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बुद्धिमान लवा – शिक्षाप्रद कथा

बुद्धिमान लवा - शिक्षाप्रद कथा

एक बुद्धिमान लवा पक्षी का परिवार पके धान के खेतों में रहता था| उनका घोंसला बहुत आरामदेह था| परिवार में सभी सदस्यों में अथाह प्रेम था|

एक सुबह अपने बच्चों के लिए भोजन की तलाश में जाने से पहले बच्चों की मां ने कहा – “देखो बच्चो! किसान बहुत जल्दी अपनी फसल काटने आएगा| ऐसी स्थिति में हमें अपना नया घर खोजना पड़ेगा| तो तुम सब अपने कान और आंखें खुलीं रखना और जब मैं शाम को लौटकर आऊं तो मुझे बताना कि तुमने क्या देखा और क्या सुना?”

शाम को जब लवा अपने घर लौटी तो उसने अपने परिवार को परेशान हाल पाया| उसके बच्चे कहने लगे – “हमें जल्दी ही यह स्थान छोड़ देना चाहिए| किसान अपने पुत्रों के साथ अपने खेत की जांच करने आया था| वह अपने पुत्रों से कह रहा था| फसल तैयार है, हमें कल अपने सभी पड़ोसियों को बुलाकर फसल काट लेनी चाहिए|”

लवा ने अपने बच्चों की बातें ध्यानपूर्वक सुनीं, फिर बोली – “अभी कोई खतरा नहीं| कल भी होशियार रहना| किसान जो कुछ करे या कहे, वह मुझे शाम को बताना|”

दूसरे दिन शाम को जब लवा वापस लौटी तो उसने अपने बच्चों को बहुत भयभीत पाया| मां को देखते ही वे चिल्लाए – “किसान दुबारा यहां आया था| कह रहा था, यह फसल जल्दी ही काटी जानी चाहिए| अगर हमारे पड़ोसी हमारी सहायता नहीं करते तो हम अपने रिश्तेदारों को बुलाएंगे| जाओ, अपने चाचा और चचेरे भाइयों आदि से कहो कि कल आकर फसल काटने में हमारी सहायता करें|”

लवा मुस्कराई और बोली – “प्यारे बच्चो! चिन्ता मत करो| किसान के रिश्तेदारों के पास तो उनकी अपनी ही फसल काटने के लिए पड़ी है| वे भला यहां फसल काटने क्यों आएंगे|”
अगले दिन लवा फिर बाहर चली गई| जब वह शाम को लौटी तो बच्चे उसे देखते ही चिल्लाए – “ओह मां! वह किसान आज कह रहा था कि यदि उसके रिश्तेदार और पड़ोसी फसल काटने नहीं आते तो वह खुद अपनी फसल काटेगा| तो अब तो यहां रहने का कोई लाभ नहीं है|”

“तब तो हमें शीघ्र ही यहां से चलना चाहिए|” लवा बोली – “यह मैं इसलिए कह रही हूं कि जब कोई किसी कार्य के लिए किसी अन्य पर निर्भर रहता है तो वह कार्य कभी पूरा नहीं होता| परंतु वही व्यक्ति जब उस कार्य को स्वयं करने की ठान लेता है तो संसार की कोई भी शक्ति उसे उस कार्य को करने से नहीं रोक सकती| तो यही वह समय है, जब हमें अपना घर बदल देना चाहिए!”

शिक्षा: आत्म-निर्भरता श्रेष्ठ गुण है|

 

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