🙏 सतनाम वाहे गुरु, गुरु पर्व की असीमित शुभकामनाएं... आप सभी पर वाहे गुरु की मेहर हो! 23 Nov 2018 🙏

अध्याय 33

महाभारत संस्कृत - शांतिपर्व

1 [युधिस्ठिर] हताः पुत्राश च पौत्राश च भरातरः पितरस तथा
शवशुरा गुरवश चैव मातुलाः सपितामहाः

2 कषत्रियाश च महात्मानः संबन्धिसुहृदस तथा
वयस्या जञातयश चैव भरातरश च पितामह

3 बहवश च मनुष्येन्द्रा नानादेशसमागताः
घातिता राज्यलुब्धेन मयैकेन पितामह

4 तांस तादृशान अहं हत्वा धर्मनित्यान महीक्षितः
असकृत सॊमपान वीरान किं पराप्स्यामि तपॊधन

5 दह्याम्य अनिशम अद्याहं चिन्तयानः पुनः पुनः
हीनां पार्थिव सिंहैस तैः शरीमद्भिः पृथिवीम इमाम

6 दृष्ट्वा जञातिवधं घॊरं हतांश च शतशः परान
कॊटिशश च नरान अन्यान परितप्ये पितामह

7 का नु तासां वरस्त्रीणाम अवस्थाद्य भविष्यति
विहीनानां सवतनयैः पतिभिर भरातृभिस तथा

8 अस्मान अन्तकरान घॊरान पाण्डवान वृष्णिसंहितान
आक्रॊशन्त्यः कृशा दीना निपतन्त्यश च भूतले

9 अपश्यन्त्यः पितॄन भरातॄन पतीन पुत्रांश च यॊषितः
तयक्त्वा पराणान परियान सर्वा गमिष्यन्ति यमक्षयम

10 वत्सलत्वाद दविजश्रेष्ठ तत्र मे नास्ति संशयः
वयक्तं सौक्ष्म्याच च धर्मस्य पराप्स्यामः सत्रीवधं वयम

11 ते वयं सुहृदॊ हत्वा कृत्वा पापम अनन्तकम
नरके निपतिष्यामॊ हय अधःशिरस एव च

12 शरीराणि विमॊक्ष्यामस तपसॊग्रेण सत्तम
आश्रमांश च विशेषांस तवं ममाचक्ष्व पितामह

Munish Ahuja Founder SpiritualWorld.co.in

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