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सचखण्ड से निरंकारी उपदेश – साखी श्री गुरु नानक देव जी

सचखण्ड से निरंकारी उपदेश

गुरु जी नित्य की मर्यादा के अनुसार नदी में स्नान करने गए तो अपने वस्त्र सेवादार को पकड़ा कर नदी में गोते लगाने लगे| वे इस तरह अलोप हुए कि बाहर न आए| सेवादारों ने यह बात नवाब व जीजा जै राम को बताई| उन्होंने गुरु जी को ढूंढने की पूरी कोशिश की, जाल भी डलवाए, परन्तु आप का पता न चला|

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तीन दिन के पश्चात् गुरु जी वेईं नदी से बाहर आए तो दर्शन करने वालों की भीड़ लग गई| स्नेहियों ने पूछा, महाराज! आप तीन दिन नदी में किस तरह रहे? गुरु जी ने उत्तर दिया, यहां से हम निरंकार के पास सचखण्ड गए थे| निरंकार ने हमें आज्ञा दी कि आप लोगों में प्रेमा भक्ति पैदा करके सत्य का प्रचार करो| वहां गुरु जी ने विनयपूर्वक शब्द का उच्चारण भी किया|

मंत्र – ੴसतिनामु करता पुरखु निरभउ निरवैर अकाल मूरति अजूनि सैभं गुर प्रसादि (जपुजी साहिब) दिया| प्रसन्न होकर अकाल पुरख ने यह गुरु मन्त्र दिया और उन्होंने आज्ञा दी इसको आप जपो और कलयुग के जीवों के कल्याण के लिए उनसे इसका जाप कराओ|

श्री गुरु नानक देव जी – जीवन परिचय

 

श्री गुरु नानक देव जी – ज्योति ज्योत समाना

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