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इंसान-इंसान में भेद (बादशाह अकबर और बीरबल)

बादशाह अकबर ने बीरबल से सवाल किया – “इस संसार में इंसान-इंसान में भेद क्यों है, कोई तो भूखे पेट सो जाता है और किसी के पास इतना है कि पेट भरने के बाद फेंकना पड़ता है| सभी को ऊपर वाले ने ही बनाया है तो फिर यह भेद क्यों है?”

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हुजूर, संसार को चलाने के लिए ही ऊपर वाले ने खुद ही कुछ भेद बनाए हैं, अगर वह ऐसा न करे तो इस दुनिया का चक्र ही रुक जाएगा|” बीरबल ने कहा|

“वह कैसे?” बादशाह अकबर को जिज्ञासा हुई|

“जहांपनाह, आपके दरबार में न जाने कितने सेवक हैं, आप किसी को दो सौ रुपये, किसी को तीन सौ तथा किसी को पांच सौ रुपये वेतन देते हैं, जबकि सभी को पेट ही भरना होता है, किन्तु उन्हें वेतन उनकी योग्यता और काम के अनुसार मिलता है| हुजूर, हर काम को करने वाले अपने-अपने हुनर के लोग होते हैं और उन्हीं के अनुसार उन्हें भरण-पोषण भी मिलता है| और यही ऊपर वाले का न्याय भी है| अब जो आदमी मेहनत से जी चुराएगा, काम नहीं करेगा तो उसका पेट कहां से भरेगा|”

बीरबल का जवाब सुनकर बादशाह अकबर संतुष्ट हो गए|

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