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शिकारी और कबूतर

शिकारी और कबूतर

एक वृक्ष पर बहुत से कबूतर रहते थे| एक दिन प्रातःकाल कबूतर भोजन की तलाश में उड़े| उड़ते-उड़ते उनकी दृष्टि एक जगह बिखरे हुए दानों पर पड़ी|

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वहाँ एक शिकारी ने जाल फैला रखा था और उस पर चावल बिखेर रखे थे| कबूतरों के राजा को शंका हुई| उसने सोचा- “यहाँ सुनसान जंगल में यह दाने कहाँ से आये| अवश्य ही दाल में कुछ काला है| खैर, देखा जायेगा”| ऐसा विचार करके वे नीचे उतरे| सभी कबूतर दाने चुगने लगे और जाल में फँस गये|

सब कबूतर घबरा गये| वे अपने राजा को बुरा-भला कहने लगे| उनके राजा ने कहा, “भाइयों, संकट में घबराना नहीं चाहिए, हिम्मत रखो|” कबूतरों के राजा ने कहा- “ सभी कबूतर जाल सहित इकट्ठे उड़ो”| सभी कबूतरों ने ऐसा ही किया| सब कबूतर आकाश में जाल सहित उड़े जा रहे थे शिकारी उनके पीछे-पीछे धरती पर भागा जा रहा था और कहता जा रहा था- “पक्षी गिरेंगे, मेरा शिकार बनेंगे|” परंतु कबूतर उड़ते-उड़ते शिकारी की आँखों से ओझल हो गये| शिकारी हाथ मलता रह गया|

शिक्षा- एकता में बल होता है|

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