🙏 जीवन में कुछ पाना है तो झुकना होगा, कुएं में उतरने वाली बाल्टी झुकती है, तब ही पानी लेकर आती है| 🙏

Homeपरमार्थी साखियाँमुर्ख को समझाना बेकार

मुर्ख को समझाना बेकार

एक बार किसी मुर्ख व्यापारी ने एक घोड़े पर एक तरफ़ दो मन गेहूँ लाद दिया तथा दूसरी ओर दो मन रेत डाल ली कि बोझ बराबर हो जाये और घोड़े को तकलीफ़ न हो| एक ग़रीब आदमी ने, जो उसे बोझ लादते देख रहा था, पूछा, “श्रीमान यह आप क्या कर रहे हैं?” व्यापारी बोला, “एक तरफ़ गेहूँ और दूसरी तरफ़ भार बराबर करने के लिए रेत है?” वह आदमी कहने लगा कि अगर दो मन गेहूँ को एक मन एक ओर और एक मन दूसरी ओर डाल लेते तो क्या था? घोड़ेवाले ने कहा, “तेरी कितनी दौलत है?” उसने कहा कि बस जान ही जान है| तो घोड़ेवाले ने कहा कि मेरे साथ बात मत कर| कहीं मैं भी तेरे जैसा ग़रीब न हो जाऊं| अपनी अक्ल और बदकिस्मती अपने पास रख|

सो नासमझ लोग सलाह देने के लिए तैयार नहीं होते| इसी तरह सन्त भी शिक्षा देते हैं पर हम उनकी एक नहीं सुनते|

उन जैसा बहरा और कौन हो सकता है जो सुनेंगे नहीं| (कहावत)

FOLLOW US ON:
NO COMMENTS

LEAVE A COMMENT

🙏 ♻ प्रयास करें कि जब हम आये थे उसकी तुलना में पृथ्वी को एक बेहतर स्थान के रूप में छोड़ कर जाएं। सागर में हर एक बूँद मायने रखती है। ♻ 🙏