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बीरबल की खोज (बादशाह अकबर और बीरबल)

दरबारियों की चुगलखोरी से परेशान होकर बीरबल अज्ञातवास पर चला गया| बादशाह अकबर ने उसकी बहुत खोज करवाई किन्तु नहीं मिला| उन्हें इतना तो यकीन था कि वह आसपास के किसी गांव में छिपकर रह रहा है, किन्तु कहां… यह पता नहीं चल पा रहा था|

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बीरबल की खोज के लिए बादशाह अकबर को एक तरकीब सूझी, उन्हें मालूम था कि बीरबल को उसकी बुद्धिमानी से ही खोजा जा सकता है| अत: उन्होंने अपने राज्य के सभी गांवों के पंचायती सदस्यों को आदेश दिया कि वे एक निश्चित दिन आधी धूप और आधी छांव के साथ यमुना घाट के पास उपस्थित हों अन्यथा उन पर जुर्माना लगेगा|

सभी गांवों के प्रतिनिधि निश्चित दिन निश्चित स्थान पर पहुंच गए किंतु बादशाह के आदेश का पालन केवल गोकुलपुरा गांव पंचायत के सदस्य ही कर सके, क्योंकि वे लोग सिर पर खाट रखकर वहां उपस्थित थे, जिसके कारण वे आधी धूप और आधी छांव के साथ उपस्थित थे| बादशाह अकबर समझ गए कि बीरबल गोकुलपुरा में ही है| उन्होंने तसल्ली के लिए गोकुलपुरा में एक नया आदेश भेज दिया कि महल के कुएं ने गोकुलपुरा गांव के कुओं को अपनी शाही दावत में आमंत्रित किया है, अत: उस गांव के समस्त कुएं दावत में हाजिर हों|

उस संदेश के जवाब में राजदरबार में भी गांव की ओर से संदेश पहुंचा – “गांव के सभी कुएं महल के कुओं के आमंत्रण पर खुश हैं, किन्तु वे चाहते हैं कि महल का कुआं स्वयं आकर उन्हें आमंत्रित करे, तभी वे दावत में उपस्थित होंगे|”

यह संदेश मिलते ही बादशाह अकबर को यकीन हो गया कि बीरबल गोकुलपुरा में ही है| वे वहां गए और पंचायत के लोगों से मिलकर पता किया कि उन्हें यह राय किसने दी| उनकी मदद से बादशाह बीरबल तक पहुंच गए और उसे गले लगाकर बोले – “बीरबल, तुम कहीं भी छिप जाओ किंतु तुम्हारी समझदारी नहीं छिप सकती… वह तुम्हारा भेद खोल ही देगी|”

बीरबल मुस्कराकर रह गया|

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