरे प्राणों की भीख दीजिये|”

“ठीक है, तुम जाओ| मै तुम्हारा वध नहीं करूँगा|” राजा ने उसे छोड़ दिया|

दुसरे ही पल वह सूअर अन्तर्धान हो गया|

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