🙏 जीवन में कुछ पाना है तो झुकना होगा, कुएं में उतरने वाली बाल्टी झुकती है, तब ही पानी लेकर आती है| 🙏

भलाई का बदला

भलाई का बदला

एक बार की बात है कि एक मधुमक्खी किसी सरोवर के ऊपर से उड़ती हुई जा रही थी कि एकाएक ही उस सरोवर में गिर पड़ी| उसके पँख भीग चुके थे| अब वह उड़ने में असमर्थ थी| इस तरह उसकी मृत्यु अवश्य संभावी थी|

“भलाई का बदला” सुनने के लिए Play Button क्लिक करें | Listen Audio

सरोवर के पास ही पेड़ पर एक कबूतर बैठा था| उसने मधुमक्खी को डूबते देखा तो पेड़ से एक पत्ता तोड़ा और अपनी चोंच में दबाकर सरोवर में मधुमक्खी के पास गिरा दिया| धीरे-धीरे मधुमक्खी उस पत्ते पर चढ़ गई|

कुछ ही देर में उसके पँख सूख गए| उसने कबूतर को धन्यवाद दिया और उड़कर दूर चली गई|

कुछ समय बीत जाने के बाद कबूतर पर भारी संकट आ पड़ा| वह पेड़ की एक शाखा पर आँखें मूंदकर सो रहा था| तभी एक बहेलिए ने तीर कमान से उस पर निशाना साधा|

कबूतर को कुछ पता नही था| लेकिन मधुमक्खी ने बहेलिए कि निशाना साधते हुए देख लिया था| वह तुरंत उड़कर बहेलिए के पास पहुँची और उसके हाथ पर डंक मार दिया| बहेलिया दर्द से बिलबिलाने लगा| उसकी बिलबिलाहट से कबूतर कि नींद टूट गई और उसके प्राण बच गए|


कथा-सार

उपकार के बदले उपकार मिले, ऐसा यदा-कदा ही होता है अन्यथा उपकृत प्राणी सदैव उपकार करने वाले का आभारी रहता है और प्रयास करता है कि वह भी उसके किसी काम आ सके| कबूतर ने मधुमक्खी की प्राण रक्षा की थी तो समय पर उसने भी अपना फ़र्ज पूरा कर दिखाया|

NO COMMENTS

LEAVE A COMMENT

🙏 ♻ प्रयास करें कि जब हम आये थे उसकी तुलना में पृथ्वी को एक बेहतर स्थान के रूप में छोड़ कर जाएं। सागर में हर एक बूँद मायने रखती है। ♻ 🙏