डूबते को तिनके का सहारा (बादशाह अकबर और बीरबल)

(0 votes)
  • font size
  • 2086 Views



बादशाह अकबर अपने दरबारियों और कुछ अंगरक्षकों के साथ नौका-विहार कर रहे थे| बीरबल भी उनके साथ था| नाव जब बीच नदी में पहुंची तो अकबर ने एक तिनका दिखाकर कहा - "कहते हैं डूबते को तिनके का सहारा, आज देखते हैं यह तिनका किसका सहारा बनता है| जो भी इस नदी को तिनके के सहारे पार कर लेगा मैं उसे दिल्ली का बादशाह बना दूंगा|"

"डूबते को तिनके का सहारा" सुनने के लिए Play Button क्लिक करें | Listen Audio

सभी दरबारी एक-दूसरे का मुंह देखने लगे, तभी बीरबल ने कहा - "हुजूर मैं इस तिनके के सहारे नदी पार कर सकता हूं, किन्तु बादशाह बनने के बाद|" 

अपनी आप बीती, आध्यात्मिक या शिक्षाप्रद कहानी को अपने नाम के साथ इस पोर्टल में सम्मलित करने हेतु हमें ई-मेल करें । (Email your story with your name, city, state & country to: This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it. ) Submit your story to publish in this portal

"हमें मंजूर है, आज के लिए तुम बादशाह हुए, मेरा राज-पाट, दरबारी, अंगरक्षक-सभी आज तुम्हारी सेवा में रहेंगे और तुम्हारी आज्ञा का पालन करेंगे|" अकबर ने कहा और वह तिनका बीरबल को दे दिया|

तिनका अब बीरबल के हाथ में था, उसने अपने अंगरक्षकों से कहा - "अब मैं तुम्हारा बादशाह हूं, उम्मीद है तुम लोग अपने कर्त्तव्यों का पालन करोगे|"

यह कहकर बीरबल नदी में कूदने को तैयार हुआ, किन्तु उसके अंगरक्षकों ने रोक लिया और कहा - "आप हमारे बादशाह हैं और हमारा कर्त्तव्य है आपकी रक्षा करना|"

बीरबल बार-बार स्वयं को छुड़ाकर नदी में कूदने की कोशिश करता रहा और हर बात अंगरक्षक पकड़कर रोक लेते| इसी कशमकश में नाव किनारे आ लगी|

"बीरबल तुम हार गए|" नाव किनारे लगने पर बादशाह अकबर ने कहा|

"नहीं हुजूर! मैं हारा नहीं हूं, मैं तो इसी तिनके के सहारे किनारे तक पहुंचा हूं| यह तिनका मेरे हाथ में नहीं होता, तो अंगरक्षक मुझे नहीं रोकते और अवश्य ही मैं डूब जाता|" बीरबल ने जवाब दिया|

बीरबल की चतुराई को अकबर समझ गए और बोले - "बीरबल तुम सचमुच जीत गए|" 

कौन मुर्ख, कौन समझदार चार मुर्ख बीरबल की खिचड़ी झूठ और सच

Please write your thoughts or suggestions in comment box given below. This will help us to make this portal better.

SpiritualWorld.co.in, Administrator
अपनी आप बीती, आध्यात्मिक या शिक्षाप्रद कहानी को अपने नाम के साथ इस पोर्टल में सम्मलित करने हेतु हमें ई-मेल करें । (Email your story with your name, city, state & country to: This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it. ) Submit your story to publish in this portal

 

नम्रता का पाठ

एक बार अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन नगर की स्थिति का जायजा लेने के लिए निकले। रास्ते में एक जगह भवन का निर्माण कार्य चल रहा था। वह कुछ देर के लिए वहीं रुक गए और वहां चल रहे कार्य को गौर से देखने लगे। कुछ देर में उन्होंने देखा कि कई मजदूर एक बड़ा-सा पत्थर उठा कर इमारत पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। किंतु पत्थर बहुत ही भारी था, इसलिए वह more...

व्यर्थ की लड़ाई

एक आदमी के पास बहुत जायदाद थी| उसके कारण रोज कोई-न-कोई झगड़ा होता रहता था| बेचारा वकीलों और अदालत के चक्कर के मारे परेशान था| उसकी स्त्री अक्सर बीमार रहती थी| वह दवाइयां खा-खाकर जीती थी और डॉक्टरों के मारे उसकी नाक में दम था| एक दिन पति-पत्नी में झगड़ा हो गया| पति ने कहा - "मैं लड़के को वकील बनाऊंगा, जिससे वह मुझे सहारा दे सके|" more...

धर्म और दुकानदारी

एक दिन एक पण्डितजी कथा सुना रहे थे| बड़ी भीड़ इकट्ठी थी| मर्द, औरतें, बच्चे सब ध्यान से पण्डितजी की बातें सुन रहे थे| पण्डितजी ने कहा - "इस दुनिया में जितने प्राणी हैं, सबमें आत्मा है, सारे जीव एक-समान हैं| भीड़ में एक लड़का और उसका बाप बैठा था| पण्डितजी की बात लड़के को बहुत पसंद आई और उसने उसे गांठ बांध ली| अगले दिन लड़का दुकान पर गया| थोड़ी देर में एक more...
 

समझदारी की बात

एक सेठ था| उसने एक नौकर रखा| रख तो लिया, पर उसे उसकी ईमानदारी पर विश्वास नहीं हुआ| उसने उसकी परीक्षा लेनी चाही| अगले दिन सेठ ने कमरे के फर्श पर एक रुपया डाल दिया| सफाई करते समय नौकर ने देखा| उसने रुपया उठाया और उसी समय सेठ के हवाले कर दिया| दूसरे दिन वह देखता है कि फर्श पर पांच रुपए का नोट पड़ा है| उसके मन में थोड़ा शक पैदा हुआ| more...

आध्यात्मिक जगत - World of Spiritual & Divine Thoughts.

Disclaimer

 

इस वेबसाइट का उद्देश्य जन साधारण तक अपना संदेश पहुँचाना है| ताकि एक धर्म का व्यक्ति दूसरे धर्म के बारे में जानकारी ले सके| इस वेबसाइट को बनाने के लिए विभिन्न पत्रिकाओं, पुस्तकों व अखबारों से सामग्री एकत्रित की गई है| इसमें किसी भी प्रकार की आलोचना व कटु शब्दों का प्रयोग नहीं किया गया|
Special Thanks to Dr. Rajni Hans, Ms. Karuna Miglani, Ms. Anisha Arora, Mr. Ashish Hans, Ms. Mini Chhabra & Ms. Ginny Chhabra for their contribution in development of this spiritual website. Privacy Policy | Media Partner | Wedding Marketplace

Vulnerability Scanner

Connect With Us