🙏 जीवन में कुछ पाना है तो झुकना होगा, कुएं में उतरने वाली बाल्टी झुकती है, तब ही पानी लेकर आती है| 🙏
Homeशिक्षाप्रद कथाएँकिसान और सारस

किसान और सारस

किसान और सारस

एक किसान चिडियों से तंग आ गया था| उसका खेत जंगल के पास था| उस जंगल में पक्षी बहुत थे|

“किसान और सारस” सुनने के लिए Play Button क्लिक करें | Listen Audio

किसान जैसे ही खेत में बीज बोकर, पाटा चलाकर घर जाता, वैसे ही झुंड-के-झुंड पक्षी उसके खेत में आकर बैठ जाते और मिट्टी कुरेद-कुरेदकर बोये बीज खाने लगते| किसान पक्षियों को उड़ाते-उड़ाते थक गया| उसके बहुत-से बीज चिडियों ने खा लिये| बेचारे को दुबारा खेत जोतकर दूसरे बीज डालने पड़े|

इस बार किसान एक बहुत बड़ा जाल ले आया| उसने पूरे खेत पर जाल बिछा दिया| बहुत-से पक्षी खेत में बीज चुगने गये और जाल में फँस गये| एक सारस पक्षी भी उस जाल में फँस गया|

जब किसान जाल में फँसी चिडियों को पकड़ने लगा तो सारस ने कहा-‘आप मुझपर कृपा कीजिये| मैंने आपकी कोई हानि नहीं की है| मैं न मुर्गी हूँ, न बगुला और न बीज खानेवाला कोई और पक्षी| मैं तो सारस हूँ| खेती को हानि पहुँचाने वाले कीड़ों को मैं खा जाता हूँ| मुझे छोड़ दीजिये|’

किसान क्रोध में भरा था| वह बोला-‘तुम कहते तो ठीक हो, किंतु आज तुम उन्हीं चिडियों के साथ पकड़े गये हो, जो मेरे बीज खा जाया करती हैं| तुम भी उन्हीं के साथ हो| तुम इनके साथ आये हो तो इनके साथ दण्ड भी भोगो|’

जो जैसे लोगों के साथ रहता है, वह वैसा ही समझा जाता है| बुरे लोगों के साथ रहने वालों को भी दण्ड और अपयश मिलता है| उपद्रवी चिडियों के साथ आने से सारस को भी बंधन में पड़ना पड़ा|

NO COMMENTS

LEAVE A COMMENT

🙏 ♻ प्रयास करें कि जब हम आये थे उसकी तुलना में पृथ्वी को एक बेहतर स्थान के रूप में छोड़ कर जाएं। सागर में हर एक बूँद मायने रखती है। ♻ 🙏