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बीरबल ने आज्ञा मानी (बादशाह अकबर और बीरबल)

बीरबल से किसी बात पर नाराज हो गए बादशाह अकबर और गुस्से में बीरबल से कह दिया कि तुरन्त यहां से चले जाओ और दुबारा कभी हमारे राज्य की धरती पर पैर मत रखना वरना मृत्युदण्ड दे दिया जाएगा|

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बीरबल चुपचाप वहां से चला गया| कुछ दिनों बाद बादशाह अकबर को अहसाह हुआ कि उन्होंने जो किया वह गलत था| उन्हें बीरबल की याद सताने लगी किन्तु वह बीरबल को कहां खोजने जाते| उन्हें मालूम ही नहीं था कि वह कहां है?

एक दिन बादशाह अकबर सैर करके लौट रहे थे तो अचानक उनकी नजर बीरबल पर पड़ी| वह एक बैलगाड़ी पर बैठा हुआ था| बीरबल को देखकर बादशाह अकबर पहले तो प्रसन्न हुए, फिर उन्हें अपना हुक्म याद आया तो पूछा – “क्यों बीरबल, तुम्हें हमारा भी डर नहीं है, तुमने हमारे हुक्म की अवहेलना की, मैंने कहा था कि हमारे राज्य की धरती पर पैर मत रखना, फिर तुम यहां कैसे?”

“हुजूर, मैं तो आपके हुक्म का ही पालन कर रहा हूं, आपकी आज्ञा अनुसार मैं पहले अरब देश गया और वहां जाकर, वहां की मिटटी इस गाड़ी पर बिछा दी और लौट आया| अब सारी जिंदगी इसी गाड़ी पर बिता दूंगा, आपके राज्य की जमीन पर पैर भी नहीं रखा है और न ही रखूंगा|” बीरबल ने कहा|

बादशाह ने देखा कि सचमुच गाड़ी पर मिटटी पड़ी हुई थी और बीरबल उसी मिटटी के ऊपर बैठा था| बीरबल की चमत्कारी बुद्धि पर बादशाह अकबर बेहद प्रसन्न हुए| उन्हें खुशी थी कि बीरबल ने उनकी आज्ञा का पालन भी किया और उनसे दूर भी नहीं हुआ| बादशाह ने बीरबल को माफ कर दिया और पुन: दरबारी काम-काज सम्भालने की आज्ञा दी|

बीरबल ने बादशाह की इस आज्ञा का भी पालन किया|

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