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जलपरी

जलपरी

शीला और मीरा अपने स्कूल के साथियों के साथ एक सुंदर टापू पर पिकनिक मनाने गयीं| उस टापू पर एक बूढ़ा उन्हें घूरता दिखायी दिया|

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उसे देखने की उत्सुकता से शीला और मीरा निकल पड़ी| एक वीरान स्थान पर उन्होंने एक जलपरी को बैठे देखा| शीला और मीरा दबे पाँव जलपरी के पास पहुँच गयी, लेकिन मीरा का पैर एक पत्थर से टकरा गया जिस कारण वह गिर पड़ी| उसके गिरने की आवाज सुनकर जलपरी पानी में चली गयी|

पास खड़ी किश्ती में बैठकर उन्होंने जलपरी का पीछा किया| जलपरी एक पहाड़ी गुफा में चली गयी| शीला ने किश्ती का कोना एक चट्टान से बाँध दिया| फिर रस्सी को ढीला छोड़ वे दोनों गुफा में चली गयीं इससे गुफा में गम हो जाने के का खतरा नहीं था| लेकिन कुछ देर बाद उन्हें पता लगा कि रस्सी को किसी ने काट दिया है| वह गुफा की भूल-भुलैया में फँस गयीं| उसी समय जलपरी पानी से बाहर निकली और उन्हें रास्ता दिखाती हुई गुफा से बाहर ले गयी| फिर वह पानी में डूब गयी|

गुफा से बाहर निकालकर वे कैंप की ओर चल दी| तभी सामने से उस बूढ़े को आते देख वे एक झाड़ी के पीछे छिप गयी| बूढ़ा तेज कदमों से आगे बढ़कर गायब हो गया| दोनों ने उसका पीछा किया| वह एक मकान में चला गया| वे एक खिड़की के पास बैठकर अंदर की बातें सुनने लगी बूढ़ा कह रहा था| हमें समुंद्र में से खजाना निकाल लेना चाहिये| परंतु उससे पहले उस जलपरी को मारना पड़ेगा| हमें पानी में जाते ही वह मार सकती है| अब शीला और मीरा फिर जलपरी की खोज में चल पड़ी| तभी उन्हें जलपरी दिखाई दी| शीला ने अपने भाई मोहन को भी बुला लिया| वह गोताखोर की पोशाक पहनकर आया था| वह परी के पीछे कूद गया और तस्वीरें खींचने लगा|

मोहन के जाते ही शीला और मीरा को बूढ़े तथा उसके साथियों ने पकड़ लिया| वे जान गये कि लड़कियों को खजाने का रहस्य पता लग गया है| बूढ़े को शीला और मीरा के रखवाली के लिये छोड़कर वे जलपरी को मारने और खजाना प्राप्त करने चले गये| तभी मोहन ने आकर उन दोनों को बचा लिया|

मीरा ने सारी बात मोहन को बतायी| तीनों समुद्र की ओर भागे| स्कूल की मैडम और लड़कियाँ भी उनसे मिल गयी| उन्होंने देखा कि बदमाश समुंद्र से खजाना निकाल रहे हैं| वह जाकर बदमाशों पर टूट पड़े और उन पर काबू पा लिया|

समुद्र से निकले संदूक में सोना भरा हुआ था| उसी समय पुलिस आ गयी| जलपरी का कहीं पता नहीं था| उसी शाम स्कूल में एक पुलिस इंस्पेक्टर और एक लड़की आये| पुलिस वाले ने बताया यही आपकी जलपरी है| यह खुफिया विभाग की तरफ से बदमाशों की जासूसी कर रही थी| लोग इसे असली जलपरी समझते थे| गुफा वाली रस्सी इसी ने काटी थी| सभी हैरान थे|

शिक्षा- असली और नकली की पहचान जानकार करनी चाहिए|

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