🙏 जीवन में कुछ पाना है तो झुकना होगा, कुएं में उतरने वाली बाल्टी झुकती है, तब ही पानी लेकर आती है| 🙏
Homeशिक्षाप्रद कथाएँसेवा का आदर्श

सेवा का आदर्श

एक बार युधिष्ठिर ने राजसूर्य यज्ञ करवाया| बहुत-से लोगों को आमंत्रित किया| भगवान श्रीकृष्ण भी आए| उन्होंने युधिष्ठिर से कहा – “सब लोग काम कर रहे हैं| मुझे भी कोई काम दे दीजिए|”

“सेवा का आदर्श” सुनने के लिए Play Button क्लिक करें | Listen Audio

युधिष्ठिर ने उनकी ओर देखकर कहा – “आपके लिए हमारे पास कोई काम नहीं है|”

श्रीकृष्ण बोले – “लेकिन मैं बेकार नहीं रहना चाहता| मुझे कुछ-न-कुछ काम तो दे ही दीजिए|”

युधिष्ठिर ने कहा – “मेरे पास तो कोई काम है नहीं| यदि आपको कुछ करना ही हो तो अपना काम आप स्वयं तलाश कर लीजिए|”

श्रीकृष्ण बोले – “ठीक है मैंने अपना काम खोज लिया|”

युधिष्ठिर ने उत्सुकता से पूछा – “क्या काम खोज लिया?”

कृष्ण ने कहा – “मैं सबकी जूठी पत्तलें उठाऊंगा और सफाई करूंगा|” यह सुनकर युधिष्ठिर अवाक् रह गए| कृष्ण ने वही किया| सेवा से बढ़कर और क्या हो सकता है|

NO COMMENTS

LEAVE A COMMENT

🙏 ♻ प्रयास करें कि जब हम आये थे उसकी तुलना में पृथ्वी को एक बेहतर स्थान के रूप में छोड़ कर जाएं। सागर में हर एक बूँद मायने रखती है। ♻ 🙏